पठानकोट स्थित उपभोक्ता आयोग ने राजधानी एक्सप्रेस में रिजर्वेशन कराके 3AC कोच से यात्रा कर रहे यात्री का सामान गायब होने के मामले में फैसला सुनाया है. ये पूरा मामला साल 2021 का है और आयोग ने रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाते हुए आदेश दिया है कि रेलवे उस यात्री को मुआवजा दे.
ट्रेन में गायब हुआ महिला का बैग
यह मामला 14 दिसंबर, 2021 का है. जब एक महिला अपने पति और बच्चे के साथ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 12423 के 3AC कोच में यात्रा कर रही थी. ट्रेन पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (पूर्व में मुगल सराय) पर रुकी थी, तभी उसे पता चला कि उसका हैंडबैग गायब है. उसमें 5,000 रुपये कैश, करीब 15 ग्राम वजन का एक मंगलसूत्र और SBI पासबुक थी.
महिला शिकायतकर्ता के अनुसार, चोरी होते ही तुरंत पता चला और उन्होंने कोच अटेंडेंट की तलाश की, लेकिन वो मौजूद नहीं था. इसके बाद महिला के पति ने ट्रेन में मौजूद RPF एस्कॉर्ट और टीटीई (TTE) को इसकी सूचना दी. उसके बाद 16 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 'शून्य एफआईआर' दर्ज की गई और इसे जीआरपी कानपुर सेंट्रल को भेजा गया.
FIR के बाद बार-बार अनुरोध करने के बावजूद चोरी गया सामना बरामद नहीं हो सका. थक-हारकर महिला के पति ने भारतीय रेलवे (Indian Railway) पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई.
रेलवे ने दिया ये तर्क
ट्रेन में हैंडबैग गायब होने के इस मामले के आयोग में पहुंचने के बाद रेलवे ने तर्क दिया कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर को चोरी की सूचना नहीं दी गई थी. ऐसे में मौजूदा कानूनी सिद्धांतों के तहत भारतीय रेलवे बिना बुकिंग वाले सामान के खोने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
कोर्ट ने लगाई रेलवे को फटकार
Indian Railway द्वारा इस मामले में दिए गए तर्क काम नहीं आए और आयोग ने पाया कि रेलवे के खुद के रिकॉर्ड से पता चलता है कि यात्रा के दौरान चोरी की सूचना आरपीएफ एस्कॉर्ट को दी गई थी. यानी रेलवे के दावे का खंडन खुद इस सबूत ने कर दिया. उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को दोषी ठहराया.
बिजनेस टुडे पर एक मीडिया रिपोर्ट्स में केएस लीगल एंड एसोसिएट्स की मैनेजिंग पार्टनर सोनम चंदवानी के हवाले से कहा गया है कि आयोग ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने तुरंत रेलवे अधिकारियों को सूचित किया था और अपने स्टेशन पर पहुंच Zero FIR भी कराई थी. इसके साथ ही गायब हुए सामान के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए थे.
इतना मुआवजा देने का आदेश
रेलवे को सेवा में खामी का दोषी पाते हुए उपभोक्ता आयोग ने उत्तरी रेलवे को मुआवजे के रूप में 70,000 रुपये और शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान होने तक 6% सालाना ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया. इसके साथ ही आयोग ने कहा कि मानसिक उत्पीड़न और पीड़ा के लिए 10,000 रुपये भी दिए जाएं. इसके साथ ही आयोग ने कहा कि अगर आदेश के एक महीने के भीतर मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो पूरी रकम पर 12% ब्याज चुकाना होगा.