भारत के खिलाफ कथित साजिश के मामले में गिरफ्तार कुछ विदेशी नागरिकों को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की अदालत में बड़ा दावा किया है. NIA के मुताबिक, इस साल मार्च में गिरफ्तार किए गए कुछ विदेशी नागरिकों का कनेक्शन म्यांमार में हुए एक ड्रोन हमले से हो सकता है. जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि उसे इस मामले में कुछ यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिकों की भूमिका से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी मिली है. इसी आधार पर एजेंसी आगे की पूछताछ और जांच को आगे बढ़ा रही है.
NIA ने अपनी अर्जी में कहा है कि केंद्र सरकार को ऐसी विश्वसनीय सूचना मिली है, जिसमें कुछ यूक्रेन और यूएस नागरिकों के म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले में शामिल होने की बात सामने आई है. एजेंसी के मुताबिक, इसी सिलसिले में 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर टूरिस्ट वीजा पर भारत पहुंचे थे. इसके बाद वे गुवाहाटी गए और वहां से मिजोरम की ओर रवाना हुए. NIA का दावा है कि मिजोरम जाने के लिए उनके पास जरूरी प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (RAP) या संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) नहीं था.
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन विदेशी नागरिकों ने इसके बाद कथित तौर पर अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया. NIA का कहना है कि उनका उद्देश्य पहले से तय ड्रोन वॉरफेयर और ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग में शामिल होना था. इसके अलावा उन्हें ड्रोन असेंबली और ड्रोन को जाम करने वाली जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देने की बात भी सामने आई है. एजेंसी के अनुसार, यह प्रशिक्षण म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूह (EAGs) के लिए था, जो म्यांमार की सैन्य जुंटा के खिलाफ सक्रिय हैं.
NIA ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से डेटा निकाला गया है. इस डेटा की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य और सामग्री सामने आई, जिन्हें जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसमें तस्वीरें, वीडियो और वॉयस सैंपल समेत दूसरी डिजिटल सामग्री शामिल है. NIA के मुताबिक, इन सबूतों को गिरफ्तार आरोपियों के सामने रखकर उनसे पूछताछ करना जरूरी है, ताकि इनकी पुष्टि और आपस में मिलान किया जा सके.
इसी आधार पर NIA ने दिल्ली की अदालत से जेल में बंद दो आरोपियों से पूछताछ की अनुमति मांगी थी. जांच एजेंसी का कहना था कि आरोपियों से सीधे पूछताछ किए बिना जब्त डिजिटल सामग्री में सामने आए तथ्यों को पूरी तरह से सत्यापित करना मुश्किल होगा. NIA इस पूछताछ के जरिए मामले की कड़ियों को जोड़ना चाहती है. एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि इससे जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.
अदालत ने NIA की अर्जी पर विचार करते हुए दोनों आरोपियों से जेल में पूछताछ की अनुमति दे दी. कोर्ट ने कहा कि यह स्वीकार की गई स्थिति है कि NIA संबंधित आरोपियों के खिलाफ जांच कर रही है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा कोई विशेष कानून या फैसला उसके सामने नहीं है, जिसके आधार पर NIA को आरोपियों से पूछताछ करने से रोका जा सके. कोर्ट ने साफ कर दिया कि आम तौर पर अदालतों को जांच की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
NIA की अर्जी देर से दाखिल किए जाने के पहलू पर भी अदालत ने टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि अर्जी दाखिल करने में हुई देरी के पीछे NIA की ओर से कोई साफ कानूनी या तथ्यात्मक कारण नहीं दिया गया है. हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि अगर जांच एजेंसी को लगता है कि जांच के मौजूदा चरण में आरोपियों से पूछताछ करना जरूरी है, तो वह ऐसा कर सकती है. अदालत को NIA के आवेदन के समय को लेकर संदेह करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं मिला.
इस मामले में NIA की जांच का फोकस भारत में गिरफ्तार विदेशी नागरिकों, म्यांमार में उनकी कथित गतिविधियों और ड्रोन से जुड़े प्रशिक्षण के बीच संभावित कनेक्शन पर है. जब्त किए गए मोबाइल फोन और दूसरे डिवाइस से मिली तस्वीरों, वीडियो और वॉयस सैंपल की जांच को अहम माना जा रहा है. अब जेल में आरोपियों से होने वाली पूछताछ के दौरान इन डिजिटल सबूतों को उनके सामने रखा जाएगा. हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के न्यायिक परीक्षण के बाद ही होगी.