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'वरना अपराध हो जाएगा', हनुमान अंश के मेकर्स को प्रेमानंद महाराज से मिली वॉर्निंग, किस बात का सताया डर?

फिल्म हनुमान अंश ने महज 2 करोड़ के बजट में 50 करोड़ का शानदार कलेक्शन किया है. निर्माता अनुप्रिया नागर ने प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेकर फिल्म बनाई, जिससे इसकी सफलता में मदद मिली.

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Premanand Maharaj warning to hanuman ansh makers (Photo: Social Media)
Premanand Maharaj warning to hanuman ansh makers (Photo: Social Media)

नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी फिल्म हनुमान अंश की हर ओर चर्चा हो रही है. महज 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म 50 करोड़ का तगड़ा कलेक्शन कर चुकी है. फिल्म बनाने से पहले इसकी निर्माता अनुप्रिया नागर ने प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद लिया था. उन्होंने प्रेमानंद महाराज का मार्गदर्शन लिया. उनके सुझावों को मद्देनजर रखते हुए फिल्म पर काम किया. 

हनुमान अंश बनाने से पहले मिली हिदायत
प्रेमानंद महाराज से निर्माता ने सवाल किया कि ऐसे धार्मिक मार्ग पर रहकर फिल्म बनाने से ये सेवा भी बन सकती है? जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा- ध्यान रहे कि महापुरुषों का अनुकरण करना कठिन होता है. कोई सांसारिकता न आए क्योंकि किसी भी महापुरुष के चरित्र को देखकर हमारे अंदर बैराग्य, भक्ति और ज्ञान- तीनों बातें आनी चाहिए. कहीं किसी महापुरुष के चरित्र में ऐसी, कुछ भी दृश्य या कोई भी ऐसा अभिनय ना प्रस्तुत किया जाए, जो अपराध लग जाए.

''जैसे नीम करोली बाबा एक भगवत प्राप्त महापुरुष हैं, तो इन महापुरुषों का अनुकरण, एक तो किया नहीं जा सकता क्योंकि स्थिति नहीं है. अब अगर हम बाहरी कुछ अनुकरण करते हैं, तो हमको अभिनय में ध्यान रखना है कि कहीं अपनी फिल्म की या अपने नाटक की समाज प्रियता के लिए हम कुछ विषय न परोस दें. हम कहीं कुछ ऐसा न कर दें जो महापुरुष के अभिनय से अलग हो जाए, और वो हमारे लिए अपराध बन जाए. इसलिए सावधान रहें. चाहे लोग देखें या न देखें, जो आपने पढ़ा और सुना है उनके विषय में, ठीक वैसे ही किया जाए, प्रमाणित या अप्रमाणित न किया जाए.''

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प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा- अभिनय में कुछ भी सांसारिकता या विषय न परोस दिया जाए लोकप्रियता के लिए, नहीं तो वो अपराध बन जाएगा क्योंकि महापुरुष का चरित्र निर्विषय होता है. उनका चरित्र लोकपावन करने वाला होता है. अगर किसी महापुरुष का चरित्र करना है तो हमें कुछ दिन साधना करनी होगी. फल-फूल आदि खाकर रहना चाहिए. उसके लिए पवित्र फलाहार, पवित्र सात्विक भोजन, संतों का संग, संतों के चरित्र पढ़ो...तब आप ऐसे महापुरुषों का अभिनय कर सकते हो. नहीं तो बाहरी नाटक दिखा सकते हो, पर वो सत्यता नहीं ला सकते. अभिनय में सत्यता लाने के लिए खुद में साधना करनी पड़ेगी. बिना संतों का चरित्र सुने, दिल में भक्ति नहीं आ सकती. 

फिल्म हनुमान अंश के निर्माताओं ने प्रेमानंद महाराज की बातों को गंभीरता से लिया. शायद यही वजह से फिल्म फ्लॉप होते-होते बची. 17वें दिन इसकी कमाई ने रफ्तार पकड़ी. तबसे मूवी ब्लॉकबस्टर हुई है. इसने 25 दिन में 50 करोड़ कमा लिए हैं.

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