UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमरोहा की अपनी अलग पहचान है. गंगा के किनारे बसे इस जिले ने प्रदेश को कई बड़े राजनीतिक चेहरे दिए हैं. यहां की सियासत में ऐसे नेता भी रहे हैं, जिनका असर विधानसभा से लेकर प्रदेश सरकार तक दिखाई दिया. कभी समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा तो कभी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ताकत दिखाई. चुनावी नतीजे बताते हैं कि अमरोहा की सभी सीटों पर एक ही दल का प्रभाव हमेशा कायम नहीं रहा. क्रिकेट टीम में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी अमरोहा के ही रहने वाले हैं. अभी हाल में ही शमी ने आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी से मुलाकात की थी, उसके बाद ये यह चर्चा शुरू हो गई कि वह भी चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि किसी ओर से भी इस बारे में कुछ नहीं बोला गया.
जिले में अमरोहा, धनौरा, नौगावां सादात और हसनपुर चार विधानसभा सीटें हैं. इन सीटों का चुनावी इतिहास देखें तो हर जगह मुकाबले की कहानी अलग है. कहीं लंबे समय से एक ही नेता का प्रभाव रहा, तो कहीं मतदाताओं ने अपना फैसला बदलकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए. अमरोहा पहले मुरादाबाद जिले का हिस्सा था. बाद में इसे अलग जिला बनाया गया. करीब 2470 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस जिले की सीमाएं मुरादाबाद, संभल, बुलंदशहर, हापुड़ और बिजनौर से मिलती हैं. जिले की आबादी करीब 22 लाख बताई जाती है. अमरोहा जनपद में करीब 60 फीसदी हिंदू आबादी है, जबकि 38 फीसदी के आसपास मुस्लिम आबादी है.
दिल्ली के नजदीक होने के कारण अमरोहा को कारोबार और रोजगार के अवसरों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां छोटे उद्योगों के साथ कृषि भी अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है. गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है और चीनी मिलें किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं. गजरौला के औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी से आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं.
ढोलक उद्योग अमरोहा की पहचान
अमरोहा का नाम आते ही ढोलक उद्योग का जिक्र भी होता है. यह उद्योग जिले की पहचान से जुड़ा है और बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण रहा है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ समय से इस कारोबार में मंदी देखी गई है. स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए ढोलक उद्योग को फिर गति देना अहम सवाल है. अमरोहा की अर्थव्यवस्था केवल बड़े उद्योगों पर निर्भर नहीं है. यहां छोटे कारोबार, खेती और परंपरागत उद्योग भी लोगों की रोजी-रोटी से जुड़े हैं. ऐसे में जिले के विकास की बात करते समय इन क्षेत्रों की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
चार विधानसभा सीटें, चार अलग चुनावी कहानियां
अमरोहा सीट: अमरोहा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता महबूब अली की मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है. वर्ष 2017 के चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की थी. वर्ष 2022 में उन्होंने बीजेपी के राम सिंह को हराकर अपनी स्थिति फिर मजबूत की.
धनौरा सीट: धनौरा विधानसभा सीट पर वर्ष 2017 में बीजेपी के राजीव तरारा ने जीत दर्ज की थी. उन्हें 1,02,943 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के जगराम सिंह को 64,714 और बहुजन समाज पार्टी के संजीव लाल को 51,952 वोट मिले थे. वर्ष 2022 में भी बीजेपी ने इस सीट पर जीत बरकरार रखी. पार्टी के राजीव कुमार ने समाजवादी पार्टी के विवेक कुमार को 11,425 वोटों से हराया.
नौगावां सादात: नौगावां सादात सीट का चुनावी इतिहास भी दिलचस्प रहा है. वर्ष 2017 में बीजेपी ने पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर चेतन चौहान को मैदान में उतारा था. उन्होंने जीत हासिल की और बाद में प्रदेश सरकार में मंत्री बने. उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने उनकी पत्नी संगीता चौहान को उम्मीदवार बनाया. संगीता चौहान ने समाजवादी पार्टी के जावेद आब्दी को हराया था. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर समाजवादी पार्टी के समरपाल सिंह ने जीत दर्ज की. उन्होंने बीजेपी के देवेंद्र नागपाल को 6,540 वोटों से हराया.
हसनपुर सीट: हसनपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2017 में बीजेपी के महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने समाजवादी पार्टी के कमाल अख्तर को करीब 27 हजार वोटों से हराया था. वर्ष 2022 में भी बीजेपी ने यह सीट अपने पास रखी. महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया गुर्जर को 22,382 वोटों से मात दी.
अमरोहा की राजनीति में इन नेताओं का रहा प्रभाव
अमरोहा की राजनीति में कई ऐसे नाम रहे हैं, जिन्होंने जिले के साथ प्रदेश की राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई. चौधरी चंद्रपाल सिंह का नाम पुराने राजनीतिक दौर के प्रमुख नेताओं में लिया जाता है. वह सांसद और कैबिनेट मंत्री रहे. मास्टर हरगोविंद सिंह ने भी स्थानीय राजनीति से शुरुआत कर विधायक और सांसद तक का सफर तय किया. खुर्शीद अंसारी और हाजी हयात कुरैशी भी जिले की राजनीति के चर्चित चेहरे रहे. हाजी हयात कुरैशी चार बार विधायक बने और अपनी राजनीतिक पकड़ के लिए पहचाने जाते थे. पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान ने खेल के मैदान से राजनीति तक अपनी पहचान बनाई. वह अमरोहा से दो बार सांसद और एक बार विधायक रहे. बीजेपी सरकार में खेल मंत्री भी बने. उनके निधन के बाद उनकी पत्नी संगीता चौहान ने राजनीतिक विरासत संभाली. महबूब अली और कमाल अख्तर समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं. वहीं, डॉ. हरिसिंह ढिल्लों ने डॉक्टरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा और बीजेपी ने उन्हें एमएलसी बनाया. राजीव तरारा भी जिले के प्रमुख राजनीतिक परिवार से आते हैं. अमरोहा जिले में एक लोकसभा क्षेत्र भी है. इस सीट पर अलग-अलग समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार जीतते रहे हैं. इस समय बीजेपी के कंवर सिंह तंवर यहां के सांसद हैं.