मिडिल ईस्ट में एक के बाद एक ईरान समर्थित समूहों पर हमले हो रहे हैं. पहले हमास को इजरायल ने भारी नुकसान पहुंचाया, फिर हिज्बुल्लाह को लेबनान में कमजोर किया गया. अब हूतियों (Ansar Allah) पर सऊदी अरब और अमेरिका का जोरदार हमला शुरू हो गया है.
हूती यमन की शिया विद्रोही हैं, जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है. 2023-2024 से उन्होंने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू किए. इसका मकसद गाजा युद्ध में फिलिस्तीनियों का समर्थन करना था. इन हमलों से वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई और बीमा लागत बढ़ गई.
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सऊदी अरब, जो यमन में 2015 से हूतियों के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है, अब अमेरिका के साथ मिलकर इन पर निर्णायक हमला करने की तैयारी में है. अमेरिका के लिए लाल सागर की सुरक्षा महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से यूरोप और एशिया का बड़ा व्यापार गुजरता है.

सऊदी-अमेरिका की साझा रणनीति
सऊदी अरब और अमेरिका ने हाल के महीनों में हूतियों के ठिकानों पर हवाई हमले बढ़ा दिए हैं. सऊदी वायुसेना और अमेरिकी नौसेना मिलकर हूतियों की मिसाइल साइटों, ड्रोन फैक्टरियों और बंदरगाहों को निशाना बना रहे हैं. इसका मकसद हूतियों की सैन्य क्षमता को स्थायी रूप से कमजोर करना है.
यह अभियान Axis of Resistance (ईरान समर्थित समूहों का गठबंधन) को तोड़ने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. पहले हमास को गाजा में, फिर हिज्बुल्लाह को लेबनान में कमजोर किया गया. अब हूतियों का नंबर है.
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लाल सागर संकट से भारत, चीन और यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है. जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रूट से जाना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च बढ़ा है.

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था भी पर्यटन और तेल निर्यात पर निर्भर है. हूतियों के हमलों से उसकी सुरक्षा चिंता बढ़ी है. अमेरिका के लिए यह इजरायल की सुरक्षा और क्षेत्र में अपने प्रभाव को बनाए रखने का मुद्दा है.
क्या हूतियों का अंत संभव है?
हूती भू-भागीय रूप से मजबूत हैं. पूर्ण सैन्य जीत मुश्किल है. ऐसे समूहों को केवल सैन्य हमलों से खत्म नहीं किया जा सकता. राजनीतिक समाधान जरूरी है. सऊदी-अमेरिका का हूतियों पर हमला मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदलने की कोशिश है. हमास और हिज्बुल्लाह के बाद हूतियों को कमजोर करना ईरान के प्रभाव को घटाने की रणनीति है. लेकिन लंबे युद्ध से क्षेत्र अस्थिर हो सकता है.