scorecardresearch
 

आत्महत्या या हत्या? ट्विशा डेथ की पहली चार्जशीट में ही सामने आ गया सच

ट्विशा शर्मा डेथ केस में CBI ने कोर्ट में चालान दाखिल किया है. पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने, दहेज प्रताड़ना समेत कई गंभीर धाराओं में आरोप लगाए गए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

Advertisement
X
इस मामले में CBI की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में CBI की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

33 वर्षीय पूर्व मिस पुणे और मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है. जांच एजेंसी ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में आरोप लगाए हैं. 

चालान में दोनों के खिलाफ BNS की धारा 80(2), 85, 108 और 3(5) के तहत आरोप लगाए गए हैं. इनमें आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना से जुड़े आरोप भी शामिल हैं. इसके अलावा दोनों पर दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी केस दर्ज किया गया है.

दरअसल, ट्विशा शर्मा की शादी नवंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी. समर्थ की मां गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश में जिला जज के पद से रिटायर हुई थीं. शादी के करीब छह महीने बाद 12 मई 2026 को ट्विशा अपने भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में अचेत मिली थीं. 

उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगना बताई गई थी. इसके बाद ट्विशा के परिवार ने दहेज प्रताड़ना और उनकी मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए.

Advertisement

ट्विशा के परिवार और उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही ट्विशा को पति समर्थ और सास गिरिबाला की ओर से दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों को छुपाया गया और आरोपियों के रसूख की वजह से पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती. 

दूसरी तरफ गिरिबाला सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि ट्विशा मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया और ड्रग्स की लत से जूझ रही थीं. ट्विशा के परिवार ने इन दावों का कड़ा विरोध किया था.

मामले में FIR में देरी, भोपाल पुलिस की जांच पर सवाल और आरोपी पति के फरार रहने को लेकर विवाद बढ़ता गया. इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने केस की जांच CBI को सौंप दी. सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में स्वतः संज्ञान लिया और AIIMS के डॉक्टरों के पैनल से ट्विशा का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया. CBI की जांच में पुलिस की गंभीर लापरवाही भी सामने आई. 

जांच में पता चला कि जिस बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही गई थी, उसे पोस्टमॉर्टम के समय नहीं भेजा गया था और उसकी जब्ती के मेमो पर गवाहों के दस्तखत भी नहीं थे. इस लापरवाही को लेकर एक पुलिस अधिकारी पर जुर्माना भी लगाया गया. अब CBI के चालान के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement