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पाकिस्तान के इस शहर में पहली बार मनाई गई वाल्मीकि जयंती, हिंदू समुदाय ने की खास पूजा

खैबर पख्तूनख्वा के स्वात जिला प्रशासन ने सोमवार को पहली बार वाल्मीकि जयंती समारोह आयोजित किया, जिसमें अधिकारी और हिंदू समुदाय के सदस्य शामिल हुए. कार्यक्रम में धार्मिक आजादी, अल्पसंख्यक अधिकारों और आपसी सम्मान पर जोर देते हुए पाकिस्तान की तरक्की, खुशहाली और सुरक्षा के लिए खास पूजा की गई.

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वाल्मीकि जयंती.
वाल्मीकि जयंती.

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने पहली बार उत्तर-पश्चिमी स्वात जिले में वाल्मीकि जयंती मनाई. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिला प्रशासन ने सोमवार को इस कार्यक्रम का आयोजन किया. इस दौरान हिंदू समुदाय के लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान किए और पाकिस्तान की तरक्की, खुशहाली और सुरक्षा के साथ-साथ अलग-अलग धर्मों के बीच आपसी सद्भाव के लिए प्रार्थना की.

वाल्मीकि जयंती महर्षि वाल्मीकि की जयंती के रूप में मनाई जाती है. उन्हें संस्कृत महाकाव्य रामायण का रचयिता माना जाता है. रामायण हिंदू धर्म के सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक है.

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इस कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त नेमतुल्लाह, सहायक आयुक्त अफनान रजा और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधि डॉ. सनी कुमार खास मेहमान के तौर पर शामिल हुए. एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि वाल्मीकि समुदाय के एक हिंदू पुजारी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को इस त्योहार के धार्मिक महत्व के बारे में बताया. समुदाय के लोगों ने अपनी धार्मिक परंपराओं के मुताबिक पूजा-पाठ और दूसरे अनुष्ठान किए.

धार्मिक आजादी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने धार्मिक आजादी, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा और अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोगों के बीच आपसी सम्मान के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और धार्मिक सद्भाव के लिए सभी समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करना जरूरी है. हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम आयोजित करने और सुरक्षा समेत जरूरी इंतजाम करने के लिए स्वात जिला प्रशासन का आभार जताया.

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सद्भाव बढ़ाने की दिशा में कदम

जिला प्रशासन ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना, धार्मिक आजादी सुनिश्चित करना और अलग-अलग धर्मों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. प्रशासन ने वाल्मीकि जयंती के आयोजन को धार्मिक विविधता को पहचान देने, अल्पसंख्यक समुदायों की परंपराओं को सम्मान देने और स्वात में सहिष्णुता को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम बताया.

इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और हिंदू समुदाय के सदस्यों ने हिस्सा लिया. इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देना था.

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