उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की 'हैट्रिक' लगाने के लिए बीजेपी ने अपनी सांगठनिक व्यूहरचना पूरी तरह कस ली है. मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से घोषित नई टीम में विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश में मुख्य प्रभारी बनाए रखने के साथ ही चार नए सह-प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की गई है.
विनोद तावड़े के इन चार 'सिपहसालारों' में जगदीश ईश्वर पटेल के अलावा डॉ. मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा की सह-प्रभारी के तौर पर नियुक्ति केवल चुनावी प्रबंधन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे सोशल इंजीनियरिंग, क्षेत्रीय संतुलन और माइक्रो-मैनेजमेंट का भी बड़ा रणनीतिक दांव माना जा रहा है.
विनोद तावड़े के चार सिपहसालार?
उत्तर प्रदेश के चुनावी कमान की पूरी जिम्मेदारी प्रभारी के रूप में राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के कंधों पर है. नितिन नवीन ने अपनी टीम के गठन के साथ ही सबसे पहले विनोद तावड़े की नियुक्ति यूपी के प्रभारी के रूप में की थी और उनके साथ जगदीश ईश्वर पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया था. बीजेपी नेतृत्व ने बुधवार को यूपी में तीन अन्य नेताओं को सह-प्रभारी नियुक्त किया है.
बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव जगदीश ईश्वर पटेल गुजरात से आते हैं और पूर्व विधायक हैं. वे गुजरात मॉडल के जमीनी सांगठनिक कैडर और बूथ प्रबंधन में महारत रखते हैं. वे कुर्मी जाति से आते हैं, जिन्हें गुजरात में पाटीदार के नाम से जाना जाता है. बीजेपी ने जिन तीन नेताओं की नियुक्ति बुधवार को की है, उनमें डॉ. मेधा कुलकर्णी महाराष्ट्र से आती हैं. वे महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद और पूर्व विधायक हैं. वे महिलाओं और प्रबुद्ध वर्ग के बीच सांगठनिक पकड़ के लिए जानी जाती हैं और ब्राह्मण समाज से आती हैं.
बीजेपी ने अनंत ओझा को सह-प्रभारी नियुक्त किया है, जो झारखंड से हैं और ब्राह्मण समाज से आते हैं. वे दो बार के विधायक और झारखंड बीजेपी के पूर्व महामंत्री हैं. वे युवा और बूथ-स्तरीय नेटवर्क को मजबूत करने में विशेषज्ञता रखते हैं. इसके अलावा बीजेपी ने प्रदीप वर्मा को सह-प्रभारी बनाया है, जो झारखंड से राज्यसभा सांसद और प्रदेश संगठन के पूर्व महामंत्री हैं. वे सांगठनिक अनुशासन और जमीनी मोर्चेबंदी के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं और सोनार जाति से आते हैं.
बीजेपी सोशल इंजीनियरिंग गढ़ने में जुटी
2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने बीजेपी के वोटबैंक में जो सेंध लगाई थी, उसका नतीजा था कि बीजेपी यूपी में 80 में से 33 सीटों पर सिमट गई थी और सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीती थीं. यूपी में बिगड़े कास्ट समीकरण को दुरुस्त करना तावड़े की टीम की पहली प्राथमिकता होगी. बीजेपी की कोशिश खासकर ओबीसी के छिटके हुए वोटों को दोबारा जोड़ने की है.
बीजेपी ने यूपी में ओबीसी और सवर्ण संतुलन बनाने के लिए नई टीम का गठन किया है. तावड़े और उनकी टीम में तीन ओबीसी और दो ब्राह्मण समाज के नेता शामिल हैं. ऐसे में साफ है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), प्रबुद्ध वर्ग और सवर्ण समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है. इसके अलावा डॉ. मेधा कुलकर्णी के जरिए आधी आबादी (महिला मतदाताओं) को सीधे तौर पर जोड़ने और कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी पर नजर रखने की रणनीति है.
बीजेपी का यूपी में 'माइक्रो-मैनेजमेंट' प्लान
बीजेपी ने यूपी को फतह करने के लिए नई टीम (प्रभारी और सह-प्रभारी) की नियुक्ति की है. भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर माइक्रो-मैनेजमेंट के लिए चार अलग-अलग राज्यों से अनुभवी नेताओं को सह-प्रभारी बनाया है. उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है, जिसे भाजपा ने 6 संगठनात्मक क्षेत्रों—पश्चिम, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, काशी और गोरखपुर में बांट रखा है.
चार सह-प्रभारियों की तैनाती से यह स्पष्ट है कि विनोद तावड़े केंद्रीय निगरानी में रहेंगे, जबकि ये चार नेता अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालकर सीधे बूथ स्तर, पन्ना प्रमुखों और जिला अध्यक्षों के साथ समन्वय बनाएंगे. बीजेपी सूत्रों के अनुसार, यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों की निगरानी के लिए चारों सह-प्रभारियों को लगभग 100-100 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. ये सह-प्रभारी अलग-अलग ज़ोन (जैसे- पश्चिम, पूर्वांचल, मध्य और बुंदेलखंड) में बंटकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे.
शाह-बंसल वाले दांव से सत्ता की हैट्रिक
2024 के लोकसभा चुनावों में मिले झटकों से सबक लेते हुए भाजपा ने इस बार बूथ स्तर के प्रबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है. नए सह-प्रभारियों का मुख्य काम स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी और आपसी मतभेदों को दूर करना होगा.
यूपी के भीतर के क्षेत्रीय व जातीय मतभेदों और गुटबाजी से दूर रहने के लिए भाजपा ने जानबूझकर गैर-यूपी (गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड) के नेताओं को कमान सौंपी है. यह रणनीति पहले भी सुनील बंसल और अमित शाह के दौर में काफी सफल रही है. विनोद तावड़े के नेतृत्व में यह चार सदस्यीय नई टीम सीधे केंद्रीय नेतृत्व और सीएम योगी के समन्वय के साथ चुनावी रोडमैप तैयार करेगी.
2024 के आम चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन के बीच जो खींचतान और बयानबाजी देखी गई थी, उस पर विराम लगाना इस टीम की सबसे बड़ी चुनौती है. विनोद तावड़े को चुनावी रणनीति का सुलझा हुआ शिल्पकार माना जाता है, और उनके सह-प्रभारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार और प्रदेश संगठन (पंकज चौधरी की टीम) के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेंगे.
2027 में यूपी की गद्दी पर लगातार तीसरी बार काबिज होना भाजपा के लिए केवल एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि 2029 की राष्ट्रीय राजनीति का आधार तय करेगा. विनोद तावड़े के साथ उतरे ये 4 'सिपहसालार' भाजपा के गुजरात और महाराष्ट्र के कैडर अनुभव तथा झारखंड-बिहार की जमीनी राजनीति के मेल से सपा-कांग्रेस गठबंधन की काट निकालने की पुरजोर कोशिश करेंगे. माना जा रहा है कि यह पूरी टीम यूपी में भाजपा के 'मिशन-2027' के लिए एक बेहद उपयोगी और धारदार हथियार साबित हो सकती है.