एलएसी
एलएसी (LAC) यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल या वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) एक काल्पनिक सीमांकन रेखा है. यह भारत-नियंत्रित क्षेत्र को चीन-भारत सीमा में चीनी-नियंत्रित क्षेत्र से अलग करती है (Line Between Chin and India).
यह भारत-चीन सीमा विवाद (Sino-Indian Border Dispute) में प्रत्येक देश द्वारा दावा की गई सीमाओं से अलग है. भारतीय दावों में पूरा अक्साई चिन (Aksai Chin) क्षेत्र शामिल है और चीनी दावे में अरुणाचल प्रदेश शामिल है. ये दावे "वास्तविक नियंत्रण" (Actual Control) में शामिल नहीं हैं.
एलएसी को आम तौर पर तीन क्षेत्रों में विभाजित (LAC, Divided into 3 Sectors) किया गया है -
पहला, भारत की ओर लद्दाख (Ladakh) और चीन की ओर तिब्बत (Tibet) और झिंजियांग (Xinjiang) स्वायत्त क्षेत्रों के बीच पश्चिमी क्षेत्र. यह क्षेत्र 2020 चीन-भारत झड़पों का स्थान था (First, Western Sector).
दूसरा, भारतीय पक्ष में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश (Uttarakhand and Himachal Pradesh) के बीच मध्य क्षेत्र और चीनी पक्ष में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (Second, Middle Sector).
तीसरा, भारत की ओर अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) और चीन की ओर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के बीच पूर्वी क्षेत्र. यह क्षेत्र आम तौर पर मैकमोहन रेखा (McMahon Line) बनाता है (Third, Eastern Sector).
BRICS Summit 2026 में सात साल बाद पीएम मोदी और शी जिनपिंग की 45 मिनट की मुलाकात हुई इसके तुरंत बाद रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि चीन ने LAC के सामने अपनी सैन्य तैनाती कम की है क्या भारत-चीन रिश्ते सचमुच सुधर रहे हैं, या यह चीन की नई रणनीति है? देखिए पूरी रिपोर्ट
भारत ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक नक्शे में 27 स्थानों को शामिल किया है, जिनमें थग ला पास, लॉन्गजू और शेर-ए-थापा मेमोरियल शामिल हैं. यह चीन के दावों का जवाब है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण है.
वैश्विक अंतरिक्ष खुफिया कंपनी आइसआई (ICEYE) ने नई दिल्ली में ICEYE इंडिया स्थापित की है. इसका फोकस रक्षा और सुरक्षा एजेंसियों के लिए अंतरिक्ष आधारित निगरानी, खासकर एलएसी और सीमाओं पर नजर रखना है. स्वदेशी क्षमता बढ़ाने की योजना है.
भारत और अमेरिका सितंबर में युद्ध अभ्यास 2026 का 22वां संस्करण आयोजित करेंगे. औली और महाजन में करीब 350-350 सैनिक हिस्सा लेंगे. यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास है.
अरुणाचल में चीनी सेना की घुसपैठ की सोशल मीडिया अफवाहों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकात हो रही है. सरकार ने धीमी घुसपैठ के दावों को खारिज किया. सेना और आईटीबीपी सीमा पर पूरी तरह सतर्क हैं.
भारत-चीन सीमा मामलों पर 6 अगस्त 2026 को WMCC की 36वीं बैठक हुई. दोनों पक्षों ने LAC पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया. मौजूदा मुद्दों को सुलझाने पर सहमति जताई.
भारतीय सेना LAC और LOC पर रसद पहुंचाने के लिए 2715 लॉजिस्टिक्स ड्रोन खरीदने जा रही है. यह अब तक की सबसे बड़ी खरीद है जो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सैनिकों तक राशन, गोला-बारूद और दवा पहुंचाने में मदद करेगी.
चीन ने भारतीय सीमा के पास होटन और दमजंग एयरबेस पर जे-20 माइटी ड्रैगन स्टेल्थ जेट तैनात किए हैं. भारत के राफेल और Su-30MKI इससे मुकाबला कर सकते हैं, लेकिन AMCA अभी तैयार नहीं.
यह आरोप अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थॉमस डिनैनो ने शुक्रवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान लगाया. खास बात यह है कि ये दावा ऐसे समय किया गया है, जब अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार संधि पांच फरवरी को खत्म हो चुकी है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भविष्य की किसी भी परमाणु संधि में चीन को शामिल करना चाहते हैं.
संसद में चीन पर हुए हंगामे की जड़ 29-30 अगस्त 2020 की उस घटना से जुड़ी है, जब भारतीय सेना ने सुनियोजित रणनीति के तहत कैलाश रेंज की चोटियों पर कब्जा कर लिया था. गलवान संघर्ष के बाद चीन के तेवर खतरनाक थे और पूरी दुनिया देख रही थी कि भारत क्या कदम उठाएगा. भारतीय सैन्य कमांडरों ने खुफिया रिपोर्टों और चुशुल घाटी की अग्रिम चौकियों से मिले संकेतों के आधार पर मुखपारी, रेज़ांग ला और रेचिन ला चोटियों पर सैनिकों को तैनात कर दिया. 1962 के युद्ध के बाद पहली बार भारतीय सेना कैलाश पर्वतमाला पर तैनात हुई और मोल्डो गैरीसन पर सीधी नज़र रख सकी. इस कदम से चीन स्तब्ध रह गया और भारत की रणनीति ने उसे बैकफुट पर डाल दिया. आगे इसका परिणाम डिसइंगेजमेंट के रूप में सामने आया.
लद्दाख के LoC और LAC पर भारतीय सेना के जवान चरम ठंड (-50°C तक), भारी बर्फबारी और ऊंचाई से जूझते हुए देश की रक्षा कर रहे हैं. विशेष ठंडे कपड़े, हीटेड शेल्टर, हेलिकॉप्टर सपोर्ट और लगातार ट्रेनिंग से वे अलर्ट रहते हैं. द्रास में 'जश्न-ए-फतेह' जैसे कार्यक्रमों से भी लोकल लोगों से जुड़ते हैं. उनकी बहादुरी और समर्पण से सीमाएं सुरक्षित हैं.
जनवरी में लद्दाख और द्रास जैसे इलाकों में हालात बहुत कठिन हो जाते हैं. द्रास, जिसे भारत का सबसे ठंडा बसा हुआ क्षेत्र माना जाता है, वहां तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस से गिरकर -50डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट पर विवाद हो रहा है. अमेरिकी अखबार ने भारत के हिमालयी सीमा ढांचे को 'चीन से युद्ध तैयारी' बताया है. विशेषज्ञ बोले- यह रक्षात्मक काम है, कमजोरियां दूर करने के लिए. LAC पर तनाव कम हो रहा, बातचीत जारी है. WSJ का लहजा युद्ध उकसाने वाला है. संतुलित नहीं है.
इससे पहले हाल ही में चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए ऑनलाइन वीजा प्रोसेसिंग अप्रूवल को लेकर नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अब जल्द ही फिर से ऑनलाइन वीजा एप्लिकेशन सिस्टम की शुरुआत की जाएगी.
भारत-चीन LAC पर सुरक्षा संभालने वाली ITBP जल्द ही 10 ऑल-वुमेन बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) बनाने जा रही है, जिसकी घोषणा DG प्रवीण कुमार ने जम्मू में ITBP के 64वें स्थापना दिवस पर की. 2020 के बाद शुरू हुए ‘फॉरवर्डाइजेशन’ प्लान के तहत ITBP ने अपनी चौकियों की संख्या 180 से बढ़ाकर 215 कर दी है और भविष्य में 41 नई फॉरवर्ड चौकियां स्थापित करने की योजना है.
लद्दाख में हनले-चुमर 91 किमी सड़क खुल गई है. BRO ने 14500-17200 फीट ऊंचाई पर ये सड़क बनाई है. सालसा ला दर्रे से गुजरती है. सेना की रणनीतिक मदद करेगी. पर्यटन बढ़ाएगी – हनले वेधशाला, झीलें जोड़ेगी.
गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद भारत की सबसे बड़ी सैन्य चुनौती है. उन्होंने चाणक्य का जिक्र करते हुए चार प्रमुख राष्ट्रीय खतरे भी गिनाए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. LAC पर शांति और आपसी सम्मान के बीच India-China relations को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. SCO Summit 2025 से पहले यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों में अहम मानी जा रही है.
चीन के विदेश मंत्री भारत दौरे पर हैं और एलएसी विवाद पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 24वीं बैठक हुई, जिसमें विदेश मंत्री और एनएसए डोभाल शामिल हुए. भारत ने रिश्ते सुधारने के लिए परस्पर सम्मान, संवेदनशीलता और हित पर जोर दिया. इस बीच अमेरिका के टैरिफ रुख से भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास आई, जिसका चीन ने फायदा उठाया.
गलवान की घटना के बाद भारत ने बुनियादी ढांचे के विस्तार में तेजी से काम किया है. वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.53% ज्यादा हैं. इसमें से 7,146 करोड़ रुपये सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए अलग रखे गए, जिसने अकेले 2024 में 2,236 करोड़ रुपये के 75 प्रोजेक्ट पूरे किए हैं.
सेना की मौजूदा 3 डिवीजन के अतिरिक्त इस नई Division का गठन किया गया है, जिस पर पूरे एलएसी क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी. सेना का यह फैसला ऑर्डर ऑफ बैटल में बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसमें मौजूदा सैनिकों की दोबारा तैनाती भी शामिल है.