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Jio IPO अप्लाई करने का आज आखिरी दिन! लिस्टिंग पर बेचें या बचाकर रखें? जानें एक्सपर्ट्स की राय

Jio Platforms IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश करने का आज आखिरी मौका है. दूसरे दिन तक यह इश्यू 5.57 गुना सब्सक्राइब हो चुका था और ग्रे मार्केट में करीब 21% लिस्टिंग गेन की संभावना जताई जा रही है. लेकिन क्या सिर्फ लिस्टिंग पर मुनाफा कमाने के लिए पैसा लगाना सही होगा? जानिए एक्सपर्ट की सलाह.

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जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के जरिए 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. (File Photo)
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के जरिए 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. (File Photo)

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे निवेशकों के पास 23 अक्टूबर को अप्लाई करने का आखिरी मौका है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है. दूसरे दिन कारोबार खत्म होने तक यह IPO 5.57 गुना सब्सक्राइब हो चुका था. निवेशक आज शाम 5 बजे तक अपनी एलिजिबल कैटेगरी में अप्लाई कर सकते हैं, जबकि यूपीआई (UPI) के जरिए पेमेंट की मंजूरी देने का समय आज शाम 7 बजे तक है.

23 अक्टूबर को सुबह 9:10 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ को 1,12,20,21,276 शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं, जिनकी कुल कीमत करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये थी. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (QIB) की कैटेगरी 13.29 गुना सब्सक्राइब हुई थी. वहीं, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) कैटेगरी 6.32 गुना सब्सक्राइब हुई थी. रिटेल इंवेस्टर्स की कैटेगरी 1.60 गुना, मौजूदा शेयरधारकों की कैटेगरी 4.21 गुना और रिलायंस कर्मचारियों वाली कैटेगरी 2.15 गुना सब्सक्राइब हुई थी.

जियो प्लेटफॉर्म्स का टारगेट ₹30,213 Cr

जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. कंपनी ने शेयरों का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया है. इस इश्यू में 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जा रहे हैं. निवेशक कम से कम 12 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसके बाद 12 के मल्टीप्लायर में शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं.

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ब्रोकरेज की राय पॉजिटिव, GMP में नरमी

कई ब्रोकरेज फर्मों ने जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है. इसके पीछे कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति, कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं और वैल्यूएशन जैसे पहलुओं को वजह बताया गया है. हालांकि, बाजार में सुस्त माहौल के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में नरमी आई है और लिस्टिंग गेन 21% के आसपास रहने की संभावना है. ध्यान रहे कि GMP अनौपचारिक संकेतक है और इससे आईपीओ की शेयर बाजार में लिस्टिंग पर होने वाले मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती. आईपीओ के अपर प्राइस बैंड 1,119 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट वैल्यूएशन करीब 10.30 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

हालांकि, निवेशकों के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ लिस्टिंग पर मुनाफा कमाने के लिए इस IPO में अप्लाई करना सही है या जियो के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए लंबे समय के लिए निवेश करना बेहतर होगा? सेबी (SEBI) में रजिस्टर्ड इंवेस्टमेंट एडवाइजर और Nyvo Money के फाउंडर हर्ष सोनी का कहना है कि जियो प्लेटफॉर्म के IPO में निवेश का फैसला केवल लिस्टिंग के दिन मिलने वाले संभावित मुनाफे के आधार पर नहीं करना चाहिए. उनके मुताबिक, एक दिन का उछाल किस्मत और बाजार के रुख पर निर्भर हो सकता है, जबकि लंबी अवधि में संपत्ति (Wealth) लगातार बढ़ने वाले कारोबारों में निवेश से बनती है.

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जियो का वित्तीय प्रदर्शन कितना मजबूत?

जियो प्लेटफॉर्म्स भारत की डिजिटल इकोनॉमी में बड़ी हिस्सेदारी रखती है. कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के मुताबिक, उसके कुल ग्राहकों की संख्या 533.3 मिलियन है, जिनमें 284.9 मिलियन यानी करीब 28.49 करोड़ ग्राहक 5G सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. भारत के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 60% है.

Jio Platforms Financial Performance​

कंपनी के वित्तीय आंकड़े भी मजबूत हैं

इन आंकड़ों के मुताबिक, दो वित्तीय वर्षों में कंपनी का रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा है. प्रति ग्राहक औसत मासिक कमाई (ARPU) में भी सुधार हुआ है. इसके अलावा, कंपनी 5G नेटवर्क, होम ब्रॉडबैंड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेवाओं का विस्तार कर रही है. ये क्षेत्र भविष्य में उसकी कमाई बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, निवेशकों को यह भी देखना होगा कि जियो ग्राहकों की संख्या और प्रति ग्राहक कमाई में कितनी बढ़ोतरी कर पाती है, डेटा की खपत से कितना अतिरिक्त रेवेन्यू जुटाती है और आने वाले वर्षों में कर्ज घटाने में कितनी सफल रहती है.

जियो में निवेश से पहले किन जोखिमों को समझें?

जियो की ग्रोथ के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. कंपनी की कमाई बढ़ाने में टैरिफ बढ़ोतरी की भूमिका अहम हो सकती है, लेकिन महंगे प्लान ग्राहकों को दूसरी कंपनियों की ओर जाने के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं. इसके अलावा, दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, नियामकीय बदलाव और नेटवर्क के विस्तार पर होने वाला भारी खर्च भी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है. एक और अहम संकेत पूंजी पर रिटर्न (Return on Capital) का है. कंपनी का यह आंकड़ा FY24 में 12.83% था, जो FY26 में घटकर 10.76% रह गया. इसका मतलब है कि निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी अपने कारोबार में लगाई जा रही पूंजी से कितनी कुशलता से कमाई कर पा रही है.

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IPO में निवेश लंबी अवधि में कितना फायदेमंद?

जियो प्लेटफॉर्म्स भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार का फायदा उठाने वाली बड़ी कंपनियों में शामिल है. इंवेस्टमेंट एडवाइजर हर्ष सोनी का मानना है कि भारत की आर्थिक और डिजिटल ग्रोथ पर भरोसा रखने वाले निवेशक जियो प्लेटफॉर्म्स को लंबे समय के निवेश के विकल्प के रूप में देख सकते हैं. यानी अगर जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अलॉट होता है तो शेयरों लिस्टिंग गेन के लिए बेचने की बजाय लंबी अवधि के लिए अपने पोर्टफोलिया का हिस्सा बनाए रखना फायदेमंद साबित हो सकता है.

हालांकि, उन्होंने यह भी सलाह दी कि निवेश से पहले आईपीओ के दस्तावेज पढ़ें, वैल्यूएशन को समझें और अपनी वित्तीय जरूरतों के मुताबिक फैसला करें. लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों को केवल वही पैसा लगाना चाहिए, जिसकी जरूरत अगले पांच से दस साल तक न पड़े. जरूरत के मुताबिक किसी वित्तीय सलाहकार से राय लेना भी उपयोगी हो सकता है.

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