पन्ना में बारिश शुरू हुई तो रूंझ नदी के किनारे लोगों की भीड़ जुटने लगी. हाथों में कुछ औजार, नजरें नदी की रेत और मिट्टी पर और मन में एक ही उम्मीद - शायद आज किस्मत चमक जाए और कोई हीरा हाथ लग जाए. कोई अकेले नहीं आया था. सैकड़ों लोग नदी की चाल में हीरे खोजने पहुंच गए. कुछ ने तो बाकायदा टेंट लगा लिया और वहीं डेरा जमा लिया.
पन्ना के अलावा आसपास के जिलों और उत्तर प्रदेश के बांदा से भी लोग पहुंचे थे. लेकिन जब लोगों की यह भीड़ वन विभाग तक पहुंची, तो मामला बदल गया. वन अमले की टीम रूंझ नदी पहुंची और लोगों को वहां से हटाना शुरू कर दिया.
मामला पन्ना के विश्रामगंज रेंज का है. रूंझ डैम के डूब क्षेत्र के पास रूंझ नदी की चाल में अचानक लोगों की भीड़ बढ़ गई. बारिश के बाद नदी की रेत और मिट्टी में हीरा मिलने की उम्मीद में लोग अलग-अलग जगहों से यहां पहुंचने लगे. कोई हाथ से मिट्टी छान रहा था, कोई रेत को गौर से देख रहा था और कोई अपनी जगह बनाकर तलाश में जुटा था.

छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़ और दमोह समेत आसपास के इलाकों से लोग यहां पहुंचे थे. उत्तर प्रदेश के बांदा से भी लोग हीरे की तलाश में आए. भीड़ बढ़ी तो कुछ लोगों ने नदी किनारे अस्थायी टेंट तक लगा लिए. यानी उम्मीद सिर्फ कुछ घंटे तलाश करने की नहीं थी, कई लोग यहां रुककर अपनी किस्मत आजमाने पहुंचे थे.
'सालों से बारिश के बाद यहां आती हूं'
हीरे की तलाश में पहुंचीं पन्ना की श्याम बाई बताती हैं कि वह सालों से बरसात के बाद इस नदी में हीरे खोजने आती हैं. इस बार भी वह इसी उम्मीद से पहुंची हैं. हालांकि उनके मुताबिक अभी तक कोई बड़ा हीरा हाथ नहीं लगा.
छोटे-छोटे हीरे मिलते हैं, लेकिन उनसे ज्यादा फायदा नहीं होता. उनकी बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पन्ना में नदी की चाल में हीरा तलाशना कुछ लोगों के लिए कोई नई बात नहीं है. बारिश आते ही यह उम्मीद फिर जिंदा हो जाती है कि शायद इस बार जमीन से निकली कोई चमक जिंदगी बदल दे.

पुराने पन्ना की पार्वती कोदर भी इसी तलाश में रूंझ नदी पहुंची थीं. उनका कहना है कि इस बार उन्हें काफी परेशानी हुई और वन विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें वहां से हटा दिया. उनके मुताबिक, वह सिर्फ थोड़ी देर ही तलाश कर पाईं.
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रूंझ नदी के आसपास लोगों की बढ़ती भीड़ की जानकारी वन विभाग को मिली. इसके बाद टीम मौके पर पहुंची. वन विभाग की चिंता सिर्फ इस बात को लेकर नहीं थी कि लोग नदी में क्या तलाश रहे हैं. पूरा इलाका वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और वहां वन्यजीवों के साथ जहरीले जीव-जंतुओं का भी खतरा रहता है.
बारिश के मौसम में नदी और आसपास की जमीन की स्थिति भी बदल जाती है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों का वहां जमा होना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है. वन विभाग ने लोगों को समझाया और नदी किनारे जमा भीड़ को वहां से हटाया.

DFO के निर्देश पर बढ़ाई गई निगरानी
उत्तर वन मंडल के DFO धीरेंद्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में विश्रामगंज रेंजर राहुल सिंह सिकरवार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. टीम ने लोगों को समझाइश दी और पूरे इलाके को खाली कराया. वन विभाग के मुताबिक, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए इलाके में निगरानी भी बढ़ा दी गई है. DFO धीरेंद्र प्रताप सिंह ने भी बताया कि टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को हटाया और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई है.
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पन्ना का नाम आते ही सबसे पहले हीरे का ख्याल आता है. यहां हीरे की तलाश और खनन का पुराना इतिहास है. यही वजह है कि बारिश के बाद नदी की चाल में हीरा मिलने की उम्मीद लोगों को यहां तक खींच लाती है. लेकिन नदी किनारे चमकती किसी चीज की तलाश जितनी रोमांचक लगती है, उतना ही बड़ा जोखिम भी हो सकता है. खासकर तब, जब जगह वन क्षेत्र में हो और आसपास जंगली जानवरों तथा जहरीले जीवों की मौजूदगी हो.
रूंझ नदी किनारे इस बार भी सैकड़ों लोग अपनी किस्मत आजमाने पहुंचे थे. किसी के हाथ कुछ लगा या नहीं, यह अलग बात है. फिलहाल वन विभाग ने भीड़ को वहां से हटा दिया है और इलाके पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि पन्ना में हीरे की चमक लोगों को बार-बार खींच जरूर लाती है, लेकिन जंगल और नदी के बीच किस्मत तलाशने से पहले सुरक्षा और नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है.