90 के दशक में अपनी दमदार बॉडी, एक्शन और माचो अंदाज से बॉलीवुड के ‘अन्ना’ बने सुनील शेट्टी आज 65 साल के हो चुके हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके पास काम की कमी नहीं है. हाल ही में वह कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ में नजर आए थे और अब खबर है कि वह टाइगर श्रॉफ के साथ एक एक्शन फिल्म में भी दिखाई दे सकते हैं.
लेकिन सवाल ये है कि आखिर इतने सालों बाद भी सुनील शेट्टी इंडस्ट्री में इतने रेलेवेंट कैसे बने हुए हैं? इस सवाल का जवाब खुद ‘अन्ना’ ने दिया है.
पहले परिवार के लिए कमाते थे, अब पैसों की दौड़ नहीं
सुनील शेट्टी ने हाल ही में लिंकडिन पर एक दिल छू लेने वाला नोट लिखा. इसमें उन्होंने बताया कि वक्त के साथ काम को लेकर उनकी प्राथमिकताएं काफी बदल गई हैं. एक्टर ने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में वह मुख्य रूप से पैसों के लिए काम करते थे, ताकि अपने परिवार को एक आरामदायक जिंदगी दे सकें. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और वह उन पुराने आर्थिक पड़ावों के पीछे नहीं भागते.
यानी जिस दौड़ में कभी परिवार की बेहतर जिंदगी के लिए शामिल होना जरूरी था, अब सुनील उस दौड़ से काफी आगे निकल चुके हैं.
फिर भी मिल रहा है अच्छा काम, तो आखिर राज क्या है?
65 की उम्र में भी सुनील शेट्टी लगातार अच्छे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन रहे हैं. इतने लंबे करियर के बाद भी वह इंडस्ट्री में रेलेवेंट कैसे बने हुए हैं, तो उन्होंने इसका जवाब काफी दिलचस्प अंदाज में दिया.
सुनील ने कहा- मुझे लगता है कि इसकी वजह ये है कि मैं आसानी से उपलब्ध नहीं होता. मैंने हमेशा कोशिश की है कि उन्हीं लोगों के साथ काम करूं, जिनसे मुझे लगता है कि मैं आगे बढ़ सकता हूं और कुछ ऐसा कर सकता हूं, जिसका लोगों पर अच्छा असर पड़े.
सुनील ने अपनी पॉजिटिव सोच को भी काम मिलते रहने की बड़ी वजह बताया. उन्होंने कहा- मैं आज भी इसलिए चुना जाता हूं क्योंकि जिंदगी को लेकर मेरा नजरिया बहुत पॉजिटिव है. मैं बहुत संतुष्ट, खुश और सिक्योर हूं और असल में यही मेरी रेलेवेंस है. एक्टर ने यह भी कहा कि वह अपनी जिंदगी को लेकर पूरी तरह ईमानदार हैं. उन्होंने अपनी गलतियों और असफलताओं को भी कभी छिपाने की कोशिश नहीं की.
उनके शब्दों में, वह वही हैं जो हैं और अपनी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ है, चाहे वह उनकी सफलता हो, असफलता हो या उनकी गलतियां- वह उसके बारे में पूरी तरह ईमानदार हैं.
उम्र छिपाने के बजाय स्वीकार की, तभी मिला बेहतर काम
सुनील शेट्टी के मुताबिक उनके करियर को लंबे समय तक चलाने में एक और चीज ने बहुत मदद की, अपनी उम्र को स्वीकार करना.उनका कहना है कि कैमरे के सामने हो या कैमरे के पीछे, उन्होंने कभी अपनी उम्र से भागने की कोशिश नहीं की.
सुनील ने कहा- उम्र के हिसाब से रोल स्वीकार करना ही एकमात्र वजह है कि मैं आज इस मुकाम पर हूं. आधी उम्र के बच्चों से मुकाबला करने का कोई मतलब नहीं है, जो मुझसे ज्यादा अच्छे दिखते हैं, बेहतर बॉडी बना सकते हैं और अपने काम में माहिर हैं.
यानी सुनील को पता है कि वक्त बदल चुका है. आज उनके सामने उनसे आधी उम्र के एक्टर्स हैं, लेकिन वह उनके साथ उसी अंदाज में मुकाबला करने के बजाय अपनी उम्र और अनुभव को अपनी ताकत बनाना पसंद करते हैं.
पति, बेटे, पिता और अब दादा की भूमिका भी खुशी से स्वीकार की
सुनील ने सिर्फ फिल्मी किरदारों की बात नहीं की. उन्होंने कहा कि जिंदगी में मिलने वाली हर भूमिका को भी उन्होंने उसी तरह स्वीकार किया है. चाहे वह पति हों, बेटे हों, पिता हों या दादा, उन्होंने जिंदगी के हर रोल को खुले दिल से अपनाया है. उन्होंने कहा कि शरीर में वक्त के साथ जो बदलाव आए हैं, उन्हें भी उन्होंने खुशी से स्वीकार किया है.
उम्र बढ़ने को लेकर सुनील का नजरिया भी काफी अलग है. वह इसे छिपाने या रोकने की कोशिश नहीं करते. उन्होंने कहा- मैं लगातार खुद पर काम कर रहा हूं. इसलिए मैं इसे एंटी एजिंग नहीं कहूंगा, लेकिन मैंने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को थोड़ा धीमा जरूर किया है. और फिर उन्होंने उम्र को लेकर एक ऐसी बात कही, जो उनकी सोच को पूरी तरह बयां करती है. वो कहते हैं कि-झुर्रियां हमेशा रहेंगी और अब ये मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं.
‘आज की फिल्मों में बहुत ज्यादा हिंसा है’
सुनील को आज की फिल्मों में एक चीज बिल्कुल पसंद नहीं आती और वह है बहुत ज्यादा हिंसा और खून-खराबा. उन्होंने कहा कि आज की फिल्मों में हिंसा को ज्यादा से ज्यादा रियल और ग्राफिक दिखाने की कोशिश की जाती है. उनके मुताबिक 90 के दशक की फिल्मों में एक्शन इतना ग्राफिक नहीं होता था.
उन्होंने कहा- आज शायद ये थोड़ा नेगेटिव हो गया है, क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा हिंसा होती है. हम इसे जितना रियल और जितना खौफनाक बना सकते हैं, बनाना चाहते हैं. सुनील ने माना कि कई बार आज के एक्शन सीक्वेंस को पूरा देखना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि उनमें खून खराबा बहुत ज्यादा होता है.
उन्होंने आखिर में कहा- कभी-कभी पूरा एक्शन सीन देखना भी मुश्किल होता है, क्योंकि उसमें बहुत खून-खराबा होता है. आज की फिल्मों में मुझे बस यही चीज पसंद नहीं है.
65 की उम्र में भी ‘अन्ना’ की रफ्तार जारी
सुनील शेट्टी का करियर इस बात की मिसाल है कि बॉलीवुड में लंबी पारी खेलने के लिए सिर्फ जवानी या स्टारडम ही काफी नहीं होता. वक्त के साथ खुद को बदलना, अपनी उम्र को स्वीकार करना और सही काम चुनना भी उतना ही जरूरी है.
आज वह उस दौर में हैं, जहां कभी उनके लिए पैसा सबसे बड़ी जरूरत था, लेकिन अब वह काम की क्वालिटी, अपनी खुशी और पॉजिटिव इम्पैक्ट को ज्यादा महत्व देते हैं. 90s का एक्शन हीरो अब 65 की उम्र में भी पर्दे पर एक्टिव है- बस फर्क इतना है कि पहले वह अपनी ताकत से पहचान बनाता था, और आज अपनी समझ, अनुभव और उम्र को स्वीकार करने के अंदाज से.