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'ब्रालेट छोटी सी चीज थी' कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना रनौत, राहुल गांधी पर साधा निशाना

बॉलीवुड एक्ट्रेस और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मुद्दा सिर्फ कृति के आउटफिट का नहीं, बल्कि त्योहार की प्रस्तुति का तरीका था. कंगना ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा.

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बेबाक होकर बोलीं कंगना (Photo: ITG)
बेबाक होकर बोलीं कंगना (Photo: ITG)

बॉलीवुड एक्ट्रेस और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने एक बार फिर ज्वैलरी ब्रांड के लिए कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर हुए विवाद पर बात की है. शुरुआत में कृति के आउटफिट पर आपत्ति जताने के बाद कंगना ने अब समझाया है कि उन्हें इस विज्ञापन से आपत्ति क्यों थी. उनका कहना है कि मुद्दा सिर्फ एक्ट्रेस के आउटफिट का नहीं, बल्कि त्योहार की पेशकश का तरीका था. आलोचना के बाद ज्वैलरी ब्रांड ने यह विज्ञापन वापस ले लिया है. 

कंगना ने कृति के आउटफिट के बारे में कहा, उन्हें कौन रोक रहा है कुछ भी पहनने से? किसने उन्हें आज तक रोका है? किसी को क्या पड़ी है कि वो क्या पहनकर आती हैं. कंगना से पूछा गया कि क्या यही कृति ईद पर ऐसे कपड़े पहनकर पोस्ट डाल सकती हैं. कंगना ने कहा कि वहां तो फिर भी आप अपने कजिन से शादी कर सकते हैं. हिंदुओं के रिश्तों में ज्यादा 'गरिमा' और 'सीमाएं' होती भी बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. 

राहुल गांधी पर कसा तंज
डिकोड को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कृति का सपोर्ट करने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी के पोस्ट में रक्षाबंधन का जिक्र क्यों नहीं किया गया. उन्होंने कहा, एक महिला रक्षाबंधन पर जो चाहती है, वो पहन सकती है. लेकिन रक्षाबंधन एक सभ्यता का धार्मिक एक्सप्रेशन है.

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राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कंगना ने दावा किया कि वो अपनी नजरिए को लेकर बहुत कंफ्यूज हैं. तीन-तीन साल की लड़कियां जब बुर्का पहनती हैं, तो उनको नहीं लगता कि ये पितृसत्ता है. क्योंकि उन बच्चियों को पता भी नहीं होता है कि बुर्का क्या होता है. उसके लिए तो वो कभी आवाज नहीं उठाएंगे. उनके मन में 'सनातन धर्म के खिलाफ' एक खास तरह का नजरिया है. चाहे वो मनु ऋषि के बारे में हो या सनातन को अटैक करना हो. ये जो उनकी सोच है सिर्फ सनातन के खिलाफ है. 

कंगना ने ये भी समझाया कि उनके मुताबिक विज्ञापन में आउटफिट सबसे बड़ी समस्या नहीं थी. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि ब्रालेट उसमें से छोटी-सी चीज थी, लेकिन सबसे ज्यादा हिंदुओं को, हम लोग उस लाइन से आते हैं, तो पॉइंट आउट कर सकते हैं. माता-पिता कहां हैं? घर कहां है? हलवा-पूरी, भगवान, टीका, अक्षत, धूप, दीप... कुछ भी नहीं है. नहीं चलेगा टीके के बिना, राखी नहीं चलेगी. आप कहते हैं कि एस्थेटिक्स मायने नहीं रखते. नहीं. एक त्योहार किसी संस्कृति और सभ्यता का एस्थेटिक एक्सप्रेशन होता है.

अब देखते हैं कि कंगना के इस बेबाक बयान पर राहुल गांधी और कृति सेनन कैसे रिएक्ट करते हैं. 

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