उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) इस बार सिर्फ लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक एलिजिबिलिटी टेस्ट नहीं है, बल्कि इवैल्यूएशन सिस्टम में भी बड़ा बदलाव लेकर आई है. पहली बार परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन लागू किया जा रहा है. यानी अब सिर्फ आपके रॉ मार्क्स ही सब कुछ तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि आपकी शिफ्ट का पेपर कितना आसान या कठिन था.
बता दें कि UPTET 2026 की परीक्षा आज 2 जुलाई से 3 और 4 जुलाई को कई शिफ्ट्स में होनी है. इस बार उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) परीक्षा करा रहा है और करीब 20 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. यही वजह है कि मल्टी शिफ्ट फॉर्मेट के साथ फेयरनेस बनाए रखने के लिए नॉर्मलाइजेशन को जोड़ा गया है.
क्या है नॉर्मलाइजेशन?
सीधी भाषा में समझें तो अगर एक ही परीक्षा अलग-अलग शिफ्ट में हो रही है, तो हर शिफ्ट का डिफिकल्टी लेवल एक जैसा होना लगभग असंभव है.
मान लीजिए किसी का सुबह की शिफ्ट का पेपर कठिन आया, लेकिन शाम की शिफ्ट का पेपर अपेक्षाकृत आसान रहा. अब अगर दोनों में किसी उम्मीदवार के 95 अंक आए, तो क्या दोनों का प्रदर्शन बराबर माना जाएगा? यहीं नॉर्मलाइजेशन काम करता है.
यह एक स्टेस्टिकल मेथड है, जो अलग-अलग शिफ्ट के परफॉर्मेंस पैटर्न और पेपर डिफिकल्टी को देखकर फाइनल स्कोर एडजस्ट करता है, ताकि कम्पैरिजन ज्यादा फेयर हो सके.
UPTET में इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
इस बार एग्जाम तीन दिन और मल्टीपल शिफ्ट में हो रहा है. इतने बड़े कैंडीडेट बेस के साथ सिंगल डे एग्जाम प्रैक्टिकल नहीं था. UPESSC ने OTR (One Time Registration) जैसे नए सिस्टम भी लागू किए हैं और ट्रांसपेरेंसी को प्राथमिकता दी है.
पिछले वर्षों में UPTET पेपर लीक और एग्जाम मैनेजमेंट पर सवाल उठ चुके हैं. ऐसे में प्रशासन इस बार ज्यादा नियंत्रित सिस्टम चाहता है.
अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
देखा जाए तो नॉर्मलाइजेशन के बाद सबसे बड़ा बदलाव माइंड सेट में आएगा. अब सिर्फ रॉ स्कोर देखकर अपनी स्थिति समझना मुश्किल होगा. इसलिए कट ऑफ का अनुमान पहले जैसा आसान नहीं रहेगा.
टफ शिफ्ट वाले उम्मीदवारों को रिलेटिव एडवांटेज मिल सकता है. वहीं इजी शिफ्ट में हाई मार्क्स होने के बावजूद एडजस्टेड स्कोर नीचे जा सकता है. यानी, इस बार 'कितने नंबर आए' से ज्यादा अहम होगा 'किस context में आए'.
क्या कंट्रोवर्सी भी हो सकती है?
इसका सटीक जवाब तो नहीं दिया जा सकता है. लेकिन देखा जाए तो भारत के कई बड़े एग्जाम जैसे SSC, रेलवे और CUET में नॉर्मलाइजेशन पहले से लागू है, लेकिन हर बार फॉर्मूला ट्रांसपेरेसी पर सवाल उठते रहे हैं.
UPTET में भी सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या आयोग नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला पब्लिक करेगा? क्योंकि फेयरनेस सिर्फ सिस्टम से नहीं, ट्रस्ट से भी बनती है.
अभ्यर्थियों के लिए क्या जरूरी है?
एक्सपर्ट मानते हैं कि अब अभ्यर्थियों को शिफ्ट में तुलना करने में उलझने के बजाय एक्यूरेसी और अटेंप्ट क्वालिटी पर फोकस करना चाहिए. अगर पेपर कठिन लगे तो पैनिक करने की जरूरत नहीं, नॉर्मलाइजेशन उसी गैप को बैलेंस करने के लिए है.