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प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड... कौन बेहतर? कहां निवेश करने से बन सकते हैं अमीर

Best Return Strategy: आज के दौर में रियल एस्टेट (Real Estate) को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश का ठिकाना माना जाता है, जबकि म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और SIP तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.

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लंबी अवधि में कहां बनेगा मोटा पैसा? (Photo: AI)
लंबी अवधि में कहां बनेगा मोटा पैसा? (Photo: AI)

आज के दौर में सबसे सुलभ संपत्ति बनाने (Wealth Creation) के दो विकल्प हैं, प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड. लेकिन सवाल ये उठता है कि इन दोनों में से कौन-सा विकल्प आपके लिए लंबे समय में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. 

दरअसल, हमारे देश में रियल एस्टेट (Real Estate) को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश का ठिकाना माना जाता है, जबकि म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और SIP तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, पिछले करीब दो दशक में म्यूचुअल फंड ने भी बेहतरीन रिटर्न बनाकर दिया है. 

आइए सबसे पहले रियल एस्टेट में निवेश पर नफा-नुकसान को आंकते हैं. भारतीयों का प्रॉपर्टी से एक भावनात्मक जुड़ाव होता है, क्योंकि यह एक ठोस संपत्ति है, जिसे देखा और छुआ जा सकता है. आप सही जगह पर जमीन खरीद कर लंबी अवधि में मोटा मुनाफा कमा सकते हैं. खासकर अगर ऐसी जगहों जमीन खरीदते हैं, जहां से हाइवे, मेट्रो या फिर कोई बड़ा प्रोजेक्ट लगने वाला हो. 

कहां बनेगा मोटा पैसा?

रियल एस्टेट में निवेश को पर दोहरी कमाई होती है. जब आप मकान या फिर फ्लैट को निवेश के तौर पर लेते हैं. क्योंकि समय के साथ प्रॉपर्टी के दाम बढ़ते हैं और फिर हर महीने तय किराया मिलता है. मंदी या महामारी के दौर में भी जमीन या घर की वैल्यू शेयर मार्केट की तरह रोज ऊपर-नीचे नहीं होती है, जिससे मानसिक शांति मिलती है. 

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हालांकि प्रॉपर्टी में निवेश के साथ कई छिपे हुए खर्च जुड़े होते हैं, जैसे कि रजिस्ट्री फीस, ब्रोकरेज, हर साल का प्रॉपर्टी टैक्स और समय-समय पर मेंटेनेंस का खर्च. इसके अलावा प्रॉपर्टी को जरूरत पड़ने पर तुरंत बेचना बेहद मुश्किल होता है, कई बार सही खरीदार मिलने में महीनों लग जाते हैं. 

अब बात म्यूचुअल की करते हैं, म्यूचुअल फंड में निवेश पूरी तरह से लिक्विड और पारदर्शी होता है, जिसे सेबी (SEBI) रेगुलेट करता है. पिछले करीब दो दशक के आंकड़ों को देखें तो अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (फ्लेक्सी कैप या स्मॉल/मिड कैप) ने सालाना 12% से 15% या उससे भी अधिक का रिटर्न दिया है. म्यूचुअल फंड में कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है, जो लंबे समय में आपके पैसे को बहुत तेजी से बढ़ाता है. इसके अलावा आप जब चाहें एक क्लिक में अपनी यूनिट्स बेचकर पैसा सीधे बैंक खाते में मंगा सकते हैं. 

जबकि जमीन का एक टुकड़ा भी खरीदने के लिए लाखों रुपये जरूरत होती है, यानी मोटा निवेश करना पड़ता है. वहीं म्यूचुअल फंड में आप महज 500 रुपये से शुरुआत कर सकते हैं, अपनी सहूलियत के हिसाब से जमा और निकासी की सुविधा मिलती है. 

हालांकि म्यूचुअल फंड का रिटर्न पूरी तरह से शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है. युद्ध, महामारी या वैश्विक मंदी के समय इसमें शॉर्ट-टर्म में भारी गिरावट आ सकती है, जिसे देखकर कुछ निवेशक डर भी जाते हैं.

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अब एक उदाहरण से समझते हैं...
मान लीजिए राजू नाम के शख्स ने साल 2015 में वहां एक फ्लैट 65 लाख रुपये में खरीदा था. साल 2026 में उस फ्लैट की बाजार कीमत करीब 1.25 करोड़ हो चुकी है. यानी रकम लगभग दोगुनी हो गई. साथ ही राजू को इस फ्लैट से हर महीने करीब 30,000 रुपये किराया भी मिल रहा है.

गणित क्या कहता है?
अब अगर राजू के 65 लाख रुपये फ्लैट की तुलना म्यूचुअल फंड से करें तो प्रॉपर्टी ने 11 साल में पैसे को दोगुना किया, जिसे सालाना कंपाउंडेड रिटर्न (CAGR) के हिसाब से देखें तो यह करीब 6% से 7% बैठता है. किराये को भी जोड़ लें तो यह 8-9% तक जा सकता है. 

वहीं, अगर राजू ने साल 2015 में 65 लाख रुपये की रकम किसी अच्छे डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड में एकमुश्त डाली होती, तो 12% से 14% के औसत रिटर्न के हिसाब से वह रकम आज 2.3 करोड़ से 2.8 करोड़ रुपये के बीच होती. साफ है कि शुद्ध रिटर्न के मामले में लंबी अवधि में म्यूचुअल फंड्स अक्सर रियल एस्टेट को पीछे छोड़ देते हैं. लेकिन अधिकतर लोग होम लोन लेकर घर खरीदते हैं.   

लेकिन ठहरिए, दोनों एसेट क्लास (प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड) की अपनी-अपनी भूमिका है. निवेश का फैसला आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. अगर आपके पास बड़ा फंड है और नियमित इनकम चाहिए तो प्रॉपर्टी एक अच्छा विकल्प है, जहां से आपको रेंटल इनकम मिलती रहेगी और एसेट भी सुरक्षित रहेगा. 

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वहीं आपका लक्ष्य अधिकतम वेल्थ क्रिएशन है. अगर आपकी उम्र कम है और आप अगले 10-15 वर्षों में एक बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड आपके लिए कहीं अधिक स्मार्ट विकल्प साबित हो सकता है. 

हालांकि हमेशा एक्सपर्ट्स की सलाह होती है कि अपनी सारी पूंजी किसी एक जगह लगाने के बजाय डायवर्सिफिकेशन का नियम अपनाएं. कुछ पैसा रियल एस्टेट में रखें और एक बड़ा हिस्सा म्यूचुअल फंड में निवेश करें, ताकि सुरक्षा और हाई-रिटर्न दोनों का फायदा मिल सके.

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