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क्या अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन से पहले कुर्द ईरान पर हमला करेंगे? तीन तरफा अटैक की तैयारी

क्या कुर्द अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन से पहले ईरान पर हमला कर देंगे? इजरायल हवाई हमलों से, अमेरिका हवाई सहायता से और कुर्द इराक बॉर्डर से जमीन पर घुसकर तीन तरफा अटैक की तैयारी कर रहे हैं. कुर्द पहले हमला करके ईरानी सेना को कमजोर करना चाहते हैं. इससे ईरान में विद्रोह तेज हो सकता है.

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ये है ईरानियन-कुर्दिश कुर्दिस्तान फ्री लाइफ पार्टी (पीजेएके) की महिला विद्रोही जो लाइट मशीन गन लेकर हमला करने को तैयार है. (Photo:X/@Afshin_Ismaeli)
ये है ईरानियन-कुर्दिश कुर्दिस्तान फ्री लाइफ पार्टी (पीजेएके) की महिला विद्रोही जो लाइट मशीन गन लेकर हमला करने को तैयार है. (Photo:X/@Afshin_Ismaeli)

दुनिया भर में अभी ईरान के साथ चल रही जंग की खबरें हर किसी को हैरान कर रही हैं. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए थे. अब खबरें आ रही हैं कि अब कुर्द लोग ईरान पर जमीन से हमला करने की तैयारी कर रहे हैं.

सवाल ये है – क्या ये हमला अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन से पहले होगा? और क्या सच में इजरायल, अमेरिका और कुर्द मिलकर तीन तरफ से ईरान को घेरने की योजना बना रहे हैं? पर ऐसी नौबत क्यों आईं. क्योंकि...

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ईरान ने कुर्दिस्तान पर हमला किया...

शनिवार सुबह इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बारजानी के घर पर ड्रोन हमला किया गया. एरबिल में इराकी कुर्द शासक पार्टी के नेता मसूद बारजानी के आवास के पास वायु रक्षा प्रणालियों ने एक ड्रोन को मार गिराया. इराक की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालने वाली किसी भी चीज की अस्वीकृति पर जोर देता है. इराक और कुर्दिस्तान क्षेत्र के साथ अपनी एकजुटता और उनकी सुरक्षा व स्थिरता के प्रति पूर्ण समर्थन की पुष्टि करता है.

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कुर्द कौन हैं और ईरान से उनका पुराना झगड़ा क्यों?

कुर्द एक जातीय समूह है जो मुख्य रूप से इराक, ईरान, तुर्की और सीरिया में रहते हैं. ईरान में भी लाखों कुर्द लोग हैं, लेकिन ईरानी सरकार उन्हें पूरा अधिकार नहीं देती. कुर्द लोग लंबे समय से ईरान में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. उनके कई गुट जैसे पीडीकेआई, पीएके और कोमाला पार्टी हैं जो ईरान की सीमा के पास इराक के कुर्द क्षेत्र में छिपकर रहते हैं. ये लोग पेशमर्गा नाम के लड़ाकों के साथ तैयार रहते हैं. 

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Trilateral Offensive Kurdish Peshmerga

तुर्की, इराक, सीरिया, ईरान और आर्मेनिया की सीमाओं पर फैले एक पहाड़ी क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक कुर्द लोग निवास करते हैं. वे मध्य पूर्व के चौथे सबसे बड़े जातीय समूह हैं, लेकिन उन्हें कभी भी एक स्थायी राष्ट्र राज्य प्राप्त नहीं हुआ है.

ये पेशमर्गा बहुत बहादुर माने जाते हैं. सालों से ईरान की सरकार से लड़ते आ रहे हैं. अब इस जंग में ये कुर्द गुट अमेरिका और इजरायल की मदद से ईरान के अंदर घुसने की सोच रहे हैं. उनका मकसद ईरानी सेना को कमजोर करना और ईरान के अंदर विद्रोह भड़काना है, ताकि ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक गिर जाए.

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पेशमर्गा यानी मौत का सामना करने वाले

पेशमर्गा, जिसका अर्थ मौत का सामना करने वाले होता है. उत्तरी इराक में कुर्द लड़ाकों का संगठन है और इन पर कुर्दिस्तान क्षेत्र (इसमें कथित तौर पर ईरान का भी इलाका शामिल है ) में फैले कुर्द समूहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. अब इनकी संख्या लगभग 190,000 मानी जाती है. 

Trilateral Offensive Kurdish Peshmerga

पेशमर्गा ने ईराक में आईएसआईएस के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी है. पेशमर्गा 1800 के दशक के बाद में ढीले-ढाले ढंग से संगठित कबाईली सीमा रक्षक समूहों के रूप में उभरे. प्रथम विश्व युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य के पतन के बाद इन्हें औपचारिक रूप से कुर्द लोगों के राष्ट्रीय लड़ाकू बल के रूप में संगठित किया गया. 

जैसे-जैसे कुर्द राष्ट्रवादी आंदोलन बढ़ा, वैसे-वैसे कुर्द संस्कृति के एक प्रमुख हिस्से के रूप में पेशमर्गा की पहचान भी विकसित हुई - वे कबायली रक्षकों से एक स्वतंत्र कुर्द राज्य के लिए राष्ट्रवादी लड़ाकों में परिवर्तित हो गए. आधुनिक पेशमर्गा में अधिकतर ऐसे अनुभवी सैनिक शामिल हैं जो इराकी सरकारी बलों के खिलाफ लड़ाई और कुर्द गुटों के बीच आंतरिक संघर्ष में शामिल रहे हैं.

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तीन तरफा अटैक की तैयारी – इजरायल, अमेरिका और कुर्द 

इजरायल और अमेरिका ने मिलकर एक योजना बनाई थी. इजरायल हवाई हमले और मिसाइलों से ईरान को तबाह कर रहा है. अमेरिका भी हवा से हमले कर रहा है. हजारों सैनिक मध्य पूर्व में भेज रहा है. लेकिन दोनों देश जमीन पर अपने सैनिक नहीं उतारना चाहते. इसके बजाय उन्होंने कुर्द लड़ाकों को हथियार और हवाई सहायता देने का प्लान बनाया. 

Trilateral Offensive Kurdish Peshmerga

योजना ये थी कि कुर्द ईरान-इराक बॉर्डर से हजारों लड़ाकों के साथ अंदर घुसेंगे. इजरायल और अमेरिका हवा से कवर करेंगे, ताकि कुर्द सुरक्षित आगे बढ़ सकें. ये तीन तरफा हमला कहलाता है – एक तरफ इजरायल के हवाई हमले, दूसरी तरफ अमेरिका के हमले और तीसरी तरफ कुर्दों का जमीन ऑपरेशन.

मकसद था ईरानी सेना को चारों तरफ से बांटना, ताकि वे कमजोर पड़ जाएं और अंदर से विद्रोह शुरू हो जाए. मोसाद और सीआईए ने सालों से कुर्दों को हथियार दिए हैं. कुर्द नेता ट्रंप से भी बात कर चुके हैं.

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क्या अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी है?  

अमेरिका ने साफ कहा है कि वो ईरान में अपने सैनिक नहीं भेजना चाहता. ट्रंप सरकार कह रही है कि ग्राउंड ट्रूप्स प्लान में नहीं हैं. लेकिन अमेरिका ने 50,000 से ज्यादा सैनिक मध्य पूर्व में भेज दिए हैं, जिनमें 82nd एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिक भी शामिल हैं.

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ये सैनिक हवाई हमलों में मदद करेंगे, लेकिन जमीन पर लड़ाई कुर्दों से करवाने की सोच है. कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि कुर्द पहले ही बॉर्डर क्रॉस करके ईरान में छोटे-छोटे हमले शुरू कर चुके हैं. मार्च 2026 की शुरुआत में कुर्द लड़ाके इराक से ईरान में घुसने के लिए तैयार थे.

Trilateral Offensive Kurdish Peshmerga

लेकिन कुछ खबरें ये भी कहती हैं कि प्लान लीक हो गया, इसलिए अमेरिका ने इसे रोक दिया. फिर भी कुर्द नेता कह रहे हैं कि वे तैयार हैं और अमेरिकी हवाई सहायता मिले तो हमला कर सकते हैं. यानी कुर्द हमला पहले कर सकते हैं, ताकि अमेरिका को जमीन पर उतरने की जरूरत ही न पड़े.

वर्तमान स्थिति क्या है और आगे क्या हो सकता है?

अभी मार्च 2026 के आखिर में जंग जारी है. ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं – इजरायल, इराक और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन भेजे. लेकिन ईरान की सेना कमजोर पड़ रही है. कुर्दों की तैयारी अब भी जारी है. अगर कुर्द हमला करते हैं तो ईरान में अंदरूनी लड़ाई तेज हो सकती है.

कुछ एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि ये ईरान को गृहयुद्ध की तरफ ले जा सकता है. कुर्दों को डर है कि अगर US-इजरायल ने उन्हें बीच में छोड़ दिया तो ईरान उन्हें सजा देगा. इराक की सरकार भी चिंतित है क्योंकि कुर्द इराक के इलाके से हमला कर रहे हैं.   

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ये तीन तरफा अटैक की तैयारी ईरान की जंग को नया रूप दे सकती है. कुर्द ईरान पर हमला करके अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन से पहले ही ईरानी सेना को परेशान कर सकते हैं. इजरायल हवा से, अमेरिका हवा और हथियार से, और कुर्द जमीन से – ये प्लान ईरान को घेरने के लिए बनाया गया लगता है. लेकिन लीक, अविश्वास और इलाकाई राजनीति ने इसे जटिल बना दिया है. अभी सबकी नजर कुर्द सीमा पर है. अगर ये हमला हुआ तो मध्य पूर्व की तस्वीर पूरी बदल सकती है.

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