उत्तराखंड में विधानसभा के सभी 70 सदस्यों के चुनाव के लिए फरवरी 2027 में चुनाव होने की संभावना है. वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं. कई राजनितिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है. लगातार दो बार सत्ता में रहने के बाद भाजपा अब तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. जिसके मद्देनजर संगठन ने सभी सीटों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है (Uttarakhand Assembly Elections 2027).
14 फरवरी 2022 को हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 10 सीटें हारने के बावजूद 47 सीटों के साथ लगातार दूसरी बार सरकार बनाई. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 19 सीटें जीतकर आधिकारिक विपक्ष की भूमिका निभाई. उत्तराखंड के गठन के बाद यह पहली बार था जब मौजूदा सरकार दोबारा निर्वाचित हुई.
वहीं 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 57 सीट जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई जबकि विपक्षी दल कांग्रेस को 11 सीटें मिली थी. त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन चार साल के बाद उन्हें हटाकर बीजेपी ने तीरथ सिंह रावत को सत्ता की कमान सौंपी और महज कुछ ही महीने में रावत की जगह पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया.
सत्ताधारी भाजपा जहां अपने विकास कार्यों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, पेपर लीक और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मुद्दों को चुनावी हथियार बनाने में जुटी है.
उत्तर प्रदेश के चुनाव में एक बार फिर धर्म और जाति का कार्ड सबसे बड़ा बन जाने की संभावनाएं बन गई हैं. PDA की बात करते आ रहे अखिलेश यादव ने अब ब्राह्मण सम्मेलन करने का फैसला किया है. कल इस सिलसिले में SP के ब्राह्मण नेताओं की बैठक हुई. 5 अगस्त को बड़ा सम्मेलन होगा. सवाल है कि क्या ये सब योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व की काट के लिए किया जा रहा ?
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के सांसदों की बगावत की अटकलें तेज हैं तो यूपी में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी में फूट को लेकर भी सियासत तेज है. पहले यूपी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में बगावत को लेकर बयान दिया. उसके बाद बीजेपी ने इस मामले को तूल दे दिया. एक दिन पहले ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया.
अखिलेश यादव 2024 के आम चुनाव में PDA के सफल प्रयोग के बावजूद ब्राह्मण समुदाय का वोट पाने की कोशिश में लग गए हैं. 2007 में मायावती की सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग की आज भी मिसाल दी जाती है, लेकिन बाद में बीएसपी भी वैसी सफलता नहीं दोहरा पाई - अखिलेश यादव कुछ अलग करेंगे क्या?
आज के हल्ला बोल की शुरुआत हम उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल की संभावनाओं पर कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बयान दिया है कि समाजवादी पार्टी के 25-26 सांसद टूटने को तैयार बैठे हैं. हम लोग उन्हें तोड़ नहीं रहे हैं. केशव प्रसाद मौर्य ने ये भी कहा कि 2027 में अपने आप समाजवादी पार्टी की टूट हो जाएगी.
उत्तर प्रदेश की चुनावी सियासत से जुड़ी एक बड़ी खबर इस वक्त आ रही है. यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट का दावा किया है. NDA के मंत्री राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा है कि महाराष्ट्र बंगाल की बात छोड़िये यूपी में पूरी समाजवादी पार्टी बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार बैठी है. ओपी राजभर ने एक साल पहले मार्च के एक वीडियो का हवाला भी दिया है कि रामगोपाल यादव ने एक पर्ची केंद्रीय गृह मंत्री को दे दी है.
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. सपा और कांग्रेस का गठबंधन होने के बाद भी कांग्रेस दलित नेता चंद्रशेखर आजाद और असदुद्दीन ओवैसी के साथ हाथ मिलाने का सियासी तानाबाना बुन रही है. इसे कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स का दांव भी माना जा रहा?
यूपी की गठबंधन पॉलिटिक्स में अब गर्मी आती दिख रही है. आज इसे लेकर तीन अहम बयान आए. समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि बीजेपी को हराने वालों का उनकी पार्टी समर्थन करेगी. तो कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद का बयान आया कि बीेजेपी को हराने की क्षमता सिर्फ राहुल गांधी में है. उधर ओवैसी ने बहराइच से रैली की शुरुआत कर दी है. ओवैसी पर समाजवादी पार्टी की नजर है.
धामी सरकार के मंत्रियों ने राज्य के विकास और भविष्य के रोडमैप पर अपनी बात रखी. इस चर्चा के दौरान स्वास्थ्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया कि पिछले चार वर्षों में जनता के बढ़ते आत्मविश्वास ने यह सिद्ध कर दिया है कि सरकार सही दिशा में कार्य कर रही है.
उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर 'दलबदल' की बयार तेज हो गई है. नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के दौरान भाजपा और निर्दलीय खेमे के कई दिग्गज चेहरों ने कांग्रेस का 'हाथ' थाम लिया.
उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां बीजेपी और निर्दलीय पृष्ठभूमि के 5-6 नेता कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी में हैं. इनमें राजकुमार ठुकराल और गौरव गोयल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं. यह कदम 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ताकत बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
इस फेरबदल की सबसे बड़ी खासियत 'सोशल इंजीनियरिंग' रही है. भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ठाकुर, ब्राह्मण, दलित और पंजाबी समाज के बीच एक सटीक संतुलन बनाने की कोशिश की है.
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. पिछले काफी समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें भी लग रही है. ऐसे में यह विस्तार अहम माना जा रहा है. तमाम समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है.
यूपी में प्रतीकों की राजनीति पर प्रहार है. फिर परंपरा और तुष्टिकरण के बीच टकराव है...और फिर सत्ता की सीढ़ियों पर संघर्ष है. यूपी की सियासत में टोटी अब नल का पुर्जा नहीं...नैरेटिव का नश्तर बन चुकी है. और राम मंदिर...सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं...सियासी शक्ति का शिखर बन चुका है. कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप जैसे मुद्दे भी सिर चढ़कर बोल रहे हैं. इन्हीं मुद्दों पर सीएम योगी और अखिलेश यादव में क्लेश बढ़ गया है. 2027 के लिए 2017 के मुद्दे तराशे जा रहे हैं. देखें दंगल.
आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी गुरुवार को मुरादाबाद से मिशन-2027 के लिए हुंकार भरेंगे. मुरादाबाद सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां से रैली करके जयंत चौधरी आरएलडी के लिए सियासी जमीन तैयार करने का काम करेंगे. अब देखना है कि बीजेपी के लिए बंजर जमीन को कितना सींच पाएंगे?
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं, जहां उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर जोर दिया. उन्होंने बूथ स्तर तक संगठनात्मक सक्रियता, जनसंपर्क और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने को कहा.
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2027 का शंखनाद कर दिया है, आज योगी सरकार का दूसरा कैबिनेट विस्तार हुआ. इस विस्तार में दो मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया और 6 नए चेहरों को मंत्री बनाया गया. आज यूपी में सिर्फ मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ बल्कि 2027 की सबसे बड़ी राजनीतिक बिसात पर नई चाल चली गई है.
राजनीतिक अनिश्चितता के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है. पीएम मोदी और सीएम धामी की मुलाकात से आगामी चुनावों से पहले रणनीतिक तालमेल और समर्थन स्पष्ट दिख रहा है.
शुक्रवार को मुख्यमंत्री धामी ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए पांच नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी. खजान दास, भरत चौधरी, राम सिंह कैड़ा, मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा ने पद और गोपनीयता की शपथ ली.