28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 25-28 दिनों में अमेरिकी वायुसेना को काफी नुकसान हुआ है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल मिलाकर 24 अमेरिकी सैन्य विमान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं. इनमें मंहगे फाइटर जेट, टैंकर विमान और ड्रोन शामिल हैं. कुल नुकसान 1 अरब डॉलर यानी लगभग 8,500 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है.
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प्रमुख नुकसान इस प्रकार हैं...
19 मार्च 2026 को एक अमेरिकी F35 फाइटर जेट लाइटनिंग II जेट ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम से टकराया. विमान को काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग कर ली. सुरक्षित बच गया. यह इस युद्ध में F35 फाइटर जेट पर पहला पुष्टि किया गया हमला माना जा रहा है.
3 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट

1 मार्च 2026 को कुवैत के ऊपर तीन F-15E जेट्स कुवैती एयर डिफेंस द्वारा गलती से फ्रेंडली फायर में मार गिराए. छह क्रू मेंबर्स (पायलट) सुरक्षित इजेक्ट होकर बच गए.
6 KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान
12 मार्च 2026 को पश्चिमी इराक में एक KC-135 टैंकर विमान मिड-एयर रिफ्यूलिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें सवार छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. उसी घटना में दूसरा KC-135 क्षतिग्रस्त हो गया. इसके अलावा, सऊदी अरब के एक एयरबेस (PSAB) पर ईरानी मिसाइल हमले में पांच और KC-135 टैंकर क्षतिग्रस्त हुए.
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UH-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर
इराक में एक अमेरिकी एयरबेस पर ईरानी FPV ड्रोन हमले में एक ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुआ.
12 MQ-9 ड्रोन

ईरानी एयर डिफेंस ने युद्ध के दौरान 12 MQ-9 रीपर हमला और जासूसी ड्रोन मार गिराए या नष्ट कर दिए. ये ड्रोन सस्ते माने जाते हैं, लेकिन इनकी कुल कीमत भी कई सौ मिलियन डॉलर है. ज्यादातर ड्रोन ईरानी एंटी-एयरक्राफ्ट फायर से गिराए गए.
अमेरिकी नौसेना का एक नाविक 25 मार्च 2026 को अरब सागर में फ्लाइट ऑपरेशंस के दौरान युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN 72) पर घायल हो गया. यह चोट युद्ध में नहीं लगी है. जानलेवा भी नहीं है. घायल नाविक को बेहतर इलाज के लिए तट पर ले जाया गया है. उसकी हालत स्थिर है.
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ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का मकसद ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइलों, नौसेना और IRGC ठिकानों को नष्ट करना है. अमेरिका का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैकड़ों सुविधाएं तबाह कर दी हैं. ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है.
लेकिन इन नुकसानों से साफ है कि युद्ध की तेज रफ्तार, ईरानी एयर डिफेंस और ऑपरेशनल गलतियों ने अमेरिकी वायुसेना पर दबाव डाला है. पेंटागन और CENTCOM ने कहा है कि ऑपरेशन जारी है. टारगेट हासिल किए जा रहे हैं, लेकिन विमानों की क्षति भविष्य में रखरखाव और रणनीति पर असर डाल सकती है.