कभी होम लोन लेने का मतलब बैंक के कई चक्कर लगाना, ढेरों कागजी कार्रवाई और लंबे इंतजार से होता था, अब तस्वीर बदल रही है. अधिक से अधिक भारतीय अब होम लोन लेने की शुरुआत ऑनलाइन कर रहे हैं, वहीं छोटे शहर भी हाउसिंग डिमांड के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं.
SGA PR की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे शहर और डिजिटल लेंडिंग भारत के हाउसिंग फाइनेंस बाजार में विकास के अगले चरण को गति दे सकते हैं. ‘Housing Finance in India – The Silent Giant of Retail Credit’ नाम की इस रिपोर्ट में होम लोन के बदलते परिदृश्य को रेखांकित किया गया है. इसमें बताया गया है कि टेक्नोलॉजी तेजी से उस तरीके को बदल रही है, जिससे ग्राहक हाउसिंग फाइनेंस की जानकारी हासिल करते हैं और लोन के लिए आवेदन करते हैं.
92% आवेदन डिजिटल तरीके से प्रोसेस
हाउसिंग फाइनेंस में डिजिटल अपनाने की रफ्तार हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में हाउसिंग फाइनेंस के करीब 92% आवेदन डिजिटल तरीके से प्रोसेस किए गए, जबकि 2020 में यह आंकड़ा लगभग 60% था. लोन देने वाली कंपनियों तक पहुंचने के तरीके में भी बदलाव दिखाई दे रहा है. करीब 42% हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने बताया कि अब उनके ज्यादातर इन्क्वायरी डिजिटल माध्यमों से आती हैं.
हालांकि, होम लोन की पूरी प्रक्रिया अभी डिजिटल नहीं हुई है, कुछ अनसिक्योर्ड लोन की तुलना में हाउसिंग फाइनेंस में अभी भी प्रॉपर्टी की जांच, फिजिकल वेरिफिकेशन और फील्ड लेवल पर काम की जरूरत होती है. इसलिए इस प्रक्रिया में मैनुअल हस्तक्षेप अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है.
यह भी पढ़ें: रियल एस्टेट से भी कमाएंगे ऋतिक रोशन! लीज पर दिया ऑफिस, होगा करोड़ों का इनकम
छोटे शहर बने ग्रोथ के बड़े बाजार
हालांकि, बड़ी कहानी यह है कि ये होम लोन आखिर कहां से आ रहे हैं, रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी होम लोन के कुल वॉल्यूम में करीब 64% है. 2025 में इन शहरों में होम लोन का वॉल्यूम सालाना आधार पर 81% बढ़ा. इस बदलाव के पीछे कई वजहें हैं. बढ़ती आय, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार के नए अवसर और तेजी से हो रहा शहरीकरण छोटे शहरों में लोगों को घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.
बड़े महानगरों में घरों की बढ़ती कीमतें भी इस बदलाव की एक अहम वजह हैं. जहां प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, वहीं छोटे शहरों और कस्बों में खरीदारों को अपेक्षाकृत किफायती घर मिल सकते हैं.
फिनटेक बदल रहा है लोन तलाशने का तरीका
टेक्नोलॉजी मॉर्गेज डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा कर रही है, फिनटेक प्लेटफॉर्म डिजिटल माध्यम से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को लोन देने वाली कंपनियों से जोड़ रहे हैं. इन प्लेटफॉर्म की मदद से ग्राहक अपनी लोन पात्रता जांच सकते हैं, अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकते हैं, दस्तावेज पूरे कर सकते हैं और अपनी जरूरत के मुताबिक लोन देने वाले संस्थानों की तलाश कर सकते हैं.
SGA PR के CEO राहुल जैन ने कहा कि अब अवसर इस बात में है कि औपचारिक हाउसिंग क्रेडिट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए, खासकर तब जब घरों की मांग महानगरों से आगे बढ़कर छोटे शहरों तक पहुंच रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अफोर्डेबल हाउसिंग, छोटे शहरों से आने वाली मांग और डिजिटल सोर्सिंग आने वाले समय में ग्रोथ के प्रमुख क्षेत्र बने रह सकते हैं. 2030 तक डिजिटल सोर्सिंग की हिस्सेदारी 70% से अधिक हो सकती है, जबकि लोन देने की प्रक्रिया में AI आधारित अंडरराइटिंग का इस्तेमाल भी ज्यादा आम हो सकता है.
भारत के हाउसिंग फाइनेंस बाजार की अगली बड़ी ग्रोथ स्टोरी इसलिए सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी. आने वाले समय में छोटे शहर और कस्बे इस विकास के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं और टेक्नोलॉजी लोन देने वाली कंपनियों को ग्राहकों तक ज्यादा तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंचने में मदद कर सकती है.
यह भी पढ़ें: भारत के अमीर निवेशकों की पहली पसंद बना रियल एस्टेट, खूब खरीद रहे हैं प्रॉपर्टी