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सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में DU, कॉलेजों से मांगे गए नए हॉस्टल प्रोजेक्ट्स, फास्ट ट्रैक मोड में होगा काम

कॉलेजों को मौजूदा छात्रावासों की क्षमता और सुविधाओं का आकलन करने के साथ-साथ निर्माणाधीन हॉस्टलों को जल्द पूरा कराने की दिशा में काम करने को कहा गया है. विश्वविद्यालय का जोर यह है कि तैयार होने वाली आवासीय सुविधाएं बिना अनावश्यक देरी के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएं.

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जानिए सत्या निकेतन हादसे के बाद कैसे दूर होगा डीयू का 'हॉस्टल संकट'(AI-generated image)
जानिए सत्या निकेतन हादसे के बाद कैसे दूर होगा डीयू का 'हॉस्टल संकट'(AI-generated image)

सत्य निकेतन में छात्रावास की इमारत ढहने की घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं. विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों के प्रिंसिपलों से अपने यहां विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध आवासीय सुविधाओं की समीक्षा करने और नए हॉस्टल की संभावनाएं तलाशने को कहा है. आने वाले समय में कई नए छात्रावास प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय के समक्ष भेजे जाने की उम्मीद है.

कॉलेजों को मौजूदा छात्रावासों की क्षमता और सुविधाओं का आकलन करने के साथ-साथ निर्माणाधीन हॉस्टलों को जल्द पूरा कराने की दिशा में काम करने को कहा गया है. विश्वविद्यालय का जोर यह है कि तैयार होने वाली आवासीय सुविधाएं बिना अनावश्यक देरी के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएं.

नए हॉस्टल के लिए जमीन से सरकारी योजनाओं तक का आकलन

डीयू ने प्रिंसिपलों से अपने-अपने कॉलेजों में नए छात्रावासों के निर्माण की संभावनाएं तलाशने को कहा है. इसके लिए कॉलेजों को उपलब्ध स्थान की पहचान करने के साथ-साथ निर्माण की व्यवहार्यता का आकलन करना होगा. इसके अलावा केंद्र और दिल्ली सरकार की उपलब्ध योजनाओं, संभावित वित्तीय सहायता और अन्य संसाधनों की भी पड़ताल करने को कहा गया है. जिन कॉलेजों में हॉस्टल निर्माण की संभावना होगी, वहां आवश्यकताओं का आकलन कर योजना तैयार करने और परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा.

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इस पूरी कवायद में छात्र संख्या, हॉस्टल की मौजूदा क्षमता, भविष्य की जरूरत, उपलब्ध जमीन और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा.

सत्य निकेतन हादसे के बाद हॉस्टल संकट फिर चर्चा में

डीयू की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब सत्य निकेतन में छात्र आवास के तौर पर इस्तेमाल हो रही बहुमंजिला इमारत के ढहने से आवासीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. हादसे में कई लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए. घटना के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है.

सत्य निकेतन डीयू के दक्षिण परिसर के नजदीक होने के कारण विद्यार्थियों के बीच निजी पीजी और किराये के आवास के लिए प्रमुख इलाका रहा है. डीयू में सीमित हॉस्टल सीटों के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी, फ्लैट या किराये के कमरों पर निर्भर रहते हैं. हादसे ने विश्वविद्यालय के भीतर पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है.

NHRC ने भी मांगी हॉस्टल व्यवस्था पर रिपोर्ट

हादसे के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से डीयू के परामर्श से छात्रावास और अन्य आवासीय सुविधाओं पर व्यापक रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने मौजूदा हॉस्टल सुविधाओं के उन्नयन और विस्तार के साथ नए छात्रावासों की व्यवहार्यता पर भी ध्यान देने को कहा है.

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वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में भी डीयू के सभी कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाओं की मांग उठाई गई है. अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय से इस मामले में जवाब मांगा है. याचिका में कॉलेज-वार हॉस्टल क्षमता और छात्रों की आवासीय जरूरत का आकलन कर समयबद्ध नीति या मास्टर प्लान तैयार करने की मांग की गई है.

सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने पर जोर

डीयू कॉलेजों से नए प्रोजेक्ट तैयार कराने की कवायद का मकसद सिर्फ हॉस्टल में सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं है. विश्वविद्यालय के सामने छात्रों को सुरक्षित, संस्थागत और अपेक्षाकृत किफायती आवास उपलब्ध कराने की चुनौती भी है.
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र संगठनों और विद्यार्थियों की ओर से भी डीयू में हॉस्टल की संख्या बढ़ाने और निजी पीजी में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठी है. ऐसे में कॉलेज स्तर पर नई परियोजनाओं की पहचान और उन्हें जल्द आगे बढ़ाने का कदम विश्वविद्यालय की आवासीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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