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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान खुद नहीं खोज पा रहा अपने बारूदी सुरंग, अमेरिका का दावा

अमेरिका का दावा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी बिछाई गई बारूदी सुरंगें ढूंढ नहीं पा रहा है और उन्हें हटाने की क्षमता भी नहीं है. इसलिए ईरान समुद्री रास्ते को पूरी तरह नहीं खोल पा रहा है. ट्रंप ने सीजफायर की शर्त रखी है कि होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना होगा. इस मुद्दे पर पाकिस्तान में शांति वार्ता चल रही है.

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समुद्र के अंदर बारूदी सुरंग जहाजों और पनडुब्बियों के लिए मौत होती है. (Photo: US Naval Institute)
समुद्र के अंदर बारूदी सुरंग जहाजों और पनडुब्बियों के लिए मौत होती है. (Photo: US Naval Institute)

ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने में असमर्थ है क्योंकि उसने जो बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाई थीं, उन्हें अब ढूंढ नहीं पा रहा है और उन्हें हटाने की क्षमता भी नहीं है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह मुख्य वजह है कि ईरान ट्रंप प्रशासन की मांग को जल्दी पूरा नहीं कर पा रहा है. अमेरिका चाहता है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से ज्यादा से ज्यादा जहाजों का आवागमन शुरू हो जाए. 

यह समस्या शांति वार्ता के लिए भी मुश्किल पैदा कर रही है. इस सप्ताहांत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरानी वार्ताकारों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के बीच शांति वार्ता हो रही है. दोनों पक्ष युद्ध रोकने और स्थायी शांति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज का मुद्दा बड़ा अड़चन बन गया है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है. दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह बंद हो जाए या जहाजों का आवागमन कम हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. ईरान ने पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में छोटी नावों से इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाईं. 

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इसके साथ ही ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों की धमकी भी दी. नतीजा यह हुआ कि तेल के टैंकर और दूसरे जहाजों का आवागमन लगभग रुक गया. इससे दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बहुत बढ़ गईं. ईरान को युद्ध में यह सबसे बड़ा हथियार मिल गया. ईरान ने कुछ जहाजों को टोल (फीस) देकर एक संकरा रास्ता खुला रखा था, लेकिन पूरा समुद्री रास्ता सुरक्षित नहीं था.

ईरान ने खदानें कैसे बिछाईं और समस्या क्या है?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने समुद्री बारूदी सुरंगें बिना सोचे-समझे और अनियमित तरीके से बिछाईं. कई बारूदी सुरंगों का रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया. जहां रिकॉर्ड था, वहां भी कुछ बारूदी सुरंगें बह गईं या अपनी जगह से हिल गईं. अब ईरान को पता नहीं है कि कितनी बारूदी सुरंगें कहां हैं.

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ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी जारी की है कि जहाज बारूदी सुरंगों से टकरा सकते हैं. उन्होंने कुछ सुरक्षित रास्तों के नक्शे भी जारी किए, लेकिन ये रास्ते बहुत सीमित हैं. खदानें हटाना उनको बिछाने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है. अमेरिका की सेना के पास भी तेजी से बारूदी सुरंगें साफ करने की पूरी क्षमता नहीं है. ईरान के पास तो और भी कम सुविधाएं हैं. 

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ईरान के पास सैकड़ों छोटी नावें हैं जो जहाजों को परेशान कर सकती हैं या नई बारूदी सुरंगें बिछा सकती हैं. अमेरिका ने ईरान की नौसेना के कई जहाज डुबो दिए और नौसैनिक ठिकानों पर हमले किए, लेकिन छोटी नावों को पूरी तरह नष्ट करना असंभव रहा.

Strait of Hormuz Iran Sea Mines

ट्रंप की मांग और ईरान का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दो हफ्ते का सीजफायर तभी संभव है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोल दिया जाए. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा. 

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी सीमाओं का मतलब ही बारूदी सुरंगें ढूंढने और हटाने में ईरान की असमर्थता है. अब इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में यह मुद्दा मुख्य चर्चा का विषय होगा. अमेरिका ज्यादा जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान अपनी तकनीकी समस्याएं बता रहा है.

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यह सब फरवरी-मार्च 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का नतीजा है. ईरान ने युद्ध शुरू होते ही होर्मुज को लगभग बंद कर दिया. इससे पहले ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगर कोई जहाज अंदर आएगा तो उसे आग लगा दी जाएगी. 

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अभी दो हफ्ते का सीजफायर चल रहा है, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. अमेरिका कह रहा है कि ईरान सीजफायर की शर्तें पूरी नहीं कर रहा है. ईरान कह रहा है कि इजरायल लेबनान में हमले जारी रखे हुए है. होर्मुज का मुद्दा सुलझाना आसान नहीं है क्योंकि खदानें बिखरी हुई हैं. दोनों तरफ खदानें साफ करने की क्षमता सीमित है. अगर जल्दी सुरक्षित रास्ता नहीं खुला तो तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं. 

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