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समंदर और आसमान में मचेगा तहलका! DRDO ने 1200 सेकंड तक स्क्रैमजेट इंजन का किया सफल परीक्षण, रक्षा मंत्री बोले- ये तो बस शुरुआत है

DRDO की DRDL लैब ने हाइपरसोनिक मिसाइल विकास में बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर का 1200 सेकंड से ज्यादा लंबा सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण हैदराबाद स्थित SCPT सुविधा में हुआ. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के लिए मजबूत आधार बताया.

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DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में लंबी अवधि के स्क्रैमजेट परीक्षण से बड़ी उपलब्धि हासिल की (Photo: ITG)
DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में लंबी अवधि के स्क्रैमजेट परीक्षण से बड़ी उपलब्धि हासिल की (Photo: ITG)

भारत ने एक बेहद महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. भारत ने एक बेहद तेज गति वाली मिसाइल के इंजन का परीक्षण किया है. इस इंजन को स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर कहते हैं. ये इंजन इतना तेज है कि आवाज से भी तेज गति से चल सकता है. परीक्षण हैदराबाद में हुआ. 

इंजन ने 1,200 सेकंड यानी 20 मिनट से भी ज्यादा समय तक काम किया. ये एक रिकॉर्ड है. भारत के DRDO ने ये तकनीक अपने आप बनाई है. इसका मतलब है कि भारत अब हाइपरसोनिक मिसाइल बना सकता है. ये मिसाइलें इतनी तेज होती हैं कि दुश्मन उन्हें रोक नहीं पाएगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी की सराहना की.

भारत के DRDO ने हैदराबाद में एक खास सुविधा बनाई है जिसे SCPT सुविधा कहते हैं. SCPT का मतलब है स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप परीक्षण सुविधा. इसमें स्क्रैमजेट इंजन का परीक्षण किया जाता है.

शनिवार को इस सुविधा में एक बड़ा परीक्षण किया गया. स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर को 1,200 सेकंड तक चलाया गया. 1,200 सेकंड यानी 20 मिनट. ये बेहद लंबा समय है. इससे पहले जनवरी में 700 सेकंड तक का परीक्षण हुआ था. अब दोगुनी से भी ज्यादा समय के लिए इंजन सफलतापूर्वक चला.

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इसमें क्या तकनीकें थीं?

इस स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर में कई खास तकनीकें हैं. पहली, इसमें तरल हाइड्रोकार्बन ऊष्माशोषी ईंधन इस्तेमाल किया गया. यह एक खास तरह का ईंधन है जो भारत ने खुद बनाया है.

दूसरी, इसमें उच्च तापमान तापीय अवरोधक कोटिंग लगाया गया. ये एक सुरक्षा परत है जो इंजन को अत्यधिक गर्मी से बचाती है. तीसरी, उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाएं यानी अत्याधुनिक बनाने की तकनीकें इस्तेमाल की गईं.

ये तकनीक भारत ने कहां से ली?

ये सब तकनीकें भारत ने अपने आप बनाई हैं. DRDO की प्रयोगशाला DRDL ने इंजन डिजाइन किया. भारत की अलग-अलग इंडस्ट्रीज ने इसे बनाया. भारत के विश्वविद्यालयों ने भी मदद दी. ये सब मिलकर एक भारतीय तकनीक बन गई.

इसका मतलब क्या है?

इसका मतलब है कि भारत अब एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बना सकता है. क्रूज मिसाइल एक विशेष तरह की मिसाइल है जो जमीन के बहुत पास चलती है और दुश्मन के राडार से बच जाती है. भारत की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेहद खतरनाक हो सकती है.

यह भी पढ़ें: अब बम गिरेगा नहीं, हवा में 'तैरकर' करेगा दुश्मन का काम तमाम, DRDO का टेस्ट सफल

रक्षा मंत्री ने क्या कहा?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, इंडस्ट्री पार्टनर्स और विश्वविद्यालयों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि ये एक बेहद महत्वपूर्ण कामयाबी है. उन्होंने कहा कि ये हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए एक बेहद मजबूत नींव है.

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DRDO के अध्यक्ष ने क्या कहा?

DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस परीक्षण की सफलता की बधाई दी. उन्होंने सभी टीम के सदस्यों को बधाई दी जिन्होंने इस परीक्षण में काम किया.

भारत की सेना के लिए इसका क्या फायदा है?

अगर भारत एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बना ले तो भारतीय सेना को एक बेहद शक्तिशाली हथियार मिल जाएगा. ये मिसाइल दुश्मन के देश में घुसकर लक्ष्य को मार सकती है और दुश्मन की रक्षा व्यवस्था इसे रोक नहीं सकती.

दुनिया में कितने देश इस तकनीक को रखते हैं?

दुनिया में सिर्फ कुछ गिने-चुने देश ही हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक रखते हैं. अमेरिका, रूस, चीन जैसे बड़े देश इस तकनीक को रखते हैं. अब भारत भी इस क्लब में शामिल हो गया है.

हाइपरसोनिक मिसाइल क्या है?

हाइपरसोनिक का मतलब है बहुत ज्यादा तेज. एक हाइपरसोनिक मिसाइल वो होती है जो आवाज से 5 गुना ज्यादा तेज चल सकती है. आवाज की गति 340 मीटर प्रति सेकंड होती है. हाइपरसोनिक मिसाइल 1700 मीटर प्रति सेकंड या इससे भी ज्यादा तेज चल सकती है.

इतनी तेज गति से मिसाइल चले तो दुश्मन की रक्षा व्यवस्था उसे रोक नहीं सकती. ये अत्यधिक खतरनाक हथियार है.

स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर इंजन क्या है?

स्क्रैमजेट का मतलब है सुपरसोनिक रैमजेट. ये एक विशेष तरह का इंजन है जो बहुत ज्यादा ऊंचाई और बहुत ज्यादा गति पर काम कर सकता है. आमतौर पर हवाई जहाजों में जेट इंजन लगते हैं. लेकिन स्क्रैमजेट अलग तरह का है. ये इंजन हवा को अंदर ले जाता है, उसे तेजी से गर्म करता है, फिर उससे ताकत पैदा करता है. ये इंजन इतनी गति तक जा सकता है जहाँ सामान्य इंजन काम नहीं कर सकते.

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