झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रीलिमिनरी परीक्षा–2025 में बड़े पैमाने पर हुई कथित धांधली और भ्रष्टाचार की गूंज अब देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनाई देगी. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सोमवार (24 अगस्त) को अहम सुनवाई करने जा रहा है.
यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ करेगी. सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दाखिल इस याचिका में राज्य पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच की गुहार लगाई गई है.
CID से छीनकर CBI को सौंपी जाए जांच
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का मुख्य आधार परीक्षा में हुआ बड़े पैमाने का 'सिस्टमैटिक करप्शन' (व्यवस्थागत भ्रष्टाचार) है. वर्तमान में इस कथित धांधली की जांच राज्य का क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) कर रहा है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि चूंकि मामले में राज्य सरकार के ऊंचे अधिकारी और परीक्षा कराने वाली एजेंसियां शामिल हो सकती हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए CID से मामला लेकर CBI या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों की कमेटी को सौंपा जाना बेहद जरूरी है.
OMR शीट वायरल होने से खुला 'सिस्टमैटिक करप्शन'
19 अप्रैल 2026 को आयोजित हुई इस प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जब 2 जुलाई 2026 को जारी किए गए थे, तब एक अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई थी. इसमें मूल्यांकन स्तर पर गंभीर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था. याचिका में कहा गया है कि भले ही चौतरफा दबाव में आकर राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने की बात कही हो, लेकिन इस पूरे सिंडिकेट और भ्रष्टाचार के पीछे छिपे मगरमच्छों को बेनकाब करना जरूरी है.
डिजिटल रिकॉर्ड्स और CCTV फुटेज नष्ट होने का डर
याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से गुहार लगाई है कि परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल और फिजिकल सुबूतों को तुरंत सील और सुरक्षित किया जाए. दलील दी गई है कि समय बीतने के साथ अभ्यर्थियों की मूल OMR शीट और कार्बन कॉपियों, परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज और सर्वर ऑडिट लॉग और डिजिटल डेटा के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है या उन्हें 'ओवरराइट' करके हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है.
नए सिरे से पारदर्शी परीक्षा कराने की मांग
याचिका में 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह रद्द घोषित करते हुए, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सख्त गाइडलाइंस और कड़े सुरक्षा मानकों के तहत नए सिरे से PT परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई है.
हाईकोर्ट के स्टे के बाद पेचीदा हुआ मामला
यह याचिका ऐसे नाजुक मोड़ पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची है, जब हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा आनन-फानन में 11वीं से 13वीं JPSC नियुक्तियों को रद्द करने वाले फैसले पर अंतरिम स्टे (Stay) लगाकर चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. एक तरफ हाईकोर्ट के स्टे से नियुक्तियां बहाल हो रही हैं, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग से पूरा मामला कानूनी रूप से बेहद पेचीदा हो चुका है.