भारत के युवा और अमीर खरीदार देश के हाउसिंग मार्केट को बदल रहे हैं. स्टार्टअप फाउंडर, कारोबारी, टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल और पहली पीढ़ी में संपत्ति बनाने वाले लोग कम उम्र में ही पैसा कमा रहे हैं और पिछली पीढ़ियों की तुलना में प्रॉपर्टी को अलग नजरिए से देख रहे हैं. अमीर खरीदार अब जमीन और कम घनत्व वाले इलाकों में रहने के विकल्प तलाश रहे हैं. हालांकि, पहली बार घर खरीदने वालों के लिए किफायती घर अभी भी बड़ी चुनौती हैं, खासकर मुंबई जैसे महंगे शहरों में.
समिरा हैबिटैट्स (इंडिया) लिमिटेड की ग्रुप सीईओ और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सोनाली राजपूत ने कहा कि युवा और अमीर खरीदार अब रियल एस्टेट को सिर्फ घर खरीदने के तौर पर नहीं देखते. राजपूत ने कहा, “कई खरीदारों के पास पहले से ही वित्तीय संपत्तियों में निवेश है. इसलिए वे रियल एस्टेट को सिर्फ घर खरीदने के लिए नहीं, बल्कि अपनी संपत्ति में विविधता लाने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने के तरीके के रूप में देख रहे हैं.”
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इस बदलाव के कारण जमीन पर भी खरीदारों का ध्यान बढ़ रहा है. तैयार घर या फ्लैट की तुलना में जमीन खरीदार को उसके भविष्य के इस्तेमाल का फैसला करने की आजादी देती है. इसका इस्तेमाल निवेश, दूसरा घर, बड़ा पारिवारिक घर या आने वाली पीढ़ियों के लिए संपत्ति के रूप में किया जा सकता है.
राजपूत के मुताबिक, युवा खरीदारों के बीच लग्जरी की परिभाषा भी बदल रही है. अब सिर्फ बड़ा फ्लैट खरीदना ही प्राथमिकता नहीं है. खरीदार निजता, खुली जगह, प्रकृति के करीब रहना, कम भीड़ वाले इलाके और अपनी पसंद के मुताबिक घर बनाने की आजादी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं.
किफायती घरों की उपलब्धता अभी भी चुनौती
हालांकि, युवा भारतीयों में घर खरीदने की इच्छा मजबूत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे आसानी से घर खरीद पा रहे हैं. खासकर तब, जब किफायती घरों की उपलब्धता कम हो, यूके रियल्टी के डायरेक्टर देवांशु बंसल ने नाइट फ्रैंक के H1 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिना बिकी इन्वेंट्री में सालाना आधार पर 7% की कमी आई है. वहीं, 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये की कीमत वाले घरों की बिना बिकी इन्वेंट्री 43% बढ़ गई.
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बंसल ने कहा, “जिन घरों को युवा खरीदार खरीद सकते हैं, वे बिक रहे हैं, लेकिन बाजार में जो नए घर आ रहे हैं, वे उनकी पहुंच से बाहर हैं,”
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में यह चुनौती और बड़ी है. बंसल के मुताबिक, नाइट फ्रैंक के आंकड़ों में MMR भारत के उन दो बाजारों में शामिल है, जहां EMI और आय का अनुपात 50% की तय किफायती सीमा से ऊपर है.
उन्होंने कहा, “मुंबई में 28 साल का पहली बार घर खरीदने वाला व्यक्ति घर खरीदना नहीं छोड़ना चाहता. समस्या यह है कि उसकी एक आय के हिसाब से सही कीमत वाला घर उपलब्ध नहीं है.”
बंसल ने कहा कि डेवलपर्स को युवा खरीदारों की सकारात्मक सोच को पक्की मांग नहीं मानना चाहिए. युवाओं की दिलचस्पी को वास्तविक खरीद में बदलने के लिए उनकी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर घर तैयार करने होंगे. इसके लिए छोटे लेकिन बेहतर तरीके से बनाए गए कारपेट एरिया, सही शुरुआती कीमत और समय पर घर की डिलीवरी जरूरी हो सकती है. इससे युवा परिवार लंबे समय के लिए अपने खर्च और वित्तीय योजना बना सकेंगे.
बंसल ने कहा, “अगर घर ऐसे खरीदारों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे, तो उनकी दिलचस्पी बिक्री में बदलेगी. उन्हें नजरअंदाज किया गया तो यह सिर्फ एक सर्वे बनकर रह जाएगा.”