भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यूरोप का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है. पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 38,424 करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा सामान का निर्यात किया. यह उपलब्धि मुख्य रूप से यूरोप की बढ़ती मांग से जुड़ी है. रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सेनाओं को मजबूत करने की होड़ शुरू कर दी.
गोला-बारूद, तोपखाने और विस्फोटक पदार्थों की जरूरत अचानक बहुत बढ़ गई. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और यूरोपीय खरीदारों को गोले, मोर्टार और विस्फोटक पदार्थों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति शुरू कर दी. इन वस्तुओं की खेप में 1,600 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी हुई है.
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यूरोपीय संघ ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने का फैसला लिया है. कई यूरोपीय देशों के पास पुराने स्टॉक खत्म हो गए थे और नए उत्पादन में समय लग रहा था. ऐसे में भारत जैसे देश ने तेज आपूर्ति की क्षमता दिखाई. भारत के रक्षा उद्योग ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाई है.
सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर गोला-बारूद और तोपखाने के सिस्टम बना रही हैं. इससे न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं बल्कि निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल में कहा कि आगे और ज्यादा संयुक्त उद्यम बनाए जाएंगे. इससे तकनीक साझा होगी और उत्पादन और बढ़ेगा.
भारत अब सिर्फ छोटे हथियार नहीं बल्कि तोपखाने के सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरण भी निर्यात कर रहा है. ये सामान 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं. यूरोप के अलावा अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों में भी भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ रही है. यह बदलाव भारत की छवि को हथियार आयातक से निर्यातक देश के रूप में बदल रहा है.
‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है. पहले भारत ज्यादातर हथियार विदेश से खरीदता था, लेकिन अब घरेलू कंपनियां आधुनिक हथियार बनाने में सक्षम हो रही हैं. कई निजी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में निवेश किया है. इससे रोजगार बढ़े हैं और विदेशी मुद्रा भी कमाई जा रही है. यूरोप की मांग ने भारतीय कंपनियों को बड़े ऑर्डर दिए हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और बेहतर हुई है.
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हालांकि चुनौतियां भी हैं. गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना, डिलीवरी समय पर करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना जरूरी है. अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे पारंपरिक हथियार निर्यातक देशों के मुकाबले भारत को अपनी जगह और मजबूत करनी होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत संयुक्त उद्यमों पर जोर देता रहा और नई तकनीक अपनाता रहा तो आने वाले सालों में निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है.
इस पूरे विकास से साफ है कि भू-राजनीतिक तनावों ने भारत के लिए नए मौके खोले हैं. यूक्रेन युद्ध ने यूरोप को हथियारों की जरूरत बढ़ा दी और भारत ने अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल किया. अब भारत रक्षा निर्यात में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह उपलब्धि न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है.