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यूरोप को भी रास नहीं आया चीन का OBOR, कहा EU को खतरा

चीन के रेशम मार्ग सम्मेलन में कई यूरोपीय देशों ने व्यापार समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है. उल्लेखनीय है कि बीजिंग इस समझौते को सफल बनाने के लिए सभी से समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है.

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अब यूरोप को भी दिख रही चीन के ओबोर में दिक्कतें
अब यूरोप को भी दिख रही चीन के ओबोर में दिक्कतें

चीन के रेशम मार्ग सम्मेलन में कई यूरोपीय देशों ने व्यापार समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है. उल्लेखनीय है कि बीजिंग इस समझौते को सफल बनाने के लिए सभी से समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है.

एक राजनयिक ने पहचान जाहिर ना करने की शर्त पर बताया कि यूरोपीय संघ के उन देशों में से हैं जिसने इस मसौदे को अस्वीकार कर दिया है. चीन के इस सम्मेलन में दुनियाभर के करीब 30 देशों के नेता भाग ले रहे हैं.

चीन की यह योजना प्राचीन रेशम मार्ग को पुनर्जीवित करने की एक कोशिश है जिससे एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच व्यापार को नए आयाम दिए जा सके. यह बुनियादी विकास क्षेत्र की एक विशाल परियोजना है. इस सम्मेलन का आज समापन होना है जिसमें देशों के प्रमुख एक अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर करेंगे.


राजनयिक ने बताया कि सभी सम्मेलन के व्यापार मंच में भाग ले रहे सभी यूरोपीय देशों ने निर्णय किया है कि वह मसौदे को अस्वीकार करेंगे क्योंकि उनका मानना है कि इसमें यूरोपीय संघ की चिंताओं को पर्याप्त रूप से सुलझाया नहीं है जो सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद एवं सामाजिक और पर्यावरणीय मानकों से संबद्ध हैं. अधिकारी के अनुसार चीन ने पिछले हफ्ते ही यह मसौदा उपलब्ध कराया है और कहा है कि इस पर और काम नहीं किया जा सकता.

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गौरतलब है कि चीन ने नये रेशम मार्ग को सदी की परियोजना करार दिया और परियोजनाओं के लिये 100 अरब यूआन की पेशकश की है. यह देश को एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के अधिकतर देशों सो जोड़ने की महत्वकांक्षी पहल का हिस्सा है. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने देश के दृष्टिकोण के बारे में अपने संबोधन में कहा, हमें सहयोग का एक खुला मंच तैयार करना चाहिए और एक खुली के रूप में बढ़ना और बरकरार रखना है.

चीन ने रेशम मार्ग कोष के लिये 100 अरब यूआन (14.5 अरब डालर) का योगदान करेगा. रेशम मार्ग कोष का गठन 2014 में में किया गया जिसका मकसद बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का वित्त पोषण करना. इस योगदान के साथ इसका आकार 55 अरब डालर हो जाएगा तथा 8.75 अरब डालर की वित्तीय सहायता एक दिशा एक मार्ग पहल में शामिल देशों को दी जाएगी. इसका मकसद चीन के प्रभाव और वैश्विक संपर्क को बढ़ाना है.

 

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