दिल्ली में CBI की फर्जी रेड डालकर लोगों को डराने और उनसे पैसे ऐंठने वाले जिस गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. उसमें दो महिलाओं की खास भूमिका सामने आई है. जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इन दोनों महिला की पहचान 29 साल की आसिफा और 27 साल की पूजा अग्रवाल के तौर पर हुई है. उन दोनों के अलावा इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस साजिश के पीछे आसिफा और पूजा को ही मास्टरमाइंड बताया जा रहा है.
पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने जल्दी पैसा कमाने के इरादे से यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया था. गिरोह के सदस्य खुद को CBI और ED अधिकारी बताकर लोगों के घर पहुंचते और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में लेते थे. चलिए जान लेते हैं आसिफा और पूजा की कहानी.
आसिफा और पूजा की जोड़ी
जम्मू-कश्मीर की रहने वाली आसिफा पहले एक होटल मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी है. नौकरी के दौरान उसका पुलिस और सेना के जवानों से काफी संपर्क रहा था. इसी दौरान उसने सुरक्षा बलों के अनुशासन, बोलचाल और सख्त रवैये को करीब से देखा और समझा. पुलिस का कहना है कि बाद में यही अनुभव उसके लिए फर्जी CBI अधिकारी बनने की साजिश में काफी काम आया.
दूसरी आरोपी पूजा अग्रवाल करोल बाग में बार सिंगर रह चुकी है. पुलिस के मुताबिक, पूजा लोगों के व्यवहार को तेजी से समझने और माहौल को अपने हिसाब से मोड़ने में माहिर थी. आसिफा की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के तौर-तरीकों की समझ और पूजा की नाटकीय अंदाज में स्थिति संभालने की क्षमता ने दोनों को एक-दूसरे का साथी बना दिया. इसके बाद दोनों ने मिलकर ऐसा गिरोह तैयार किया, जो डर और भ्रम पैदा करके लोगों से पैसे ऐंठने लगा.
11 अगस्त की रात फर्जी CBI की रेड
इस गिरोह ने 11 अगस्त की रात करीब 10 बजे प्रशांत विहार में एक परिवार को निशाना बनाया. प्रार्थम अग्रवाल और उनकी मां घर पर मौजूद थे, तभी अचानक दरवाजे पर जोर-जोर से दस्तक हुई. बाहर करीब आठ लोग खड़े थे, जिनमें छह पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं. उन्होंने खुद को CBI के वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए घर में दाखिल होने की मांग की.
फर्जी अधिकारियों के पास नकली सरकारी पहचान पत्र थे और उन्होंने CBI के मोनोग्राम वाली गहरे रंग की जैकेट पहन रखी थी. उनके हावभाव और धमकाने के अंदाज से परिवार बुरी तरह घबरा गया. गिरोह के सदस्यों ने दावा किया कि घर में हाई-प्रोफाइल जांच के तहत छापा मारा जा रहा है. अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार को समझ ही नहीं आया कि आखिर उनके घर पर CBI की टीम क्यों पहुंची है.
सर्च वारंट मांगने पर धमकाया
प्रार्थम और उनकी मां ने जब कथित अधिकारियों से सर्च वारंट दिखाने को कहा तो गिरोह का रवैया और ज्यादा आक्रामक हो गया. आरोप है कि करीब डेढ़ घंटे तक परिवार को लगातार धमकाया गया और उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया. फर्जी अधिकारियों ने ऐसा माहौल तैयार कर दिया था कि परिवार को किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई का डर सताने लगा.
इसी दौरान घर के बाहर आसपास के लोग जमा होने लगे. जब गिरोह के सदस्यों को लगा कि अब उनकी पोल खुल सकती है तो उन्होंने कहा कि तलाशी से जुड़ा आधिकारिक नोटिस उनकी गाड़ी में रखा है. इसके बाद वे वहां से निकल गए. हालांकि, जाते-जाते गिरोह ने प्रार्थम के पिता के मोबाइल पर एक फर्जी CBI नोटिस भी भेजा था. आरोपी बाद में उस संदेश को डिलीट करने में कामयाब रहे, लेकिन प्रार्थम ने समय रहते उसका स्क्रीनशॉट ले लिया.
CCTV और टेक्निकल सर्विलांस से खुला राज
परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की और मामले की जांच के लिए कई टीमें बनाई गईं. ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस विजय सिंह के मुताबिक, जांच के दौरान CCTV फुटेज और तकनीकी निगरानी की मदद ली गई. पुलिस को जल्द ही इस पूरे नेटवर्क में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका के संकेत मिले. इसके बाद जांच की सुई उस शख्स की तरफ घूम गई, जिसने पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति की अहम जानकारी आरोपियों को दी थी.
पुलिस के मुताबिक, कुछ महीने पहले एक शादी समारोह में आसिफा और पूजा की मुलाकात 63 साल के पूर्व बैंकर कुलदीप शर्मा से हुई थी. कुलदीप ने प्रार्थम की व्यक्तिगत बैंकिंग से जुड़े काम संभाले थे और उसे परिवार की संपत्ति के बारे में जानकारी थी. आरोप है कि आसिफा और पूजा ने जब गुप्त रेड जैसी कार्रवाई करने की अपनी क्षमता के बारे में उसे बताया तो कुलदीप ने उन्हें संभावित शिकार की जानकारी उपलब्ध कराई.
रिश्तेदार ने जुटाए 'फर्जी अफसर'
पुलिस के अनुसार, फर्जी रेड को अंजाम देने के लिए पूजा ने अपने रिश्तेदार चंदर प्रकाश की मदद ली. चंदर प्रकाश पहले इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर का काम करता था. आरोप है कि उसने इस काम के लिए बेरोजगार युवकों शुभम, राजवीर सिंह और नितिन शर्मा को अपने साथ जोड़ा. इन युवकों को कथित तौर पर रोजाना के हिसाब से पैसे दिए जाते थे, ताकि वे फर्जी केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों की भूमिका निभा सकें.
पुलिस का कहना है कि गिरोह का पूरा तरीका डर और दबाव पर आधारित था. फर्जी सरकारी पहचान पत्र, CBI के लोगो वाली जैकेट और आधिकारिक कार्रवाई जैसी भाषा का इस्तेमाल कर आरोपियों ने पीड़ितों को इतना डरा दिया कि वे तुरंत विरोध करने की स्थिति में नहीं रहते थे. रोहिणी के डीसीपी शशांक जायसवाल के मुताबिक, गिरोह का मकसद था कि जांच-पड़ताल या पहचान की पुष्टि से पहले ही पीड़ित मानसिक रूप से टूट जाए और उनकी बात मानने लगे.
दिल्ली से मुंबई तक फर्जी रेड
पुलिस की कार्रवाई में पूजा और आसिफा समेत गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. इन मोबाइल फोन में फर्जी सरकारी पहचान पत्रों की तस्वीरें और कथित फर्जी रेड से जुड़े वीडियो मिले हैं. पुलिस के मुताबिक, इन वीडियो में गिरोह के सदस्य दिल्ली और मुंबई में CBI और ED अधिकारियों का रूप धारण कर कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं.
जांच एजेंसियां अब इन वीडियो और मोबाइल फोन में मिले डिजिटल सबूतों की मदद से गिरोह के बाकी सदस्यों और उनके पुराने मामलों का पता लगाने में जुटी हैं. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और उनसे कितनी रकम वसूली. फिलहाल फर्जी CBI रेड का यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे सरकारी एजेंसियों के नाम और वर्दी जैसे दिखने वाले प्रतीकों का इस्तेमाल कर लोगों के बीच डर पैदा किया जा सकता है.