त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ की मौत की पहेली अब भी अनसुलझी है. डीजीपी ने पुलिस हेडक्वार्टर में खुदकुशी की थी, तो खुदकुशी की वजह क्या थी? कोई सुसाइड नोट अब तक क्यों नहीं मिला? घरवाले क्यों ये दावा कर रहे हैं कि वो कभी खुदकुशी कर ही नहीं सकते. और अगर मौत के पीछे की साजिश कुछ और है तो फिर वो क्या है? ये मामला इसलिए और भी रहस्यमी हो गया है, क्योंकि त्रिपुरा सरकार या पुलिस डीजीपी की मौत पर अब तक ख़ामोश है.
त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ यूपी के बागपत के बिहारीगढ़ के रहने वाले थे. उनके भाई बड़ौत में रहते हैं. पोस्टमॉर्टम के बाद अनुराग धनकड़ का शव उनके पैतृक गांव लाया गया. अनुराग धनखड़ के शव के साथ त्रिपुरा पुलिस के आला अफसर भी बड़ौत पहुंचे थे. इसके अलावा यूपी सरकार की तरफ से भी यूपी पुलिस के आला अफसर यहां आए थे. इन सब की मौजूदगी में बड़ौत मे ही राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.
इस मौके पर अनुराग धनखड़ के भाई ने कहा कि जिन हालात में उनके भाई की मौत हुई है उसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि अनुराग धनखड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत से बड़े घोटालों की भी जांच की थी. उस एंगल से भी मामले की जांच होनी चाहिए.
उधर, इस बीच त्रिपुरा पुलिस ने डीजीपी की रहस्यमयी मौत के मामले की जांच शुरु कर दी है. अगरतला में मौजूद त्रिपुरा पुलिस हेडक्वार्टर में जहां से डीजीपी की लाश बरामद हुई थी, उनके उस दफ्तर के फॉरेंसिक नमूने लिए गए. साथ ही अनुराग धनखड़ के मोबाइल, लैपटॉप को भी पुलिस खंगाल कर मौत की असली वजह जानने की कोशिश कर रही है.
18 जुलाई को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में त्रिपुरा पुलिस के 92वें बैच की पासिंग आउट परेड थी. जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री और त्रिपुरा पुलिस के सबसे बड़े अफ़सर यानि राज्य के डीजीपी अनुराग धनखड़ भी मौजूद थे. उस मौके पर डीजीपी अनुराग धनखड़ ने नए-नए रंगरूटों को संबोधित भी किया था. उनकी तस्वीरें देखकर कहीं से भी कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि बतौर डीजीपी अनुराग धनखड़ की ये आखिरी पासिंग आउट परेड साबित होगी. उस पासिंग आउट परेड के सिर्फ 48 घंटे बाद वो हुआ जो इससे पहले देश में कभी नहीं हुआ था.
20 जुलाई 2026, सुबह 10:30 बजे
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में त्रिपुरा पुलिस के हेडक्वार्टर की पहली मंजिल पर राज्य के डीजीपी का दफ्तर है. रोज़ाना की तरह सुबह करीब साढ़े 10 बजे अनुराग धनखड़ अपनी सरकारी गाड़ी में दफ्तर पहुंचते हैं. अमूमन दफ्तर आने के बाद डीजीपी पुलिस हेडक्वार्टर में मौजूद सीनियर पुलिस अफसरों के साथ सुबह की मीटिंग करते हैं. लेकिन सोमवार को अपने दफ्तर में दाखिल होने से पहले उन्होंने वहां मौजूद गार्ड और अपने पीएसओ यानि पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर को हिदायत दी कि उन्हें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा. वो कुछ ज़रूरी काम में बिजी हैं. इसके बाद वो अपने दफ्तर में दाखिल हो गए.
20 जुलाई 2026, दोपहर के 12 बजे
दफ़्तर में दाखिल हुए डीजीपी अनुराग धनखड़ को अब करीब डेढ़ घंटे हो चुके थे. गार्ड और पीएसओ को वो पहले ही आगाह कर चुके थे कि कोई उन्हें डिस्टर्ब ना करे. लेकिन हैरानी की बात ये थी कि इस दौरान उन्हें लैंडलाइन नंबर पर भी जो फोन आ रहे थे वो डीजीपी पिक नहीं कर रहे थे. अमूमन ऐसा होता नहीं था. डेढ़ घंटे तक उन्होंने किसी को बुलाया भी नहीं. कई सीनियर अफसर भी उन्हें कॉल कर रहे थे. पर वो किसी का मोबाइल पर भी कॉल नहीं उठा रहे थे. तब पहली बार सिक्योरिटी गार्ड और पीएसओ को कुछ अजीब लगा. उन्होंने डीजीपी साहब के कमरे में जाने का फैसला किया.
लेकिन तब वो और हैरान रह गए जब धक्का देने पर भी दरवाजा नहीं खुला. दरअसल, दरवाजा अंदर से बंद था और ऐसा पहली बार हुआ था. पिछले 10 महीने से जब से अनुराग धनखड़ डीजीपी बने थे, कभी अंदर से उनका दरवाजा बंद नहीं हुआ था. जब आवाज देने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस हेडक्वार्टर में हड़कंप मच गया. फौरन आला अफसरों को इत्तेला दी गई. इसके बाद वो भी डीजीपी के कमरे के बाहर इकट्ठा हो गए.
मगर जब तमाम कोशिशों के बावजूद अंदर से कोई रिस्पॉंस नहीं मिला, ना दरवाजा खुला. तब ये तय किया गया कि डीजीपी साहब के कमरे का दरवाजा तोड़ दिया जाए. इसके बाद दरवाजा तोड़ दिया गया. पर कमरे में दाखिल होने वाले लोग हैरान थे. डीजीपी साहब अपनी कुर्सी पर नहीं थे. पूरा दफ्तर खंगालने के बाद जब एक पुलिस अफसर उनके ऑफिस के अंदर ही वॉशरूम में झांकता है, तो सन्न रह जाता है. अंदर वॉशरूम में डीजीपी अनुराग धनखड़ की लाश फंदे से झूल रही थी.
ये देश का पहला ऐसा मामला है, जब एक राज्य के डीजीपी यानि सबसे बड़े पुलिस अफसर की लाश पुलिस हेडक्वार्टर के अंदर उन्हीं के दफ्तर में यूं फंदे से झूलती मिली. अमूमन ऐसे आम केस में आम लोग लाश को फंदे से उतारने से पहले पुलिस को फ़ोन करते हैं. लेकिन यहां अजीब सीन था. खुद पुलिस हेडक्वार्टर के अंदर डीजीपी की लाश फंदे से झूल रही थी और राज्य के ज्यादातर सीनियर पुलिस अफसर उस वक्त उसी पुलिस हेडक्वार्टर में मौजूद थे.
लिहाजा, पुलिसवालों की मौजूदगी में ही आनन-फानन में डीजीपी की लाश फंदे से नीचे उतारी गई और फिर फौरन पुलिसवाले एंबुलेंस के साथ नजदीक के सरकारी अस्पताल गोविंद बल्लभ हॉस्पिटल पहुंचते हैं. अस्पातल में जैसे ही डॉक्टरों को पता चलता है कि इस वक्त सीरियस हालत में किसी और को नहीं बल्कि त्रिपुरा के डीजीपी को लाया गया है. पूरा अस्पताल हरकत में आ जाता है.
अस्पताल में लाते ही डॉक्टर उन्हें सीपीआर देना शुरु कर देते हैं. सीपीआर यानि सीने पर हाथों से दबाव डालकर सांस को वापस लाने की कोशिश. अस्पताल के डॉक्टर डीजीपी को वही सीपीआर देने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन काफी कोशिश के बाद भी डीजीपी की सांसें नहीं लौटीं. इसके बाद दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर डॉक्टरों ने डीजीपी को मुर्दा करार दे दिया.
इससे पहले दोपहर को जब डीजीपी की मौत की खबर पुलिस हेडक्वार्टर से बाहर आई तब कुछ देर तक ये अफवाह उड़ी कि उन्होंने खुद को गोली मार ली है. लेकिन डीजीपी साहब के शरीर पर गोली या ज़ख़्म के कोई निशान नहीं मिले. बाकी मौत की असली वजह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता ही देगी.
अब सबसे बड़ा सवाल ये कि अगर सचमुच डीजीपी अनुराग धनखड़ ने खुदकुशी ही की है तो उसकी वजह क्या है. राज्य का सबसे बड़ा पुलिस अफसर पुलिस हेडक्वार्टर जाकर अपने ही दफ्तर के अंदर खुदकुशी क्यों करेगा? हालांकि शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक कोई सुसाइड नोट सामने नहीं आया. अगर ऐसा कोई सुसाइड नोट है तो हो सकता है बाद में सामने आए. ये भी मुमकिन है कि फिलहाल सुसाइड नोट का सच त्रिपुरा पुलिस ने छुपा रखा हो.
1994 बैच के आईपीएस अफसर अनुराग धनखड़ पिछले साल मई में ही त्रिपुरा के डीजीपी बने थे. बतौर डीजीपी उनका कार्यकाल पिछले महीने जून में खत्म हो चुका था. लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें एक्सटेंशन दे दिया था. अनुराग धनखड़ के परिवार में पत्नी और एक बेटा है. बेटा कनाडा में रहता है.
शुरुआती तफ्तीश के बाद जो खबर सामने आ रही है वो ये कि अनुराग धनखड़ और उनकी पत्नी के बीच बनती नहीं थी. दोनों में अक्सर झगड़ा हुआ करता था. सूत्रों के मुताबिक रविवार रात भी पति पत्नी में झगड़ा हुआ था. इसके बाद सुबह डीजीपी घर से सीधे पुलिस हेडक्वार्टर पहुंचे और उसके बाद फंदे से झूलती उनकी लाश मिली.
अनुराग धनखड़ एक बेहद ईमानदार पुलिस अफसर माने जाते थे. पूरे करियर में उनकी छवि बेदाग रही है. करीब तीन दशक के अपने कार्यकाल में वह त्रिपुरा पुलिस के अलावा डेपुटेशन पर बीएसएफ़, सीआईएसएफ, यूएन पीस कीपिंग फोर्स के साथ-साथ सीबीआई में भी काम कर चुके थे. धनखड़ सीबीआई में रहते हुए उस जांच टीम का हिस्सा थे, जिसने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की जांच की थी. जिसमें नीरव मोदी मुख्य आरोपी था. इसके अलावा 1984 के सिख दंगों की जांच में भी वो शामिल रहे थे. त्रिपुरा के डीजीपी बनने से पहले वो स्टेट इंटेलिजेंस के हेड हुआ करते थे.