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सपा के राजभर को इमरान मसूद क्यों ओवैसी और हुमायूं कबीर लगने लगे हैं?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सियासी तलवार खिंच चुकी है. कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद इन दिनों सपा को मुस्लिम विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं. ऐसे में इमरान मसूद सपा को असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर की तरह नजर आने लगे हैं.

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इमरान मसूद, असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर (Photo-ITG)
इमरान मसूद, असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा और कांग्रेस की जोड़ी 2024 के चुनाव में हिट रही, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले सियासी तलवार खिंच गई है. कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने इन दिनों सपा और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. इमरान की लगातार बयानबाजी को देखते हुए सपा ने फ्रंटफुट पर उतरकर सियासी हमले शुरू कर दिए हैं.

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रामशंकर राजभर को कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद के भीतर असदुद्दीन ओवैसी और पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर की छवि दिखाई देने लगी है. राजभर ने इमरान मसूद की तुलना असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर से करते हुए कहा कि वे उन्हीं के रास्ते पर चल रहे हैं. 

कांग्रेस और सपा की चल रहे शह-मात के खेल के पीछे यूपी की सियासत में खुद को बड़े भाई के रोल अदा करने की है. इमरान मसूद 2024 में सांसद बनने के बाद से ही सपा को निशाने पर ले रहे हैं और अखिलेश यादव की मुस्लिम सियासत पर सवाल खड़े कर रहे. अब सपा ने इमरान  मसूद को बीजेपी के इशारे पर बयानबाजी करने का आरोप लगाकर सियासी कठघरे में खड़े करने की कवायद की है. 

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सपा को लेकर इमरान मसूद हमलावर
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार समाजवादी पार्टी को टारगेट कर रहे हैं. इमरान मसूद ने अपने नए बयान में कहा कि सपा इस मुगालते में न रहे कि उसने 2024 में बीजेपी को हराया है. अगर कांग्रेस से गठबंधन न होता और मुसलमानों का वोट एकमुश्त न मिला होता तो सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में 2022 की जगह ही खड़ी होती. 

इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी किसी मुस्लिम नेता को बर्दाश्त नहीं कर सकती, या ऐसे नेता को जो अपनी बात रखता हो, और ऐसा नेता अब कांग्रेस में है. मुख्तार, अतीक अहमद, आजम खान...दोष उनका नहीं है. मैं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की वजह से अपनी सीट जीता हूं. मैंने चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के लिए एक भी रैली नहीं की, तब भी नहीं जब हम गठबंधन में थे. 

सपा का इमरान मसूद पर पलटवार
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सपा की मुस्लिम राजनीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वो यह बताने में जुटे हैं कि कांग्रेस से गठबंधन होने के चलते ही सपा 37 सीटें 2024 में जीतने में सफल रही थी. इमरान मसूद के लगातार बयानबाजी को देखते हुए सपा भी हमलावर हो गई है. सपा के सांसद रामाशंकर राजभर ने इमरान मसूद पर सीधा और तीखा प्रहार किया है. 

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रामशंकर राजभर ने इमरान मसूद पर हमला बोलते हुए कहा कि  इमरान मसूद 2009 से लगातार चुनाव हार रहे थे. 2024 में वो समाजवादी पार्टी के समर्थन की बदौलत ही चुनाव जीत पाए हैं. और आज वही शख्स कह रहा है कि हम सपा के बिना जीत सकते हैं. सपा के सहारनपुर के पूर्व सांसद और सपा नेता हाजी फजलुर्रहमान ने भी इमरान मसूद पर निशाना साधते हुए बीजेपी के इशारों पर बयानबाजी करने और गठबंधन में दरार पैदा करने वाला बताया. 

ओवैसी-हुमायूं कबीर की राह पर मसूद-सपा
सपा सांसद रामशंकर राजभर ने इमरान मसूद की तुलना असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर से करते हुए कहा कि वे उन्हीं के रास्ते पर चल रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को नसीहत देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस को गठबंधन धर्म निभाना है,तो बिना विलंब किए ऐसे नेताओं को तुरंत नोटिस जारी करना चाहिए. 

सपा सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी यूपी में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति चाहती है और इमरान मसूद अपने बयानों से भाजपा के एजेंडे को ही फायदा पहुंचा रहे हैं  राजभर ने याद दिलाया कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों की खातिर 'मुल्ला मुलायम' का तमगा तक सहा था. उन्होंने साफ किया कि यूपी में सपा ही 'बड़े भाई' की भूमिका में रहेगी और मसूद एक सांसद होकर 'छुट्टभैया' वाले बयान दे रहे हैं.

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मसूद को क्यों ओवैसी-हुमायूं कबीर बता रही
सपा आलाकमान और पार्टी के भीतर मौजूद गैर-मुस्लिम नेताओं को इमरान मसूद का यह बयान नागवार गुजरा. रामशंकर राजभर जैसे जमीन से जुड़े पिछड़े नेता, जो लगातार दलितों और पिछड़ों को सपा से जोड़ने की वकालत कर रहे हैं, उन्हें लगा कि इमरान मसूद का यह बयान पार्टी की 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वाली छवि को भारी नुकसान पहुंचा रहा है.

रामशंकर राजभर ने कहा कि इमरान मसूद अब कांग्रेस के सांसद कम असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर ज्यादा नजर आ रहे. ओवैसी और हुमायूं की तरह इमरान मसूद भी लगातार केवल एक वर्ग विशेष की बात कर रहे हैं. राजभर का मानना है कि जैसे ओवैसी के बयानों से बीजेपी को ध्रुवीकरण करने का मौका मिलता है, वैसे ही इमरान मसूद के बयान भी सपा के पीडीए को बिखरा सकता है. 

सपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जो बड़ी जीत हासिल की,वह केवल मुस्लिम वोटों से नहीं बल्कि गैर-यादव पिछड़ों और दलितों के गठबंधन से आई थी. इमरान मसूद के बयान से ऐसा संदेश जा रहा है जैसे पिछड़ों और दलितों के योगदान का कोई मूल्य ही नहीं था. इसीलिए इमरान को ओवैसी और हुमायूं की श्रेणी में खड़ा करके उन्हें बीजेपी की बी-टीम वाले नैरेटिव में खड़े करने का प्लान है. 

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामशंकर राजभर का इमरान मसूद पर यह हमला असल में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौन सहमति से हुआ है, ताकि कांग्रेस संदेश दिया जा सके कि किसी भी नेता को 'पीडीए' के दायरे से बाहर जाकर सांप्रदायिक या एकतरफा बयानबाजी करने की छूट नहीं मिलेगी.

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