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कभी आजादी की लड़ाई में दिखाया दम, अब सियासत में अहम देवरिया;जानिए जिले का इतिहास और चुनावी गणित

संत देवरहा बाबा की नगरी देवरिया का इतिहास, धार्मिक विरासत और सियासी पहचान इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश का अहम जिला बनाती है. पांच तहसीलों, 16 विकासखंडों और सात विधानसभा सीटों वाले इस जिले की भौगोलिक स्थिति से लेकर देवरिया लोकसभा सीट तक, जानिए जिले की पूरी प्रोफाइल.

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देवरिया जिले में सात विधानसभा सीटें आती हैं (Photo: AI Generated)
देवरिया जिले में सात विधानसभा सीटें आती हैं (Photo: AI Generated)

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित देवरिया अपनी ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक स्थलों और राजनीतिक पहचान के लिए जाना जाता है. संत देवरहा बाबा की नगरी के रूप में प्रसिद्ध इस जिले का इतिहास आजादी के आंदोलन से भी जुड़ा रहा है. देवरिया 16 मार्च 1946 को गोरखपुर जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया था. वर्ष 1994 में इसके उत्तर-पूर्वी हिस्से को अलग करके कुशीनगर जिला बनाया गया. 

देवरिया नाम की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. जिला प्रशासन की वेबसाइट के मुताबिक, इसका नाम ‘देवारण्य’ या ‘देवपुरिया’ से जुड़ा माना जाता है. सरकारी गजेटियर के संदर्भ में यह भी बताया गया है कि जिले का नाम इसके मुख्यालय देवरिया से पड़ा. इस क्षेत्र का प्राचीन इतिहास कोशल राज्य से जुड़ा बताया गया है. यहां विभिन्न स्थानों पर मिली प्राचीन मूर्तियां, सिक्के, मंदिरों के अवशेष और अन्य पुरातात्विक सामग्री पुराने सामाजिक जीवन की ओर संकेत करती हैं. 

देवरिया जिला रामचंद्र विद्यार्थी के नाम और जल जौहर से भी पहचान रखता है. आजादी की लड़ाई में कक्षा 5 के छात्र रामचंद्र विद्यार्थी मात्र 14 साल की उम्र में ही पुरानी कचहरी पर तिरंगा फहराते हुए अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए थे. जिले के पैना गांव की सैकड़ों महिलाओं ने अंग्रेजों से अपने सतीत्व की रक्षा के लिए सरयू नदी में जल समाधि ले ली थी जिसे इतिहास के पन्नो में जल-जौहर भी कहा जाता है

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धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक पहचान

देवरिया की सीमाएं उत्तर में कुशीनगर, पूर्व में बिहार के गोपालगंज और सिवान, दक्षिण में मऊ और बलिया तथा पश्चिम में गोरखपुर जिले से लगती हैं. जिला मुख्यालय देवरिया, गोरखपुर से सड़क मार्ग के जरिए लगभग 53 किलोमीटर पूर्व में स्थित है. घाघरा (सरयू), राप्ती और छोटी गंडक जिले की प्रमुख नदियां हैं. यहां हिंदी और भोजपुरी मुख्य रूप से बोली जाती हैं.  देवरिया की पहचान यहां के धार्मिक स्थलों और संत परंपरा से भी जुड़ी है. बरहज तहसील के मइल गांव में सरयू नदी के किनारे स्थित देवरहा बाबा आश्रम श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है. इसके अलावा रुद्रपुर का दुग्धेश्वरनाथ मंदिर, देवरिया शहर का हनुमान मंदिर और श्री तिरुपति बालाजी मंदिर जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं. इन स्थलों का उल्लेख जिला प्रशासन की आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट पर किया गया है. 

देवरिया की सियासत के बड़े नाम

देवरिया की राजनीति का इतिहास समाजवादी आंदोलन, कांग्रेस की पुरानी सियासत और भाजपा के उभार से जुड़ा रहा है. जिले से जुड़े प्रमुख राजनीतिक चेहरों में विश्वनाथ राय, मोहन सिंह, श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, कलराज मिश्र और सूर्य प्रताप शाही के नाम उल्लेखनीय हैं. विश्वनाथ राय लंबे समय तक देवरिया लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस नेता थे. समाजवादी नेता मोहन सिंह ने भी देवरिया की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लोकसभा में जिले का प्रतिनिधित्व किया. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी भी यहां से सांसद रहे. भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने 2014 में देवरिया लोकसभा सीट जीती थी. वहीं, सूर्य प्रताप शाही जिले की राजनीति से जुड़े प्रमुख भाजपा नेताओं में गिने जाते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

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जिले का प्रशासनिक ढांचा

जिला प्रशासन के मुताबिक, देवरिया में पांच तहसीलें हैं देवरिया सदर, सलेमपुर, रुद्रपुर, बरहज और भाटपाररानी. जिले में 16 विकासखंड हैं. जिला प्रशासन की वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, इसका क्षेत्रफल 2,540 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 31,00,946 है. जनसंख्या का यह आंकड़ा 2011 की जनगणना पर आधारित है, न कि वर्तमान जनसंख्या का अनुमान.

देवरिया की सात विधानसभा सीटें

देवरिया जिले में सात विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं. रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपाररानी, सलेमपुर, बरहज. खास बात यह है कि इन सातों सीटों का लोकसभा क्षेत्रों से जुड़ाव भी अलग-अलग है. रुद्रपुर और बरहज बांसगांव (सुरक्षित) लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. देवरिया, पथरदेवा और रामपुर कारखाना देवरिया लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि भाटपाररानी और सलेमपुर सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में शामिल हैं. देवरिया लोकसभा सीट जिले की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के शशांक मणि ने इस सीट से जीत दर्ज की. 

देवरिया विधानसभा सीट : यहां से भाजपा की ओर से पत्रकार रहे शलभमणि त्रिपाठी, सपा से अजय प्रताप सिंह उर्फ पिंटू, बसपा के टिकट पर रामसरण, और कांग्रेस से पुरषोत्तम नारायण सिंह मैदान में थे. यहां से शलभमणि त्रिपाठी को जीत मिली.

बरहज:  बीजेपी से दीपक कुमार मिश्र और समाजवादी पार्टी से मुरली मनोहर जयसवाल के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा था. यहां से दीपक कुमार मिश्र को जीत हासिल हुई.

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भाटपार रानी: यहां से बीजेपी के सभाकुवंर कुशवाहा, सपा से आशुतोष कुशवाहा, कांग्रेस से केशव चंद्र यादव और बसपा से अजय कुशवाहा के भाग्य का फैसला होना था. यहां से बीजेपी प्रत्याशी सभाकुवंर ने जीत दर्ज की.

पथदेरवा : यहां से योगी सरकार में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही की साख दांव पर लगी थी. उन्होंने अपनी साख बचाते हुए समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को हरा दिया.

रामपुर कारखाना:  इस विधानसभा सीट पर बीजेपी से सुरेंद्र चौरसिया, समाजवादी पार्टी से फसीहा मंजर गजाला लारी, कांग्रेस से शहला अहरारी और बसपा से पुष्पा शाही के किस्मत का फैसला होना था. फिलहाल, यहां से सुरेंद्र चौरसिया जीत दर्ज की.

रूद्रपुर: माना जा रहा था कि बीजेपी के जय प्रकाश निषाद ने सपा के राम भुआल निषाद को मात दी.

सलेमपुर:  इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी विजयलक्ष्मी गौतम शुरुआत से बढ़त बनाई हुई थी. उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रत्याशी मनबोध प्रसाद को हरा दिया.

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