अमेरिका और ईरान के बीच जंग की एक नई लहर ने फिर से वही डर पैदा कर दिया है, जो मार्च के बाद ईरान पर हमले के बाद शुरू हो गया था. नए हमलों की वजह से कच्चे तेल के दाम एक बार फिर ऊपर भागने लगा है और अब ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है.
कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य तनाव की एक नई लहर के कारण आई है. अमेरिका ने फारस की खाड़ी और ओमान सागर में ईरानी जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिसमें लाखों बैरल तेल बह गए. इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर तत्काल जवाबी मिसाइल हमले किए.
इस नए टकराव से ऐसा दिखाई दे रहा है कि मार्च-अप्रैल और मई के दौरान वाली लड़ाई फिर से शुरू होते हुए दिखाई दे रही है. वहीं गोल्डमैन सैक्स जैसे बैंकर ने भी चेतावनी दी है कि अगर ऐसे ही हमले जारी रहे तो कच्चे तेल का दाम एक बार फिर 120 डॉलर के पार जा सकता है.
जुलाई के बाद पहली बार हुआ ऐसा
10 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत जुलाई के बाद पहली बार तीन अंकों में पहुंची और 101.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड की कीमत भी इसके कुछ ही पीछे 96.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई. इसके साथ ही एलएनजी की कीमतों में भी उछाल आई है और अभी होमुर्ज के बंद होने के कारण कीमते और भी ऊपर जा सकती हैं.
भारत को कितने पर मिल रहा कच्चा तेल?
इस नई जंग से भारतीय कच्चे तेल की कीमत 109 डॉलर तक पहुंच गई, जो 4 महीने का उच्चतम स्तर है. अब एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि तेल की कीमतों का इतनी तेजी से ऊपर जाना ठीक नहीं है. उनका कहना है कि ईंधन की कीमतों का ऊपर रहना ज्यादा महंगाई का कारण बन सकती है.
शेयर बाजार से कंज्यूमर गूड्स पर असर
तेल की कीमतें अगर ऐसे ही ऊपर बनी रहती हैं तो महंगाई तेजी से बढ़ सकती है, क्योंकि भारत 80 फीसदी से ज्यादा एनर्जी इम्पोर्ट करता है और इसी के सपोर्ट से इंडस्ट्री चलती है. खाने की चीजों से लेकर ट्रांसपोर्ट और बिजनेस कॉस्ट तक सभी चीजें महंगी हो सकती है. वहीं शेयर बाजार के दिग्गजों का अंदाजा है कि इससे मार्केट पर भी असर होगा और कंपनियों की कमाई घट सकती है और बाजार में गिरावट आ सकती है.