मुंबई के 26/11 आतंकवादी हमले पर आज तक कई फिल्मों बन चुकी हैं. अब एक और फिल्म सामने आई है, लेकिन इस बार कहानी सरकारी वकील उज्जवल निकम के नजरिए से है. इस हमले में पकड़ा गया आतंकी अजमल कसाब किस तरह कोर्ट ट्रायल से होकर गुजरता है, और कैसे उज्जवल निकम उसे फांसी की सजा दिलवाते हैं यही हम इस फिल्म के जरिए देखते हैं. कसाब के आखिरी पलों को भी विस्तार से दिखाया गया है.
प्रहार में कैसी दिखाई कसाब की जिंदगी?
फिल्म प्रहार में अजमल कसाब को पकड़ने से लेकर उसके मरने तक की पूरी जर्नी दिखाई गई है. हम देखते हैं कि कैसे पहले तो कसाब कोर्ट में अपना गुनाह कुबूल नहीं करता है. वो अपनी उम्र छोटी बताता है, भ्रम फैलाता है कि वो मुंबई बॉलीवुड में काम करने आया. अमिताभ बच्चन का बंगला देखने आया था, जहां से उसे पुलिस ने पकड़ लिया.
लेकिन फिर सरकारी वकील उज्जवल निकम धीरे-धीरे करके उसकी सच्चाई सबके सामने लाते हैं. वो उन लोगों को कोर्ट में पेश करते हैं, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर कसाब का आतंक अपनी आंखों से देखा था. इसमें एक छोटी बच्ची कसाब के झूठ का पर्दाफाश करती है. यहीं से कसाब फंसने लग जाता है, और एक दिन अचानक अपने गुनाह कुबूल कर लेता है. मगर उज्जवल निकम उसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ते.
फिल्म में राजकुमार राव, जिन्होंने उज्जवल निकम का रोल प्ले किया है, उनका एक डायलॉग है कि वो जबतक कसाब को अंदर से उसकी गलती का एहसास नहीं दिलाएंगे, तबतक उसे फांसी पर चढ़ने नहीं देंगे. प्रहार में हम कसाब को उसके गुनाहों का पछतावा होते भी देखते हैं, जिसकी शुरुआत भारत के खिलाफ उसकी एक गलतफहमी दूर होने से होती है.
कसाब को हुआ था पछतावा
फिल्म में कसाब बताता है कि पाकिस्तान में उन जैसे कई गरीब लड़कों को भारत की गलत छवि दिखाई जाती है. वो हिंदू-मुसलमान के बीच नफरत भरते हैं. कसाब को उसके सभी मरे हुए साथियों की लाश दिखाई जाती है, जिन्हें ये कहकर मुंबई भेजा गया कि मरने के बाद उनके चेहरे पर नूर आएगा और शरीर से गुलाब की सुगंध आएगी. अपनी आंखों के सामने सच्चाई देखकर कसाब उल्टियां करने लगा. उसके मन से एक बहुत बड़ी गलतफहमी दूर हुई, और फिर उसने पूरे दिल से अपना गुनाह कुबूल किया. अंत में उज्जवल निकम ने उसके लिए कोर्ट से फांसी की सजा की मांग की.
क्या थी कसाब की आखिरी इच्छा?
मरने से पहले कसाब का मानसिक संतुलन भी खराब हो चुका था. वो जो भी खाना खाता, उसे उसमें कीड़े-मकौड़े नजर आते. वो पुलिस पर आरोप लगाता कि उसे जान से मारने की कोशिश की जा रही है. हालांकि ये सब उसके दिमाग का भ्रम था.
इंटरनेट पर कहा जाता है कि कसाब ने अपनी आखिरी इच्छा में कुछ नहीं मांगा, बस पुलिस से इतना कहा कि उसकी मौत की जानकारी उसकी अम्मी (मां) को दे दी जाए. लेकिन फिल्म में दिखाया गया है कि वो मरने से पहले अपनी आखिरी इच्छा में टमाटर खाता है. फिलहाल फिल्म में जो दिखाया गया है उसमें कितनी सच्चाई है, ये कह पाना मुश्किल है.
बात करें फिल्म प्रहार की, तो इसमें वामिका गब्बी, सिकंदर खेर, आशीष विद्यार्थी, जयदीप अहलावत जैसे एक्टर्स हैं. फिल्म में कसाब का किरदार मराठी एक्टर ललित प्रभाकर ने प्ले किया है.