उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश बढ़ने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सत्ता की हैट्रिक लगाने की जुगत में जुट गई है. बीजेपी ने चुनावी तैयारियों को नए सिरे से धार देना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में पार्टी के दिग्गज नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनाव को लेकर पूरी तरह एक्टिव होने जा रहे हैं.
अमित शाह उत्तर प्रदेश पर विशेष ध्यान देंगे और राज्य के ताबड़तोड़ दौरे करेंगे. यूपी चुनाव में पार्टी का परचम लहराने के लिए अमित शाह खुद मोर्चा संभालने जा रहे हैं. वे बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शिरकत करेंगे और उसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी के अभियान को गति देंगे.
यूपी में 29 अक्टूबर को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक और 30 अक्टूबर को कार्यसमिति की बैठक आयोजित होगी. इस दौरान मिशन-2027 के लिए बीजेपी का नया बूथ मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा. अमित शाह की यूपी चुनाव में सीधी सक्रियता ने सियासी हलचल बढ़ा दी है.
पूर्वांचल से पश्चिम तक होगी शाह की मैराथन बैठकें
बीजेपी की चुनावी रणनीति को धरातल पर उतारने और संगठन को मजबूत करने के लिए अमित शाह उत्तर प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में एक-एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे. अमित शाह की ये समीक्षा बैठकें पश्चिमी यूपी, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, काशी, ब्रज और गोरखपुर क्षेत्र में आयोजित की जाएंगी.
अमित शाह की इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य राज्य स्तर पर चुनाव तैयारियों की बारीकी से समीक्षा करना, पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और बीजेपी की चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना होगा. अमित शाह के रणनीतिक कौशल के सहारे बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का प्लान बनाया है.
बीजेपी कार्यकर्ताओं में शाह भरेंगे नया जोश
रणनीति और संगठन के माहिर माने जाने वाले अमित शाह के इन दौरों से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का प्लान है. शाह इन क्षेत्रीय बैठकों के जरिए सीधे स्थानीय पदाधिकारियों और प्रभारियों से संवाद करेंगे, ताकि जमीनी स्तर के फीडबैक के आधार पर चुनावी चक्रव्यूह तैयार किया जा सके.
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर होने वाला अमित शाह का यह यूपी दौरा राज्य के सियासी समीकरणों को साधने और बीजेपी के विजय अभियान की रूपरेखा तैयार करने में काफी अहम माना जा रहा है. इन बैठकों में चुनाव तैयारियों की समीक्षा करने, पार्टी संगठन को मजबूत करने और बीजेपी की चुनावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा करने पर जोर दिया जाएगा.
यूपी में फिर रखेंगे बीजेपी की जीत की नींव
यूपी की राजनीति में अमित शाह का नाम आते ही 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव का दौर याद आ जाता है. 2013 में जब अमित शाह को यूपी का प्रभारी बनाया गया था, तब बीजेपी सूबे में तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी मानी जाती थी. बीजेपी के पास उस समय न तो बड़ा जनाधार बचा था और न ही कोई कद्दावर राज्यस्तरीय चेहरा. पार्टी के लिए यूपी की सियासी जमीन एक तरह से बंजर बन चुकी थी. ऐसे समय में अमित शाह को यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
अमित शाह ने यूपी में बिखरे संगठन को एकजुट करने के बाद सीधे 60-40 का सोशल फार्मूला लागू किया है. उन्होंने सपा और बसपा के पारंपरिक वोट बैंक (यादव, मुस्लिम, जाटव) के 40 फीसदी के मुकाबले बाकी 60 फीसदी आबादी (उच्च जातियाँ, गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित) को एकजुट करने की रणनीति बनाई.
अमित शाह का यह फॉर्मूला सुपरहिट रहा और 2014 के चुनावी नतीजों में एनडीए ने 80 में से 73 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया. इसके बाद अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. 2017 के विधानसभा चुनाव में अमित शाह की बूथ स्तर की 'पन्ना प्रमुख' रणनीति, सम्मेलनों और माइक्रो-कास्ट मैनेजमेंट ने 312 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ 14 साल बाद बीजेपी की राज्य सत्ता में वापसी कराई.
इस तरह बीजेपी को यूपी में दोबारा मजबूती से स्थापित करने का बड़ा श्रेय अमित शाह को जाता है. अब एक बार फिर बीजेपी की जीत की वही मजबूत आधारशिला अमित शाह रखेंगे, ताकि 2027 में सत्ता की हैट्रिक लग सके.