अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही जंग के बीच अपने मिडिल ईस्ट के सहयोगियों को 8.6 अरब अमेरिकी डॉलर (81,700 करोड़ भारतीय रुपये) के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है. यह फैसला कांग्रेस की मंजूरी के बिना तेजी से लिया गया क्योंकि अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इमरजेंसी बताया. इस जंग में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए जिससे उनके हथियारों के स्टॉक खत्म हो रहे हैं.
इस पैकेज में इजरायल को एडवांस्ड प्रिसीजन किल वेपन सिस्टम (APKWS) और संबंधित उपकरण लगभग 9,424 करोड़ रुपये में दिए जा रहे हैं. कुवैत को बैटल कमांड सिस्टम लगभग 23,750 करोड़ रुपये में मिलेंगे जो उनकी एयर डिफेंस को बेहतर बनाएंगे.
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कतर को APKWS के साथ पैट्रियट एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को रीस्टॉक करने के लिए लगभग लगभग 47,500 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को APKWS लगभग 1406 करोड़ रुपये में दिए जाएंगे.

ये हथियार ईरान के हमलों से हुई क्षति को पूरा करने के लिए जरूरी हैं. पैट्रियट सिस्टम आने वाले मिसाइलों और रॉकेटों को रोकने में बहुत कारगर है जबकि APKWS साधारण रॉकेटों को सटीक मार करने वाले हथियार में बदल देता है.
US और इजरायल ईरान के साथ अगले स्तर की जंग की तैयारी कर रहे हैं
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुई US-इजरायल और ईरान की जंग में अभी सीजफायर है लेकिन दोनों तरफ तनाव बहुत ज्यादा है. अमेरिका और इजरायल ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमता को खत्म करने और रिजीम चेंज के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं. ईरान ने जवाब में इजरायल, US बेस और खाड़ी देशों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए. अब दोनों पक्ष नई लड़ाई के लिए तैयार हो रहे हैं.
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क्यों महत्वपूर्ण है यह सब?
यह हथियार डील दिखाती है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के साथ शांति नहीं बल्कि मजबूत तैयारी कर रहे हैं. खाड़ी देश भी डर रहे हैं क्योंकि ईरान के हमलों से उनका एयर डिफेंस सिस्टम तनाव में है. पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ी हैं और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.
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अभी सीजफायर है लेकिन बातचीत में प्रगति नहीं हो रही. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं कर रहे और बड़े हमलों की धमकी दे रहे हैं. इजरायल भी ईरान की न्यूक्लियर सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट करने पर जोर दे रहा है. अगर सीजफायर टूटा तो पूरे मध्य पूर्व में बहुत बड़ी जंग छिड़ सकती है जिसमें लाखों लोग प्रभावित होंगे. यह स्थिति दिखाती है कि US और इजरायल मिलकर ईरान को कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं जबकि ईरान अपने सहयोगियों के साथ जवाबी तैयारी में लगा है.