scorecardresearch
 

इंडियन नेवी की पनडुब्बियां अब ज्यादा देर पानी के अंदर रह सकेंगी, स्वदेशी AIP सिस्टम हो रहा तैयार

DRDO की स्वदेशी एआईपी प्रणाली का सेटिंग टू वर्क फेज-2 हजीरा में उद्घाटन. यह पनडुब्बी की पानी के अंदर क्षमता बढ़ाएगी. 2027 में कलवारी क्लास पर इंटीग्रेशन की योजना है.

Advertisement
X
2027 में इस नए सिस्टम को पनडुब्बियों में इंटीग्रेट किया जाएगा. (File Photo: Pixabay)
2027 में इस नए सिस्टम को पनडुब्बियों में इंटीग्रेट किया जाएगा. (File Photo: Pixabay)

भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए  डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी एआईपी प्रणाली के एनर्जी मॉड्यूल का ‘सेटिंग टू वर्क फेज-2’ गतिविधि का उद्घाटन हो गया. यह प्रणाली नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला यानी एनएमआरएल और डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई है. 

एआईपी प्रणाली पनडुब्बी को वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करके पानी के अंदर लंबे समय तक रहने की क्षमता बढ़ाती है. 24 अक्टूबर 2026 को गुजरात के हजीरा स्थित लार्सन एंड टुब्रो के एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में यह समारोह हुआ. 

यह भी पढ़ें: रूस से अगले महीने आ सकता है भारत का आखिरी S-400 सिस्टम

रक्षा सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में वर्चुअली जुड़े. भारतीय नौसेना के चीफ ऑफ मैटेरियल्स वाइस एडमिरल बी शिवकुमार और डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल डॉ आर बालमुरलीकृष्णन मौके पर मौजूद रहे.

Indigenous AIP system

एआईपी प्रणाली का महत्व 

पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां पानी के अंदर लंबे समय तक नहीं रह पातीं क्योंकि उन्हें बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आकर हवा से ऑक्सीजन लेनी पड़ती है. इससे दुश्मन की नजर में आने का खतरा बढ़ जाता है. एआईपी प्रणाली इस समस्या का समाधान करती है. यह हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है जो ऑक्सीजन की जरूरत कम करती है. 

Advertisement

इससे पनडुब्बी ज्यादा दिनों तक पानी के अंदर रहकर गश्त कर सकती है. चुपके से हमला बोल सकती है. अपनी सुरक्षा बढ़ा सकती है. यह भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है क्योंकि पहले ऐसी तकनीकें विदेशी स्रोतों पर निर्भर थीं. कलवरी क्लास पनडुब्बियों पर इसे लगाने की योजना है जो स्कॉर्पीन डिजाइन पर आधारित हैं.

यह भी पढ़ें: फिलिपींस एयर फोर्स के दो विमान आसमान में टकराए, चार पायलटों की मौत

समारोह में DRDO अध्यक्ष ने वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और नौसेना के सहयोग की सराहना की. उन्होंने कहा कि हर चरण में परीक्षण और वैलिडेशन में नौसेना का सहयोग महत्वपूर्ण रहा. उन्होंने अगले चरणों पर जोर देते हुए कहा कि हाइड्रोजन और फ्यूल सेल सिस्टम की सख्त सुरक्षा संस्कृति बनाए रखते हुए नौसेना की इंडक्शन समयसीमा पूरी की जाए. 

Indigenous AIP system

अगले चरण में एआईपी एनर्जी मॉड्यूल को पावर उत्पादन के लिए चालू किया जाएगा और भारतीय नौसेना के प्रोटोकॉल के अनुसार कड़ी जांच की जाएगी. इसके बाद इसे माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंपा जाएगा ताकि 2027 की शुरुआत में कलवरी क्लास पनडुब्बी पर इंटीग्रेशन हो सके. लार्सन एंड टुब्रो जैसे उद्योग भागीदारों के साथ यह सहयोग मेक इन इंडिया को मजबूत बनाता है.

रणनीतिक प्रभाव और भविष्य

यह उपलब्धि भारतीय नौसेना की पानी के अंदर युद्ध क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी. हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों के बीच लंबी एंड्योरेंस वाली पनडुब्बियां रणनीतिक बढ़त देंगी. स्वदेशी तकनीक से लागत कम होगी, रखरखाव आसान होगा और विदेशी निर्भरता घटेगी. आगे और पनडुब्बियों पर इसे लगाने तथा निर्यात संभावनाओं पर भी काम हो सकता है. सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए समय पर इंडक्शन सुनिश्चित करना अब मुख्य चुनौती है. यह कदम भारत की रक्षा अनुसंधान और औद्योगिक क्षमता दोनों को दर्शाता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement