scorecardresearch
 

8th Pay Commission: क्या है फिटमेंट फैक्टर? 8वें वेतन आयोग में सैलरी तय करने में इसकी खूब है चर्चा

8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हैं. फिटमेंट फैक्टर ही मौजूदा बेसिक पे को नए वेतन ढांचे में बदलने का आधार बनेगा. ऐसे में समझना जरूरी है कि इसका गणित क्या है और अलग-अलग फैक्टर पर बेसिक सैलरी कितनी हो सकती है.

Advertisement
X
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए पे-रिवीजन में फिटमेंट फैक्टर की अहम भूमिका है. (Photo: ITG/@Gfx)
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए पे-रिवीजन में फिटमेंट फैक्टर की अहम भूमिका है. (Photo: ITG/@Gfx)

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हैं, क्योंकि उनकी सैलरी और पेंशन रिवीजन का पूरा दारोमदार आयोग की सिफारिशों पर ही टिका है. फिलहाल 8वां वेतन आयोग देश के अलग-अलग शहरों में बैठकें करके कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से राय-मशविरा ले रहा है और उनकी मांगें नोट कर रहा है. कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की मांगों में सबसे अहम मुद्दा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) है. 

अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठन 1.92x से लेकर 2.57x और 3x या उससे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं. इसी वजह से बेसिक पे और मिनिमम सैलरी को लेकर अलग-अलग आंकड़े चर्चा में हैं. ऐसे में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर आखिर होता क्या है, इसकी गणना किस आधार पर की जाती है और इसका कर्मचारी की बेसिक सैलरी पर कितना असर पड़ सकता है.

फिटमेंट फैक्टर क्यों है इतना अहम?

फिटमेंट फैक्टर को आसान भाषा में समझें तो यह वह गुणक है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा बेसिक सैलरी को नए वेतन ढांचे में बदलने के लिए किया जाता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है और 1.92x फिटमेंट फैक्टर लगाया जाए, तो उसकी नई बेसिक सैलरी होगी: ₹18,000 × 1.92 = ₹34,560, यानी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹16,560 बढ़ जाएगी.

Advertisement

इसी तरह अगर 2.57x फिटमेंट फैक्टर लागू हो, तो ₹18,000 की बेसिक सैलरी ₹46,260 हो जाएगी. वहीं 3x फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से ₹18,000 बेसिक सैलरी बढ़कर ₹54,000 हो जाएगी. लेकिन इन आंकड़ों को नई सैलरी का ऐलान समझना सही नहीं होगा. ये आंकड़े सिर्फ यह समझाने के लिए हैं कि अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर से बेसिक पे पर कितना अलग असर पड़ सकता है.

1.92x, 2.57x और 3x की चर्चा क्यों?

फिटमेंट फैक्टर को लेकर इस समय कई तरह की मांगें और अनुमान सामने आ रहे हैं. अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठन अपनी मांगों के हिसाब से अलग आंकड़े सुझा रहे हैं. यही वजह है कि कहीं 1.92x, कहीं 2.57x और कहीं 3x जैसे आंकड़े सुनने को मिल रहे हैं. इन मांगों के पीछे वेतन, महंगाई और कर्मचारियों की वास्तविक आय में बढ़ोतरी जैसे अलग-अलग आधार रखे जा रहे हैं. 

फिटमेंट फैक्टर में ये दो चीजें हैं अहम

फिटमेंट फैक्टर का गणित समझने के लिए दो चीजें अहम हैं. पहली, उस समय कर्मचारियों को मिल रहा महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA) और दूसरी ची, सरकार की ओर से दी जाने वाली वास्तविक अतिरिक्त वेतन बढ़ोतरी. नया वेतन ढांचा बनाते समय मौजूदा वेतन और महंगाई के असर को ध्यान में रखते हुए नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. 

Advertisement

इसी तुलना से फिटमेंट फैक्टर का गुणक सामने आता है. यानी सिर्फ यह देखना कि मौजूदा बेसिक कितनी है, पर्याप्त नहीं है. यह भी देखना होगा कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के समय तक कर्मचारियों का महंगाई भत्ता कितना होगा और सरकार वास्तविक वेतन में कितनी अतिरिक्त बढ़ोतरी देना चाहती है.

60% महंगाई भत्ते का गणित भी समझिए

फिटमेंट फैक्टर की चर्चा में 60% महंगाई भत्ता यानी DA का आंकड़ा भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनवरी 2026 तक यह वाकई में 60% के स्तर पर पहुंच चुका है. 7वें वेतन आयोग के समय भी DA को बेसिक सैलरी में समायोजित करने के बाद नए वेतन ढांचे का गणित तैयार किया गया था. इसी तरह 8वें वेतन आयोग ​की सिफारिशें लागू होते समय भी DA और नई वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव फिटमेंट फैक्टर के गणित को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, मौजूदा DA के आधार पर सीधे कोई अंतिम फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हो जाता. अंतिम आंकड़ा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले से ही स्पष्ट होगा.

बेसिक पे बढ़ने का मतलब समझना जरूरी

यह भी समझना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर का सीधा असर सबसे पहले बेसिक पे पर पड़ता है. कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी में बेसिक के अलावा हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवलिंग/ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और दूसरे भत्ते भी शामिल होते हैं. इसलिए अगर उदाहरण के तौर पर ₹18,000 की बेसिक सैलरी को 1.92x फिटमेंट फैक्टर से बढ़ाकर ₹34,560 किया जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी की पूरी ग्रॉस सैलरी भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी. वास्तविक सैलरी कितनी होगी, यह नए पे मैट्रिक्स और उस समय लागू होने वाले भत्तों के नियमों पर निर्भर करेगा.

Advertisement

अगर सिर्फ कैलकुलेशन समझने के लिए 1.92x फिटमेंट फैक्टर लिया जाए, तो लेवल-1 कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹34,560 हो सकती है. इसी तरह 2.57x  फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक सैलरी ₹46,260 और 3x पर ₹54,000 होगी. इससे साफ है कि फिटमेंट फैक्टर में थोड़ा सा अंतर भी नई बेसिक सैलरी के आंकड़े में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है. यही कारण है कि कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के लिए फिटमेंट फैक्टर की मांग इतना महत्वपूर्ण मुद्दा है.

अंतिम फैसला किसके हाथ में होगा?

फिलहाल 1.92x, 2.57x या 3x में से किसी को भी अंतिम फिटमेंट फैक्टर नहीं माना जा सकता. ये अलग-अलग संगठनों की मांगों और उन मांगों के आधार पर लगाए जा रहे अनुमानों से जुड़े आंकड़े हैं. फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा. आयोग किन आंकड़ों और किन आर्थिक आधारों को ध्यान में रखता है, यही आगे की तस्वीर तय करेगा. केंद्र सरकार ने 3 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 8वें वेतन आयोग का गठन किया था. 8वें वेतन आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं. इस हिसाब से रिपोर्ट मई 2027 के आसपास आनी चाहिए.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement