पंजाब के अमृतसर और गुरदासपुर से लगी बॉर्डर बेल्ट में पिछले कुछ महीनों के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. एक के बाद एक ऐसे कई मामले सामने आए हैं. अब इन मामलों में अलग-अलग जांच की जा रही है. सबसे बड़ी बात ये है कि इनमें से एक घटना के पीछे सरहद पार की साजिश भी नजर आती है.
इस सिलसिले की शुरूआत फरवरी 2026 में हुई, जब गुरदासपुर के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास एक पुलिस चेकपोस्ट पर ASI गुरनाम सिंह और होमगार्ड जवान अशोक कुमार की हत्या कर दी गई थी. इसके बाद मई में अमृतसर के पास ASI जोगा सिंह की गोली मारकर हत्या हुई. सितंबर में ASI जसवंत सिंह पर फायरिंग और फिर ASI हरजीत सिंह की हत्या की घटनाएं सामने आईं. हालांकि, इन सभी मामलों का कारण एक जैसा साबित नहीं हुआ है और अलग-अलग मामलों में अलग-अलग एंगल की जांच हुई है.
22 फरवरी 2026
गुरदासपुर जिले के अढियां गांव में भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब दो किलोमीटर दूर एक चेकपोस्ट पर पंजाब पुलिस के ASI गुरनाम सिंह और होमगार्ड जवान अशोक कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. दोनों ड्यूटी पर तैनात थे और घटना रात के समय हुई थी. यह इलाका भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है.
इस दोहरे हत्याकांड की जांच के बाद पंजाब पुलिस ने दावा किया कि इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स का हाथ था. पुलिस के मुताबिक तीन आरोपियों ने कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर हमला किया था और इसके लिए उन्हें पैसे देने की बात सामने आई. जांच में एक आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, जबकि दूसरे को गिरफ्तार किया गया और तीसरा आरोपी फरार बताया गया था.
इस मामले में पुलिस ने बाद में आरोपियों के खिलाफ UAPA के तहत भी कार्रवाई की. हालांकि, मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आए तथ्यों को अलग-अलग चरणों में जांचा गया है. जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में इस केस से जुड़े एक व्यक्ति को लेकर पुलिस की ओर से अदालत में अलग रुख सामने आने की बात भी सामने आई थी. इसलिए इस मामले में पुलिस के दावों और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है.
मार्च 2026
अमृतसर में पंजाब पुलिस के कांस्टेबल जगजीत सिंह की हत्या हुई थी. 7 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक जगदेव कलां गांव में पुराने विवाद के चलते हथियारबंद लोगों ने उनके घर में घुसकर हमला किया था. जगजीत सिंह उस समय 4 IRB में तैनात थे और छुट्टी पर अपने घर आए हुए थे. पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
इस मामले को बॉर्डर पर सक्रिय किसी पाकिस्तान-आधारित मॉड्यूल से जोड़ने की पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. उपलब्ध रिपोर्ट में हत्या की वजह पुरानी रंजिश बताई गई है. इसलिए अमृतसर-गुरदासपुर क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर हुए सभी हमलों को एक ही नेटवर्क या एक ही साजिश का हिस्सा मानना तथ्यों से आगे जाना होगा. अलग-अलग मामलों की जांच में सामने आए कारणों को अलग रखना जरूरी है.
24 मई 2026
अमृतसर जिले के मजीठा इलाके में पंजाब पुलिस के ASI जोगा सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. जोगा सिंह पंजाब पुलिस के ट्रैफिक विंग में तैनात थे और स्कूटर से ड्यूटी के लिए अमृतसर जा रहे थे. हमजा गांव के पास फतेहगढ़ चूड़ियां-मजीठा रोड पर बाइक सवार दो हमलावरों ने उन्हें रोका और गोली मार दी. अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
शुरुआत में पुलिस ने व्यक्तिगत दुश्मनी, रोड रेज और लक्षित हमले समेत कई एंगल से जांच की थी. परिवार की ओर से भी किसी पुरानी दुश्मनी या धमकी की जानकारी से इनकार किया गया था. बाद में एक संगठन, जिसे मीडिया रिपोर्टों में तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) के नाम से बताया गया, ने इस हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया और कथित तौर पर घटना का वीडियो भी जारी किया. पुलिस ने इस मामले में आतंकी एंगल की भी जांच की.
इस मामले में TTH की ओर से जिम्मेदारी का दावा सामने आया था, जबकि सुरक्षा एजेंसियां उसके वास्तविक नेटवर्क और संभावित कनेक्शन की जांच कर रही थीं. यानी जोगा सिंह की हत्या में आतंकी या लक्षित हमले का एंगल जरूर सामने आया, लेकिन इसे फरवरी के गुरदासपुर हत्याकांड के समान साबित करने के लिए अलग से ठोस जांच निष्कर्ष जरूरी हैं.
11 सितंबर 2026
अमृतसर के अजनाला इलाके में ASI जसवंत सिंह पर बाइक सवार दो युवकों ने गोली चला दी. घटना भल्ला गांव के पास हुई, जो भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीकी संवेदनशील इलाकों में आता है. गोली ASI की पगड़ी में लगी और वह इस हमले में बच गए. घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू की और मामले की जांच तेज की.
इस हमले के बाद एक कथित संगठन ने घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया और ASI जसवंत सिंह को दोबारा निशाना बनाने की धमकी देने की बात भी सामने आई. हालांकि, उस संगठन की वास्तविक पहचान और उसके किसी बड़े आतंकी नेटवर्क से संबंध को लेकर जांच जारी रही. इसलिए इस मामले में भी किसी विदेशी खुफिया एजेंसी की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा.
18 सितंबर 2026
अमृतसर में पंजाब पुलिस के ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. रिपोर्टों के मुताबिक वह PCR ड्यूटी पर तैनात थे और रात करीब दो से तीन बजे के बीच भकतांवाला ग्रेन मार्केट इलाके से गुजर रहे थे. इसी दौरान बाइक सवार दो हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया और गोली मारकर फरार हो गए. हरजीत सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पुलिस ने घटना के बाद आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान की कोशिश की जा रही है. शुरुआती रिपोर्ट में हमलावरों की संख्या दो और उनके बाइक पर आने की बात सामने आई है. अभी उपलब्ध रिपोर्टों में हरजीत सिंह की हत्या के पीछे किसी पाकिस्तान-आधारित संगठन या ISI की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए इस हत्या को फिलहाल एक गंभीर लक्षित हमला मानकर जांच किए जाने की बात ही पुष्ट रूप से कही जा सकती है.
किसी बड़े नेटवर्क के निशाने पर हैं पुलिसकर्मी?
पिछले सात महीनों की घटनाओं को देखें तो गुरदासपुर बॉर्डर चेकपोस्ट हत्याकांड में पंजाब पुलिस ने ISI हैंडलर्स के शामिल होने का दावा किया था. वहीं ASI जोगा सिंह की हत्या में बाद में एक कथित आतंकी संगठन की जिम्मेदारी का दावा सामने आया और ASI जसवंत सिंह पर हमले के बाद भी एक संगठन के दावे की खबर आई. दूसरी ओर कांस्टेबल जगजीत सिंह की हत्या में पुरानी रंजिश का एंगल सामने आया, जबकि ASI हरजीत सिंह की हत्या का मकसद अभी जांच का विषय है.
इन घटनाओं में एक समान बात यह है कि कई मामलों में पुलिसकर्मियों को रास्ते में या ड्यूटी से जुड़े समय पर निशाना बनाया गया और बाइक सवार हमलावरों का इस्तेमाल हुआ. लेकिन सिर्फ इस समानता के आधार पर सभी वारदातों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की साजिश बताना अभी उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता. फिलहाल, सबसे साफ ISI लिंक फरवरी के गुरदासपुर डबल मर्डर केस में पंजाब पुलिस की जांच के दावे के रूप में सामने आया है, जबकि बाकी मामलों में जांच के नतीजे अलग-अलग स्तर पर हैं.
क्यों महत्वपूर्ण है बॉर्डर बेल्ट?
अमृतसर और गुरदासपुर से लगे पंजाब के सीमावर्ती इलाके सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं. इन क्षेत्रों में पुलिस, BSF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पार से ड्रोन, हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है. हाल के वर्षों में पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां सीमा पार से संचालित आपराधिक और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करती रही हैं. ऐसे में पुलिसकर्मियों पर होने वाले लक्षित हमलों की जांच में स्थानीय अपराध, गैंग नेटवर्क और सीमा पार कनेक्शन आदि सभी पहलुओं को देखा जाता है.
फिलहाल, अमृतसर-गुरदासपुर बेल्ट में सामने आए इन मामलों की जांच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा सवाल जरूर खड़ा करती है कि क्या पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने के लिए अलग-अलग मॉड्यूल सक्रिय हैं. लेकिन उपलब्ध पुष्ट तथ्यों के आधार पर अभी इतना ही कहा जा सकता है कि एक मामले में पंजाब पुलिस ने ISI हैंडलर्स की भूमिका का दावा किया है, जबकि अन्य मामलों में आतंकी, व्यक्तिगत दुश्मनी और आपराधिक साजिश समेत अलग-अलग एंगल जांच के दायरे में रहे हैं.