भारतीय थल सेना ने नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड से स्वदेशी नागस्त्र-2 एंटी-टैंक लॉइटिरिंग म्यूनिशन प्राप्त कर लिया है. यह सिस्टम अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षणों के बाद सेना को सौंपा गया. लॉइटिरिंग म्यूनिशन आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हथियार है. ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ इसका पुराना वर्जन इस्तेमाल किया गया था.
यह लक्ष्य के ऊपर मंडराता रहता है, सटीक जानकारी इकट्ठा करता है. फिर हमला करता है. नागस्त्र-2 के आने से सेना की टैंक रोधी क्षमता और मजबूत हुई है. कंपनी के पुराने वर्जन पहले से ही सेना में शामिल हैं, इसलिए यह डिलीवरी निरंतरता को भी दर्शाती है.
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नागस्त्र-2 एक फिक्स्ड-विंग लॉइटिरिंग म्यूनिशन है. इसमें दिन और रात दोनों समय काम करने वाले कैमरे लगे हैं, जिससे किसी भी मौसम या अंधेरे में लक्ष्य की पहचान संभव है. इसका 4 किलोग्राम का वॉरहेड 650 मिलीमीटर मोटी कवच को भेदने में सक्षम है. यह क्षमता आधुनिक टैंकों के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है.
सिस्टम की अधिकतम रेंज 50 किलोमीटर तक है. फायर-एंड-फॉरगेट मोड में यह 60 मिनट तक हवा में रह सकता है. फायर-एंड-फॉरगेट का मतलब है कि लॉन्च के बाद ऑपरेटर को लगातार नियंत्रण रखने की जरूरत नहीं पड़ती. इसमें ईसीसीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स सूट भी है, जो जैमिंग का विरोध करता है. दुश्मन अगर सिग्नल जाम करने की कोशिश करे तो भी सिस्टम काम करता रहता है. ये विशेषताएं इसे सीमा क्षेत्रों और संघर्ष क्षेत्रों में बहुत उपयोगी बनाती हैं.

आत्मनिर्भरता और स्वदेशी सामग्री
नागस्त्र-2 में 80 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी है. यह आंकड़ा आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को रेखांकित करता है. पहले कई ऐसे हथियार आयात पर निर्भर थे, जिससे न सिर्फ खर्च बढ़ता था बल्कि आपूर्ति की अनिश्चितता भी रहती थी. अब घरेलू कंपनी द्वारा विकसित और निर्मित सिस्टम सेना को मिल रहा है.
इससे लागत कम होती है, रखरखाव आसान होता है और जरूरत पड़ने पर तेजी से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. नागपुर जैसी जगह पर रक्षा उद्योग का विकास क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है. कंपनी के पहले संस्करणों का सेना में पहले से उपयोग होना इस बात का प्रमाण है कि स्वदेशी तकनीक भरोसेमंद साबित हो रही है.
Solar Defence & Aerospace Ltd delivers indigenously designed Nagastra 2 Anti-Tank Loiter Munition System to the Indian Army Continuing its commitment to developing indigenous loiter munition technologies, Solar Defence & Aerospace Ltd., Nagpur, is delivering its Nagastra 2 Anti-Tank Loiter Munition System to the Indian Army, says the company. Solar Defence & Aerospace Ltd says, "Nagastra 2 is equipped with day-and-night surveillance cameras and a 4 kg tandem shaped-charge warhead, designed to penetrate targets protected by up to 650 mm of Rolled Homogeneous Armour (RHA). The system offers an operational range of 25 km in recover and reuse mode and 50 km in fire-and-forget mode, with an endurance of up to 60 minutes. These capabilities provide operational flexibility for precision engagement of armoured targets. A key technological feature of Nagastra 2 is its Electronic Counter-Countermeasures (ECCM) capability, designed to enhance its resilience in electronically contested battlefield environments. This capability strengthens its potential to operate in the presence of electronic warfare threats, including communication jamming, GPS jamming and spoofing." Photo source: Solar Defence & Aerospace Ltd
— ANI (@ANI) October 23, 2026
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रणनीतिक प्रभाव और भविष्य
लॉइटिरिंग म्यूनिशन आज के युद्ध में ड्रोन और सटीक हमले की भूमिका को बदल रहे हैं. यूक्रेन संघर्ष समेत कई जगहों पर इनके प्रभावी इस्तेमाल ने साबित किया है कि ये सस्ते और घातक दोनों हो सकते हैं. नागस्त्र-2 की 50 किलोमीटर रेंज और लंबे समय तक मंडराने की क्षमता सेना को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों पर दूर से हमला करने का विकल्प देती है.
जैमिंग प्रतिरोधक क्षमता इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में भी प्रभावी बनाए रखती है. कुल मिलाकर यह डिलीवरी भारतीय सेना की आधुनिकीकरण प्रक्रिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है. आगे और उन्नत संस्करण आने की उम्मीद है, जो सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे.