चुनाव आयोग ने गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अफसरों के तबादले का सख्त आदेश दिया है. जो अधिकारी पिछले चार साल में तीन साल या इससे ज्यादा समय से एक ही जिले में तैनात हैं, उन्हें हटाकर दूसरी जगह भेजा जाएगा. अपने गृह जिले में काम कर रहे अधिकारियों पर भी यही नियम लागू होगा. आयोग ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश भेजे हैं और 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है.
यह आदेश चुनाव की तैयारी का हिस्सा है. आयोग चाहता है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों. इसके लिए गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश जारी किए गए हैं. यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि नियमित प्रक्रिया है. इससे पहले आयोग ने असम, केरलम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए भी ऐसे ही निर्देश दिए थे.
यह नीति उन अधिकारियों पर लागू होगी जो चुनाव के काम से सीधे जुड़े होते हैं. इनमें जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारी शामिल हैं. परिवहन, मद्यनिषेध और उत्पाद विभाग के अधिकारियों को भी बदला जाएगा.
यह भी पढ़ें: UP चुनाव से पहले BJP को झटका! पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी संग सपा में शामिल
दरअसल, दो तरह के अधिकारी हटाए जाएंगे. पहले वे, जो पिछले चार साल के दौरान तीन साल या उससे ज्यादा समय से एक ही जिले में तैनात हैं. दूसरे वे, जो अपने गृह जिले में काम कर रहे हैं.
आयोग का मकसद यह पक्का करना है कि कोई भी अधिकारी लंबे समय से एक ही जगह पर रहने की वजह से चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित न कर सके. आयोग चाहता है कि चुनाव पूरी तरह भयमुक्त और पारदर्शी माहौल में हों.
निर्वाचन आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को इन निर्देशों का पालन करने को कहा है. साथ ही सरकारों को 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी.