कल्पना कीजिए कि आपने AI एजेंट को निर्देश दिया कि हर हफ्ते ₹2,000 के बजट में घर का किराना खरीदना है. इसके बाद एजेंट आपकी तय शर्तों के मुताबिक सामान चुने, कीमत चेक करे और UPI से पेमेंट भी कर दे. हर ट्रांजैक्शन के लिए आपको अलग से अप्रूवल देने की जरूरत न पड़े. भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर ऐसा सिस्टम तैयार करने की तैयारी हो रही है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार एक ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जिसके तहत AI एजेंट UPI के जरिए यूजर की ओर से छोटे डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इस फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है. प्रस्तावित यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल को अगले हफ्ते मुंबई में होने वाले ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में पेश किए जाने की संभावना है. हालांकि, NPCI की ओर से रॉयटर्स की इस रिपोर्ट पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
AI एजेंट को लिमिटेड पेमेंट अथॉरिटी
प्रपोज्ड सिस्टम में यूजर AI एजेंट को लिमिटेड पेमेंट अथॉरिटी दे सकेगा. यानी यूजर पहले से तय कर सकेगा कि एजेंट कब पेमेंट कर सकता है, कितनी रकम खर्च कर सकता है और किस तरह के ट्रांजैक्शन की अनुमति होगी. उदाहरण के लिए, कोई यूजर AI एजेंट को तय बजट में किराने का सामान खरीदने का निर्देश दे सकता है. अगर खरीदारी यूजर की तय शर्तों के मुताबिक है, तो एजेंट खुद पेमेंट पूरा कर सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, NPCI ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध करा सकता है, जिसे मर्चेंट सीधे अपने सिस्टम में इंटीग्रेट कर सकें.
एजेंटिक पेमेंट सिस्टम का शुरुआती इस्तेमाल कम रकम और बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन में हो सकता है. ग्रोसरी की खरीदारी इसका एक उदाहरण है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी इस तकनीक को जल्दी अपना सकते हैं, क्योंकि ऑनलाइन शॉपिंग में AI एजेंट की भूमिका लगातार बढ़ रही है. AI एजेंट सिर्फ प्रोडक्ट खोजने या कीमतों की तुलना करने तक सीमित नहीं रहेंगे. वे ऑफर और डिस्काउंट पहचान सकते हैं, यूजर के निर्देश पर ऑर्डर कर सकते हैं और तय कीमत या दूसरी शर्त पूरी होने पर ट्रांजैक्शन भी पूरा कर सकते हैं. यानी AI की भूमिका सलाह देने वाले टूल से आगे बढ़कर सीधे खरीदारी और पेमेंट करने वाले एजेंट की हो सकती है.
UPI Circle और Reserve Pay फीचर
प्रपोज्ड सिस्टम का आधार UPI Circle और Reserve Pay जैसे मौजूदा पेमेंट मैकेनिज्म हो सकते हैं. UPI Circle में प्राइमरी अकाउंट होल्डर किसी दूसरे यूजर को लिमिटेड पेमेंट अथॉरिटी दे सकता है. इसी तरह AI एजेंट को भी तय सीमा के भीतर पेमेंट करने की अनुमति दी जा सकती है. वहीं, Reserve Pay में ग्राहक भविष्य के कई डेबिट के लिए पहले से रकम ब्लॉक कर सकता है. फिलहाल बैंक अधिकतम 90 दिनों के लिए ₹10,000 तक की रकम ब्लॉक करने की अनुमति देते हैं. एजेंटिक पेमेंट के मामले में रकम और वैलिडिटी पीरियड की इन सीमाओं में बदलाव पर विचार किया जा सकता है.
UPI के बड़े नेटवर्क का मिलेगा फायदा
अगर AI एजेंट को UPI के जरिए पेमेंट करने की अनुमति मिलती है, तो इसका असर काफी बड़ा हो सकता है. रॉयटर्स के हवाले से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में UPI पर 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. Google Pay और PhonePe की हिस्सेदारी मासिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब तीन-चौथाई थी. इस बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क तक AI एजेंट की पहुंच भारत में एजेंटिक कॉमर्स को तेजी से बढ़ा सकती है.
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया की बड़ी पेमेंट कंपनियां AI बेस्ड कॉमर्स की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. Mastercard और Visa भारत में अलग-अलग एजेंटिक पेमेंट कैपेसिटी पर काम कर रहे हैं. Mastercard ने जून में नई दिल्ली में अपना पहला ऑथेंटिकेटेड एजेंटिक ट्रांजैक्शन पूरा किया था. वहीं, Pine Labs ने इस साल अपना P3P एजेंटिक प्रोटोकॉल लॉन्च किया, जिसके तहत एक बार की शुरुआती अथॉराइजेशन के बाद AI एजेंट UPI पेमेंट पूरा कर सकते हैं.
सुरक्षा और जिम्मेदारी सबसे बड़ा सवाल
AI को पेमेंट की अनुमति मिलने के साथ सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा होगा. प्रस्तावित सिस्टम में स्पेंडिंग लिमिट, आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, ऑडिट ट्रेल और लाइबिलिटी फ्रेमवर्क जैसी व्यवस्थाएं शामिल होने की उम्मीद है. हालांकि, अगर AI एजेंट गलत पेमेंट करता है या किसी तरह की धोखाधड़ी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी- यूजर, बैंक, मर्चेंट या AI एजेंट उपलब्ध कराने वाली कंपनी की, यह अभी स्पष्ट नहीं है.