सैफ अली खान ने एक्ट्रेस करीना कपूर से साल 2012 में इंटरफेथ मैरिज की थी. करीना से पहले सैफ की शादी एक्ट्रेस अमृता सिंह से हुई थी. अमृता भी दूसरे धर्म से थीं. सैफ के पेरेंट्स शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान भी अलग-अलग धर्म से ताल्लुक रखते हैं. ऐसे में सैफ हर धर्म का बराबरी से सम्मान करते हैं. अब सैफ ने बताया कि वो अपने नन्हे बेटों तैमूर और जेह को किस तरह धर्म के बारे में सिखाते हैं.
क्या बोले सैफ अली खान?
सैफ अली खान ने 'वी द वुमन' के लंदन एडिशन में कहा- इस बारे में बच्चों से बातचीत करना मुझे बहुत पसंद है, क्योंकि मैं खुद बहुत ज्यादा धार्मिक इंसान नहीं हूं. मेरी मां ने मुझे सिखाया था और अब मैं अपने बच्चों को सिखा रहा हूं कि भगवान एक ही है, लेकिन उनके कई नाम हैं. यह काफी सिंपल है. आप भगवान की अलग-अलग जगहों पर पूजा करते हैं और अगर आपका धर्म आपके साथ के लोगों के लिए प्यार और माफ करने की भावना सिखाता है, तो यही सब कुछ है.
सैफ आगे हंसते हुए बोले- मैं चर्च और ऐसे स्कूलों में पला-बढ़ा हूं, जहां दिन की शुरुआत प्रार्थना घर से होती थी. मैं यह कहकर वहां से भागने की कोशिश करता था कि मैं दूसरे धर्म से हूं, लेकिन फिर उन्होंने हमारे लिए एक मौलवी का इंतजाम कर दिया था, जो आकर हमसे बात करते थे. लेकिन यह तरकीब भी काम नहीं आई.
'लेकिन मेरी परवरिश काफी हद तक ईसाई माहौल में हुई है. हम दिवाली की तरह ही क्रिसमस भी मनाते थे. मेरी परवरिश कुछ ऐसी ही रही है. मैंने कभी इस बारे में गहराई से नहीं सोचा, क्योंकि यह सब नेचुरली आपके अंदर से ही आता है.'
धर्म को लेकर तैमूर का क्या था जवाब?
सैफ अली खान ने इस दौरान अपने बेटे तैमूर अली खान के साथ हुई रीसेंट बातचीत का भी जिक्र किया. सैफ ने बताया कि उन्होंने अपने 9 साल के बेटे से पूछा था कि रिलीजन और मेथोडोलॉजी में क्या अंतर होता है? इसपर उनके बेटे तैमूर ने जवाब दिया था- धर्म में हम प्रार्थना करते हैं, और मेथोडोलॉजी में हम प्रार्थना नहीं करते. बेटे के जवाब से सैफ काफी इंप्रेस हो गए थे.
सैफ आगे बोले- हम लगातार इन चीजों पर बात करते रहते हैं. मैं लकी हूं कि मेरी परवरिश ऐसे माहौल में हुई है. इन चीजों को लेकर मेरी मां का नजरिया काफी ओपन रहा है. मेरी पत्नी भी ऐसी ही हैं. यह धार्मिक से ज्यादा स्प्रिचुअलिटी के बारे में है.