दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि माता-पिता की गलती की सजा बच्चे को नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने सेंट कोलंबस स्कूल और सीबीएसई को 12वीं के छात्र की जन्मतिथि अपने रिकॉर्ड में सही करने का निर्देश दिया, लेकिन गलत जानकारी देकर स्कूल में दाखिला कराने के लिए छात्र के माता-पिता पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. मामला एक ऐसे छात्र से जुड़ा है, जिसके माता-पिता ने 2014 में किंडरगार्टन (KG) में दाखिले के समय उसकी डेट ऑफ बर्थ गलत लिखवाई थी. स्कूल के रिकॉर्ड में जन्मतिथि 23 मार्च 2010 लिखवाई गई, जबकि छात्र की वास्तविक जन्मतिथि 23 अप्रैल 2010 थी. अदालत के अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया ताकि बच्चा उस शैक्षणिक सत्र के लिए तय आयु सीमा में आ सके.
डॉक्यूमेंट से खुला राज
हालांकि, छात्र के जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट और अस्पताल के रिकॉर्ड समेत अन्य सभी सरकारी दस्तावेजों में सही जन्मतिथि 23 अप्रैल 2010 दर्ज थी. बाद में स्कूल और सीबीएसई के रिकॉर्ड में भी इसी गलती को लेकर विवाद खड़ा हो गया. मामले को लेकर न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि जब बच्चे का दाखिला हुआ था, तब उसकी उम्र करीब चार साल थी. ऐसे में माता-पिता की गलती का जिम्मेदार बच्चे को नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि करीब 10 साल तक पढ़ाई करने और 10वीं-11वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उसका दाखिला रद्द करना उचित नहीं होगा.
2 लाख रुपये का जुर्माना
अदालत ने माता-पिता के आचरण को अनैतिक बताते हुए कहा कि उन्हें बिना किसी कार्रवाई के नहीं छोड़ा जा सकता. इसी कारण उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. यह राशि दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए इस्तेमाल की जाएगी. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि छात्र के अभिभावक आवश्यक दस्तावेजों के साथ स्कूल और सीबीएसई में आवेदन करें.
सुधार के दिए निर्देश
इसके बाद स्कूल अपने रिकॉर्ड में और सीबीएसई 10वीं के प्रमाणपत्र के साथ-साथ 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिकॉर्ड में भी छात्र की सही जन्मतिथि दर्ज करें. अदालत ने कहा कि जन्मतिथि जैसे महत्वपूर्ण विवरण सभी आधिकारिक दस्तावेजों में एक जैसे होने चाहिए, क्योंकि भविष्य में कॉलेज में दाखिले और अन्य कामों में इससे परेशानी हो सकती है.