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'ऐसी फिल्म नहीं चाहिए', 'हनुमान अंश' का OTT ने उड़ाया मजाक, 14 साल की तपस्या पर छलके डायरेक्टर के आंसू

नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी 'हनुमान अंश' अपनी सादगी के बल पर बॉक्स ऑफिस पर ऐसा गर्दा उड़ा रही है कि एक महीने बाद भी सिनेमाघरों से उतरने का नाम नहीं ले रही. लेकिन इस फिल्म को बनाने में डायरेक्टर ने काफी मुश्किलों का सामना किया है.

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हनुमान अंश बनाने में डायरेक्टर ने झेली मुश्किलें (Photo: Screengrab)
हनुमान अंश बनाने में डायरेक्टर ने झेली मुश्किलें (Photo: Screengrab)

कहते हैं कि अगर सच्ची नीयत से कोई काम किया जाए, तो उसका फल जरूर मिलता है. फिल्म 'हनुमान अंश' की शानदार सफलता को देखकर यह बात बिल्कुल सच साबित होती दिख रही है. नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म की सादगी और भजनों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया है. यही वजह है कि रिलीज के एक महीने बाद भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा रही है.

डायरेक्टर का छलका दर्द

2 करोड़ के बजट में बनी 'हनुमान अंश' ने कमाई के मामले में कई ब्लॉकस्टर फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म को बनाने में डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. 

डॉक्टर से फिल्म निर्माता बने विशाल चतुर्वेदी ने एक इंटरव्यू में 'हनुमान अंश' बनाते समय की कठिनाइयों पर बात की. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि एक बड़े OTT प्लेटफॉर्म ने फिल्म के कॉन्सेप्ट को रिजेक्ट कर दिया था, जिससे वो काफी ट्रिगर हुए थे. 

'द इंडियन थिंग' को दिए एक इंटरव्यू में विशाल ने खुलासा किया- डॉक्टरी छोड़ने के 14 साल बाद मैं 'हनुमान अंश' बना पाया. मैं डॉक्टरी छोड़ने के दो-तीन साल में ही अपनी पहली फिल्म बनाना चाहता था, पर ऐसा हो नहीं पाया. ऐसा नहीं है कि इंडस्ट्री में आते ही कोई भी निर्देशक बन जाता है. मैंने कोविड के समय इस फिल्म पर काम करना शुरू किया था. 

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कैसे आया हनुमान अंश बनाने का आइडिया?

'उस वक्त महज पांच से छह दिनों के अंदर मेरे कई करीबी लोगों का निधन हो गया था, जिनमें मेरी सबसे अच्छी दोस्त की मां, मेरे कजिन और मेरे मेंटर शामिल थे. इस चीज ने मुझे मानसिक रूप से बहुत तोड़ दिया था, क्योंकि डॉक्टर होने के बावजूद मैं किसी की मदद नहीं कर पा रहा था. कोविड की दूसरी लहर के दौरान, मेरे अंदर कुछ पॉजिटिव करने की इच्छा जागी. इसलिए, मैंने क्लबहाउस पर 'हनुमान चालीसा' नाम से एक ग्रुप शुरू किया. इसका मकसद सीधा था कि अगर आप अपना दुख-दर्द बांटना चाहते हैं या अगर आप अपने परिवार के लिए प्रार्थना करना चाहते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ करके कर सकते हैं. धीरे-धीरे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग इससे जुड़ने लगे. 

विशाल आगे बोले- एक किरदार के रूप में हनुमान जी ने मुझे हमेशा आकर्षित किया. यह आइडिया मेरे दिमाग में करीब 20 साल पहले आया था. तब से मैं इसे अपने साथ इसे लेकर घूम रहा था और हर किसी को नीम करोली बाबा की कहानी सुना रहा था. एक बार जब मैंने लोगों को बताना शुरू किया कि मैं उन पर एक फिल्म बनाने जा रहा हूं, तो उनका बड़ा सवाल यही था कि 'बाबा का किरदार कौन निभाएगा?'

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OTT से मिला रिजेक्शन

हालांकि, इस फिल्म को पर्दे पर लाना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि इसे एक बड़े OTT प्लेटफॉर्म ने भी रिजेक्ट कर दिया था. विशाल बोले- एक बार, मैं कुछ कॉन्सेप्ट्स पिच करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े OTT प्लेटफॉर्म के पास गया. उन्हें मेरे पहले दो कॉन्सेप्ट पसंद आए, तो उन्होंने पूछा कि क्या मेरे पास कुछ ऐसे भारतीय कॉन्सेप्ट्स हैं, जिनका इंटरनेशनल जुड़ाव हो. उत्साहित होकर, मैंने उन्हें नीम करोली बाबा के बारे में बताया. मैंने कहा था- यह भारत की एक ऐसी कहानी है, जो पूरी दुनिया के लिए है, क्योंकि ऐपल, मेटा और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियों का उनसे जुड़ाव रहा है. 

'मैंने OTT प्लेटफॉर्म की दो महिला अधिकारियों को यह सब बताया था. उनमें से एक उत्तराखंड की रहने वाली थीं और मेरी बात में थोड़ी दिलचस्पी ले रही थीं, लेकिन वो दूसरी अधिकारी से जूनियर थीं. जैसे ही मैंने अपनी पिच खत्म की, सीनियर अधिकारी ने दोटूक अंदाज में कहा था- हम इस तरह के कॉन्सेप्ट्स की तलाश में नहीं हैं.  उनकी इस बात ने मुझे काफी ट्रिगर कर दिया था.' 

बता दें कि जिस हनुमान अंश फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने रिजेक्ट कर दिया था, वही फिल्म आज बॉक्स पर गर्दा उड़ा रही है. 

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