प्रह्लाद जोशी पहले देश में नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) को बढ़ावा देने का काम कर रहे थे. लेकिन अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले वे संसदीय मामलों और सरकार के कई कठिन मंत्रालयों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर चुके हैं. हुबली के रहने वाले और आर्ट्स ग्रेजुएट (B.A.) प्रह्लाद जोशी अब ऐसे मंत्रालय में काम करेंगे, जहां पूरे देश के लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा हुआ है. ऐसे में उनके लिए भी यह जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण है.
धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही जोशी को एक ऐसे समय में मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है जो निर्णायक मोड़ पर है. प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बहाल करने से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को आगे बढ़ाने और उच्च शिक्षा सुधारों की देखरेख तक, उनके सामने आने वाली चुनौतियां प्रशासन से कहीं अधिक व्यापक है. इस बीच लोग उनके बारे में यह भी जानना चाहते हैं कि जो लाखों बच्चों की पढ़ाई का ध्यान रखेंगे आखिर वह कितने पढ़े-लिखे हैं.
कर्नाटक से ग्रेजुएशन
आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के मुताकि, प्रल्हाद जोशी ने हुबली में अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने धारवाड़ के कदाससिद्धेश्वर कला महाविद्यालय से बीए (आर्ट्स ग्रेजुएट) की पढ़ाई की. यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध है. उन्होंने 1983 में बीए की डिग्री प्राप्त की. कर्नाटक विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी, उत्तरी कर्नाटक का एक प्रमुख विश्वविद्यालय है. इस विश्वविद्यालय से पढ़कर कई राजनेता, सरकारी अधिकारी और अन्य प्रसिद्ध लोग आगे बढ़े हैं. अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने सार्वजनिक मुद्दों, सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास में गहरी रुचि विकसित की.
कैसा रहा है सफर?
प्रह्लाद जोशी ने इंजीनियरिंग, कानून या प्रबंधन की पढ़ाई नहीं की है. उन्होंने मानविकी (Arts) में बीए किया है. लेकिन उनकी पहचान केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक अनुभव से भी है. वे पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं और सरकार के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं.
राजनीति में आने से पहले वे व्यापार और सामाजिक कार्यों से जुड़े थे. इससे पता चलता है कि उनकी रुचि शुरू से ही रोजगार बढ़ाने और लोगों के विकास में रही है.
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक में हुआ था. वे 2004 में धारवाड़ लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने. इसके बाद से वे हर लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं, इसलिए वे कर्नाटक के भाजपा के सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाले नेताओं में शामिल हैं.
पिछले कुछ सालों में वे सरकार के विश्वसनीय और अनुभवी मंत्री के रूप में जाने गए हैं. उन्हें अक्सर ऐसे मंत्रालय दिए जाते हैं, जहां नीतियों को लागू करना और राजनीतिक समन्वय करना बहुत जरूरी होता है.
शिक्षा मंत्रालय एक नई चुनौती
शिक्षा मंत्रालय के सामने एक बिल्कुल अलग चुनौती है. बुनियादी ढांचे या ऊर्जा के विपरीत, शिक्षा लगभग हर भारतीय परिवार को सीधे तौर पर प्रभावित करती है. जोशी ऐसे समय में पदभार संभाल रहे हैं जब मंत्रालय NEET विवाद के बाद प्रवेश परीक्षाओं में जनता का विश्वास फिर से कायम करने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मजबूत करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने, उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने और स्कूलों में सीखने के परिणामों में सुधार करने के लिए काम कर रहा है.
शिक्षा मंत्री के तौर पर पहली बार करेंगे काम
शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी पहली बार संभाल रहे हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दूसरे मंत्रालयों में काम करने का उनका अनुभव शिक्षा व्यवस्था में अच्छे बदलाव ला पाएगा. लोगों की उम्मीद है कि उनके फैसलों से छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालयों को फायदा मिलेगा.
हुबली से बीए करने वाले प्रह्लाद जोशी अब अपने जीवन के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं. इस बार उनकी सफलता का आकलन कोयला उत्पादन या संसद में काम से नहीं होगा, बल्कि इस बात से होगा कि वे देश की शिक्षा व्यवस्था को कितना बेहतर बनाते हैं और लाखों छात्रों का भविष्य कितना मजबूत कर पाते हैं.