बसपा सुप्रीमो मायावती आकाश आनंद को लेकर भले ही अब सॉफ्ट नजर आ रही हों, लेकिन अशोक सिद्धार्थ के बहाने आकाश आनंद अभी भी उनके निशाने पर हैं. दरअसल, मायावती को लगता है कि अगर आकाश आनंद पार्टी में बेहद मजबूत हो गए तो अशोक सिद्धार्थ के जरिए पार्टी पर कब्जे की कोशिश हो सकती है. बताया जा रहा है कि मायावती के बेहद करीबी दूसरे नेताओं ने उनके मन में यह बात काफी मजबूती से बैठा दी है. समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता ने मायावती के इस कंफ्यूजन को 2017 से पहले समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच हुए विवाद से जोड़कर समझाया.
नाम न छापने की शर्त पर उस नेता ने कहा कि जिस तरह उस वक्त मुलायम सिंह यादव के करीबियों ने उनके मन में अखिलेश यादव को लेकर कंफ्यूजन पैदा किया था, उसी तरह का कुछ कंफ्यूजन आकाश आनंद को लेकर मायावती के बेहद करीबी कोऑर्डिनेटरों ने पैदा किया है. यही बात अब मायावती के मन में घर कर गई है और आकाश आनंद या अशोक सिद्धार्थ के लाख समझाने के बावजूद उनके जेहन से यह आशंका निकल नहीं पा रही कि उनके बाद आकाश के बहाने अशोक सिद्धार्थ पार्टी पर कब्जा कर लेंगे.
मायावती के लगातार बदलते फैसले से पार्टी में कन्फ्यूजन की स्थिति
बसपा के भीतर आखिर चल क्या रहा है. मायावती क्यों लगातार अपने ही फैसले बदल रही हैं? आकाश से नाराजगी तो दूसरे भतीजे ईशान को क्यों निकाला? भाई आनंद कुमार को लेकर क्यों कहा अविवाहित हूं इसलिए भाई को मदद के लिए रखा है? भतीजी दीपिका को क्यों आगे लाने की कोशिश? तमाम ऐसे सवाल जिसने मायावती और बीएसपी को लेकर कन्फ्यूजन काफी बढ़ा दिए हैं कि आखिर बीएसपी के भीतर चल क्या रहा है और मायावती चाहती क्या हैं!
अशोक सिद्धार्थ को इतनी तवज्जो क्यों? बार-बार सारा गुस्सा अशोक सिद्धार्थ पर क्यों निकल रहा? क्या सचमुच अशोक सिद्धार्थ इतने ताकतवर हो गए हैं कि मायावती उनसे खतरा महसूस कर रही हैं या फिर मायावती को अब पार्टी के भीतर, उनके ही फसलों से लगातार बढ़ती नाराजगी नहीं दिख रही.
रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने क्या कहा?
रविवार को मायावती ने लखनऊ में एक प्रेस ब्रीफिंग की. 10:30 मिनट के एक्सप्रेस ब्रीफिंग में 4 मिनट मायावती ने ब्रिक्स सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए मोदी सरकार की तारीफ की तो बाकी 6 मिनट में उन्होंने पार्टी के भीतर मचे उथल-पुथल को लेकर चीजें स्पष्ट करने की कोशिश की. लेकिन वह सार्वजनिक तौर से पार्टी के भीतर की स्थिति जितनी स्पष्ट करती जा रही हैं, पार्टी के भीतर का मामला उतना ही उलझता जा रहा है.
कभी अपने बड़े भतीजे आकाश को लेकर बेहद गुस्से में नजर आती हैं तो कभी सॉफ्ट, कल मायावती ने खुद से यह बताने की कोशिश की कि वह बीमार नहीं हैं, पार्टी के बाहर बीमारी को लेकर कोई चर्चा नहीं. लेकिन कल मायावती ने खुद ही अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उनकी बीमारी को लेकर अफवाह फैलाया जा रहा है और इसमें अशोक सिद्धार्थ का हाथ है. जबकि बीएसपी के बाहर मायावती बीमार हैं. ऐसी कोई चर्चा कहीं नहीं है लेकिन मायावती ने जब खुद ही प्रेस ब्रीफिंग में इसकी चर्चा कर दी तो अब सचमुच यह चर्चा निकल पड़ी है की क्या मायावती सचमुच बीमार हैं?
मायावती ने अपने प्रेस ब्रीफिंग में यह भी बताया कि आकाश आनंद ने उनके घर फोन कर या पूछा था कि मायावती की तबीयत तो ठीक है! कहीं वो बीमार तो नहीं और जिस शख़्स से उन्होंने मायावती के बीमार होने के बारे में पूछा उससे यह भी कह दिया कि बहन को यह मत बताना. इसके बाद मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीमारी की अफवाह फैलाने का पूरा ठिकरा अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद पर फोड़ दिया.
आकाश को लेकर अभी सॉफ्ट हैं मायावती
बावजूद इसके मायावती का आकाश के लिए वह सॉफ्ट कॉर्नर भी दिखाई दिया. जब उन्होंने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में कहा की आकाश का यह पूछना उनकी अच्छी नियत का भी संकेत हो सकता है. मायावती ने पार्टी के भीतर से परिवारवाद ख़त्म करने की बात कही. बाबा साहब और मान्यवर कांशीराम की बातें याद दिलाकर कहा कि अगर कोई उनके परिवार का पार्टी को संभालने लायक नहीं मिला तो कोई दलित ही बसपा का नेतृत्व सभालेगा लेकिन कहा जा रहा है यह बातें सिर्फ पार्टी कैडर को बताने के लिए कहीं जा रही हैं.
मायावती कहीं ना कहीं आकाश आनंद को ही अपना उत्तराधिकारी मानती हैं. उन्हें दोबारा लाएंगी या नहीं यह अभी कहना मुश्किल है, लेकिन आकाश का मोह उन्हें छोड़ भी नहीं रहा. यह बात पार्टी का कैडर भी जानता है. पार्टी के नेता भी जानते हैं लेकिन 2027 चुनाव में मायावती का यह कंफ्यूजन और लगातार उनके बदलते फैसले पार्टी की मिट्टी पलीद कर सकते हैं.