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सैनिक के बेटे ने री-NEET में किया कमाल, 705 नंबर और AIR 9 लाकर बनें टॉपर, दिल्ली एम्स से करेंगे MBBS 

री-नीट परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. परीक्षा में राजस्थान के अलवर जिले के गौरव सिंह ने 705 नंबर हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल कर दिल्ली एम्स में प्रवेश लेने के अपने सपने को पूरा किया है. लेकिन उससे भी खास बात यह है कि गौरव के पहले उनकी बहन ने भी नीट परीक्षा पास की थी. अब एक घर में दो डॉक्टर होने वाले हैं.

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री-नीट परीक्षा में गौरव सिंह ने हासिल किया रैंक-9.
री-नीट परीक्षा में गौरव सिंह ने हासिल किया रैंक-9.

देश की कोचिंग राजधानी कहे जाने वाले कोटा से एक बार फिर सफलता की कहानी सामने आ रही है. री-नीट का रिजल्ट जारी हो गया है. इस बीच कोटा में रहकर तैयारी कर रहे गौरव सिंह ने कामयाबी का परचम लहराया है. उन्होंने नीट में 720 नंबर में से 705 नंबर हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल किया है. वैसे तो वह राजस्थान के अलवर जिले की मुंडावर तहसील के गादूवास गांव के रहने वाले हैं लेकिन वह पिछले सात साल से कोटा में रहते हुए अपनी स्कूलिंग और कोचिंग कर रहे थे. अब गौरव का देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान, दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) से एमबीबीएस करने का सपना सच होने जा रहा है. 

बहन भी कर रही है MBBS

गौरव ने बताया कि उनके पहले उनकी बहन ने भी नीट परीक्षा पास की थी और वह अभी MBBS की पढ़ाई कर रही हैं. उन्होंने अपनी बहन के नक्शे कदम पर चलकर कोटा आकर कोचिंग शुरू की थी. बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की कोई दिक्कत न आए इसलिए मां भी कोटा ही शिफ्ट हो गई थीं. 

फोन का कम करते थे उपयोग 

बात करते हुए गौरव कहते हैं कि वह मोबाइल का उपयोग कम करते थे. उनके पास एंड्रॉयड स्मार्टफोन है, लेकिन वह इसका इस्तेमाल केवल पढ़ाई के लिएकरते हैं. वे किसी भी तरह की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या फोन का मिसयूज नहीं करते थे. 

दोस्तों के साथ गुजारते थे समय 

पढ़ाई के बाद वह कुछ समय दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल लिया करते थे. रीक्रिएशन के लिए केवल इतना ही करता था. उन्होंने आगे बताया कि क्लास 10 में उनके 92 और 12वीं में 90 प्रतिशत नंबर आए थे. पिता से उन्होंने हार्डवर्क, कंसिस्टेंसी, डिसिप्लिन सीखा. इसे ही मुझे हमेशा मोटिवेशन मिला. मुझे काफी समय से लगने लग गया था कि मेरा सिलेक्शन हो जाएगा क्योंकि अच्छे मार्क्स मेरे टेस्ट में आ रहे थे. इसीलिए मैंने लक्ष्य बनाया कि दिल्ली एम्स से ही एमबीबीएस करना है. 

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दिन में 13 घंटे करते थे पढ़ाई 

गौरव सिंह ने आगे बताया कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा क्रेडिट गलतियों का एनालिसिस करना है. कोटा टेस्ट के लिए जाना जाता है और यहां हर टेस्ट के बाद छात्र इसका एनालिसिस करते हैं. मैं भी उन्हीं छात्रों में शामिल हूं. अपने एनालिसिस में मैंने देखा करता था कि मैं कहां गलती कर रहा हूं. इसी के बाद वह उसमें सुधार करते थे. यह मेरी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. गौरव ने बताया कि वह क्लासरूम में करीब 6 घंटे की पढ़ाई करते थे और इसके अलावा 7 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे. 

पिता से सीखा मेहनत करना 

गौरव के पिता राजेश सिंह हाल में भारतीय सेना में सूबेदार मेजर के पद पर  पश्चिम बंगाल में तैनात हैं. अपनी सफलता के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि मैंने अपने पापा से कड़ी मेहनत, कंसिस्टेंसी और अनुशासन सीखा है. इसी फौजी अनुशासन को मैंने अपनी पढ़ाई में भी उतारा. रोजाना क्लास में जो भी पढ़ाया जाता था, उसे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ना और घर आकर उसका तुरंत रिवीजन करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा था. 

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