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योगी बिछाएंगे विकास की बिसात, पीएम मोदी देंगे चुनावी धार, पश्चिमी UP में बीजेपी का M-Y समीकरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अलीगढ़ में विकास परियोजना की सौगात देने के साथ-साथ एक जनसभा को संबोधित करेंगे. रैली के जरिए सिर्फ अलीगढ़ को साधने का ही दांव नहीं बल्कि ब्रज क्षेत्र और पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को दुरुस्त करने की रणनीति मानी जा रही है.

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यूपी में सीएम योगी और पीएम मोदी की जोड़ी (Photo-ITG)
यूपी में सीएम योगी और पीएम मोदी की जोड़ी (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भले औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. पश्चिमी यूपी की सियासत में अलीगढ़ बीजेपी की चुनावी रणनीति का नया केंद्र बनता जा रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ सोमवार को अलीगढ़ से ही मिशन-2027 का बिगुल फूंकने उतर रहे हैं.

सीएम योगी सोमवार और मंगलवार दो दिन के अलीगढ़ के दौर पर रहेंगे. सोमवार को अलीगढ़ में विकास की सौगात देने के साथ-साथ 2027 चुनाव का शंखनाख करेंगे तो मंगलवार को हाथरस में जनसभा करेंगे. 

अलीगढ़ के नुमाइश मैदान की जनसभा के बहाने सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त बनाए रखने का दांव चलेंगे, क्योंकि सीएम योगी के बाद पीएम मोदी का दौरान भी प्रस्तावित है. इस तरह योगी-मोदी की जोड़ी यूपी के रण में पूरे दमखम के साथ उतरने जा रही है. 

सीएम योगी के अलीगढ़ दौरे के मायने
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 18 घंटे तक अलीगढ़ में रहेंगे, जिसके चलते उनके इस दौरे के कई गहरे सियासी मायने हैं. इसे तीन प्रमुख बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है. पहला तो यह कि 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अलीगढ़ जिले की सभी सात सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा हाथरस की तीनों में से दो सीटें बीजेपी और एक सीट आरएलडी जीती थी. 

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सियासत की समझ रखने वाले जानते हैं कि किसी गढ़ को जीतना जितना मुश्किल होता है, लेकिन उस जीत को बरकरार रखना, उससे भी कहीं ज्यादा अहम होता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यथनाथ इस दौरे के जरिए 2027 से पहले ही जमीनी स्तर पर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी सात सीटों पर पार्टी का दबदबा कायम रहे और किसी भी तरह की सत्ता विरोधी लहर को पनपने से पहले ही दबा दिया जाए. 

योगी बिछाएंगे बिसात तो मोदी देंगे धार
अलीगढ़ के सियासी मिजाज को देखते हुए योगी आदित्यनाथ अपने दौरे के जरिए बिछाएंगे विकास का रोडमैप, फिर पीएम मोदी यूपी में चुनावी अभियान को धार देने के लिए उतरेंगे. हालांकि, दोनों नेताओं के कार्यक्रमों का केंद्र बिंदु विकास परियोजनाएं होंगी, लेकिन इनके राजनीतिक मायने कहीं अधिक व्यापक हैं. 

बीजेपी सूबे में विकास, निवेश और कानून व्यवस्था के मुद्दों को लेकर माहौल तैयार करने में जुट गई है. सीएम योगी अलीगढ़ में विश्वविद्यालय निरीक्षण से लेकर विकास कार्यों की समीक्षा,जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक और फिर जनसभा को संबोधित करेंगे. सीएम योगी अलीगढ़ में सड़क, नाले, अस्पताल, गो संरक्षण केंद्र, भवन सहित करीब 500 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे. 

योगी के बाद पीएम मोदी का अलीगढ़ दौरा प्रस्तावित है, जिसमें विकास के सौगात के साथ सियासी एजेंडे को धार देने की रणनीति है. जुलाई-अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ का दौरा कर सकते हैं.इस दौरान नरेंद्र मोदी राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, बारहद्वारी में मल्टीस्टोरी पार्किंग एवं शापिंग कांप्लेक्स व नौरंगीलाल राजकीय इंटर कालेज में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स जैसी बड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे. 

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साल 2021 में पीएम मोदी ने खुद राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी थी. अब उसी परियोजना का लोकार्पण कर भाजपा विकास कार्यों की निरंतरता व समयबद्ध क्रियान्वयन का संदेश देने की तैयारी में है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अलीगढ़ से भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ा संदेश देना चाहती है. 

अलीगढ़ की जमीनी नब्ज समझेंगे योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा. वह बीजेपी के मंडल जनप्रतिनिधियों के साथ लोक निर्माण विभाग की वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को भी मंजूरी देंगे. इस तरह से सीएम योगी के दौरे ने अलीगढ़ के मौजूदा विधायकों और जनप्रतिनिधियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं.

सीएम योगी के अलीगढ़ के इस दौरे से न केवल जनता की नब्ज टटोलेंगे, बल्कि संगठन के कार्यकर्ताओं से सीधा फीडबैक भी लेंगे. यह जानेंगे कि किस विधानसभा क्षेत्र में जनता का झुकाव किस तरफ है. किस जनप्रतिनिधि की कार्यशैली से जनता खुश है और किसकी छवि कमजोर हुई है. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के इस दौरे से मिलने वाला फीडबैक कई मौजूदा विधायकों का भविष्य तय करेगा.  

अलीगढ़ और हाथरस जिले में कुल 10 विधानसभा क्षेत्र हैं. इन दोनों संसदीय सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. इन दोनों जिले के तहत 10 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें से नौ विधायक भाजपा के हैं, जबकि एक सीट सहयोगी दल आरएलडी के पास है. इसके अलावा दो मंत्रियों के साथ प्रदेश सरकार में भी जिले का प्रतिनिधित्व मजबूत है. ऐसे में पार्टी इस क्षेत्र को अपने राजनीतिक गढ़ के रूप में और मजबूत करना चाहती है.

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अलीगढ़ से ब्रज क्षेत्र को साधने का दांव
अलीगढ़ सूबे की सियासत में अब केवल विकास परियोजनाओं का केंद्र नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव अभियान का शुरुआती मंच भी बनने जा रहा हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पश्चिमी यूपी और ब्रज इलाके में चुनावी माहौल बनाने की शुरुआत अलीगढ़ जिले से हो रही है और यहीं से बीजेपी अपने अगले मिशन का संदेश पूरे प्रदेश तक पहुंचाएगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अलीगढ़ में जनसभा संबोधित करेंगे तो मंगलवार को हाथरस और फिरोजाबाद रैली  को विकास की सौगात देने के साथ-साथ सियासी एजेंडा भी सेट करते नजर आएंगे. यह इलाका बीजेपी का मजबूत गढ़ 2017 से बना हुआ है, जिस पर सपा की नजर है. ऐसे में सीएम योगी ने खुद चुनावी कमान संभाल ली है ताकि अखिलेश यादव की कोशिशों पर विराम लगा सकें? 

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