केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर' योजना ने एक बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया है. इस योजना ने देश भर में 60 लाख परिवारों का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके साथ ही सरकार के 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से रोशन करने के कुल लक्ष्य का 60 फीसदी हिस्सा पूरा हो गया है. खास बात यह है कि 50 लाख से 60 लाख परिवारों तक पहुंचने का सफर महज दो महीने के भीतर पूरा हुआ है, जो योजना के तेजी से क्रियान्वयन को दर्शाता है.
118 दिनों से घटकर मात्र 6 दिनों का सफर
दरअसल, 13 फरवरी 2024 को ₹75,021 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुई इस योजना के शुरुआती दिनों में 1 लाख परिवारों तक पहुंचने में 118 दिन लगे थे. लेकिन अब प्रक्रिया आसान होने और 80 से अधिक डिस्कॉम को राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ने के बाद अब हर 1 लाख नए परिवार मात्र 6 दिनों में इस योजना से जुड़ रहे हैं. फिलहाल में देश में 50.99 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे ग्रिड में 17,855 मेगावाट क्षमता जुड़ी है.
कुशल कामगार और ग्रीन इकोसिस्टम का विकास
यह योजना केवल बिजली देने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में 'ग्रीन इकोनॉमी' के लिए कुशल कार्यबल भी तैयार कर रही है. 3 लाख कुशल कर्मियों के लक्ष्य के मुकाबले NISE और NPTI जैसे संस्थानों के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिसमें 1 लाख सौर पीवी तकनीशियन शामिल हैं.
पीएम सूर्य घर योजना के तहत 37,000 से अधिक स्थानीय व्यवसाय पंजीकृत हुए हैं. इससे निर्माण, सप्लाई चेन, इंस्टॉलेशन और रखरखाव के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है.
इस योजना में सरकार की ओर से बड़ी सब्सिडी दी जाती है. जिससे योजना की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹33,642 करोड़ की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की है. यह भुगतान कमीशनिंग के 15 दिनों के भीतर किया जाता है.
इसके अलावा शुरुआती लागत को कम करने के लिए 'जन समर्थ' पोर्टल के माध्यम से 5.75% की रियायती ब्याज दर पर बिना किसी गारंटी (कोलैटरल-फ्री) के 10 साल तक की अवधि के लिए लोन दिया जा रहा है.
20.7 लाख परिवारों का बिजली बिल हुआ शून्य
इस योजना का सबसे प्रत्यक्ष लाभ परिवारों की जेब पर दिख रहा है. योजना से जुड़े 20.7 लाख से अधिक परिवारों का मासिक बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है. नेट-मीटरिंग व्यवस्था के जरिए ये परिवार अपनी अतिरिक्त सौर बिजली स्थानीय ग्रिड को बेच भी रहे हैं, जिससे एक साधारण उपभोक्ता अब ऊर्जा का सक्रिय 'उत्पादक' बन गया है.
60 लाख परिवारों की यह उपलब्धि केवल रूफटॉप सोलर लगाने का आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह देश में स्वच्छ ऊर्जा, कुशल रोजगार, घरेलू सौर निर्माण और विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन के एक मजबूत इकोसिस्टम के निर्माण का प्रतीक है.