2500 बच्चे, 10 टीचर और 1 बेंच पर 8 छात्र... झारखंड के कोडरमा में स्कूल की इन समस्याओं से ऊबकर जेन जी यानी आज की युवा पीढ़ी सड़कों पर उतर आई. इन बच्चों ने सोशल मीडिया पर वायरल नारे 'एक सुट्टा दो चाय, ऐसे प्रतिनिधि हाय हाय' जैसे नारे लगाए. छात्रों ने कहा कि टीचर दो, पढ़ाई दो... या फिर स्कूल का ताला हमें दे दो. प्रर्दशन से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया.
यह मामला बासोडीह के राज्य संपोषित 10+2 उच्च विद्यालय का है, जहां 2500 से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य महज 10 शिक्षकों के भरोसे छोड़ दिया गया है. अपनी कक्षाओं में पढ़ाई न होने, टपकती छतों, बंद पड़े शौचालयों और बदहाल व्यवस्था से नाराज सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने पैदल मार्च निकाला और सतगावां प्रखंड मुख्यालय का घेराव कर दिया.
2540 छात्र और सिर्फ 10 शिक्षक: पढ़ाई का यह कौन सा मॉडल है?
विद्यालय में कक्षा 9वीं से 12वीं तक कुल 2540 विद्यार्थी नामांकित हैं. कागजों पर 22 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 18 पदस्थापित थे. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से इन 18 में से 8 शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में डेप्युटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर भेज दिया गया. छात्रों का कहना है कि यहां 9वीं और 10वीं में अंग्रेजी, इतिहास, संस्कृत, बायो और इकोनॉमिक्स के टीचर गायब हैं. वहीं 11वीं-12वीं में मैथ्स, केमिस्ट्री, हिस्ट्री, हिंदी और संस्कृत पढ़ाने वाला कोई नहीं है.
एक-एक बेंच पर 8-8 बच्चे बैठने को मजबूर
छात्रों का कहना है कि बरसात में क्लासरूम में पानी टपकता है. सबसे शर्मनाक बात यह है कि शौचालयों में ताले लटके रहते हैं, जिससे छात्राओं को भारी असहजता का सामना करना पड़ता है. स्थानीय शिकायतों पर जब किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली, तो छात्र-छात्राओं का गुस्सा सब्र का बांध तोड़कर बाहर आ गया. बासोडीह स्कूल से लेकर सतगावां प्रखंड मुख्यालय तक छात्र-छात्राओं ने 10 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला और दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए.