भारत में अच्छी जगह पर नौकरी करना और अच्छी सैलरी पाना लाखों युवाओं का सपना होता है लेकिन कई बार आपको नौकरी तो मिल जाती है लेकिन आपकी जरूरतों और कई कारणों का आगे सैलरी फिकी पड़ जाती है. पर जब आप पहली बार नौकरी करते हैं, तो आपको कई चुनौती का सामना करना होता लेकिन 3 साल के अनुभव के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद हैरान कर देने वाला है. दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर 25 साल की एक सिविल इंजीनियर ने अपनी आपबीती सुनाई है. उन्होंने पोस्ट में बताया कि उन्हें लगातार छह दिन ऑफिस जाना होता है पर फिर भी सैलरी कम है, परिवार के साथ टाइम नहीं मिलता है और मेंटल पीस को जीवन से जा चुकी है. पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों के बीच वर्क-लाइफ बैलेंस, कर्मचारियों की मानसिक सेहत, कम सैलरी और छह दिन काम करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
साल 2023 में मिली नौकरी
हैदराबाद की रहने वाली ये सिविल इंजीनियर ने पोस्ट में बताया कि साल 2023 में IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने लगी थी. हाल में उनके पास 3 साल का अनुभव है लेकिन इसके बावजूद संघर्ष जारी है. पोस्ट में उन्होंने लिखा कि तीन साल से लगातार हफ्ते के 6 दिन काम कर रही हूं. ऑफिस में लंबा समय गुजारने के बाद जब वह घर जाती हैं, तो उनके पास परिवार के साथ समय बिताने की एनर्जी ही नहीं बचती है. उन्होंने बताया कि नौकरी के कारण उनकी निजी जिंदगी लगभग खत्म हो चुकी है.

एक दिन की छुट्टी
इंजीनियर ने पोस्ट में बताया कि सोमवार से शनिवार तक वह लगातार काम करती हैं और बस एक दिन रविवार के दिन उन्हें आराम करने को मिलता है. उन्होंने बताया कि रविवार का तो पूरा दिन छह दिन की थकान दूर करने में चला जाता है. जैसे ही थोड़ा आराम मिलता है, वैसे ही सोमवार का दिन आ जाती है. उनकी इस पोस्ट से हजारों लोग रिलेट कर पा रहे हैं.
3 साल में केवल 3 हजार बढ़ी सैलरी
पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि जब साल 2023 में उन्होंने नौकरी जॉइन की थी तो उनकी सैलरी 20 हजार रुपये थी. लेकिन अब तीन साल के बाद उनकी सैलरी 23 हजार रुपये ही है. उन्होंने ये भी बताया कि कम सैलरी में किराया, रोजाना आने-जाने का खर्च और परिवार की आर्थिक मदद करने के बाद उनके पास कुछ भी नहीं बचता.
दूसरी नौकरी में भी दिक्कत
उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी की तलाश की लेकिन वहां पर भी यही हालात है. उनके अनुसार, सिविल इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कई कंपनियां आज भी सप्ताह में छह दिन काम कराती हैं. इंजीनियर ने कहा कि अगर बेहतर जीवन चाहिए तो, शायह पूरे सेक्टर में बदलाव करना होगा, जो आसान नहीं है.